बिहार में बिजली कंपनियों के लिए स्मार्ट मीटर अब एक खुफिया तकनीक की तरह काम कर रहे हैं। इनसे मिलने वाले आंकड़ों के विश्लेषण से बिजली चोरी और उपभोक्ताओं के संदिग्ध व्यवहार की जानकारी सीधे बिजली कंपनी तक पहुंच रही है। कंपनी के अनुसार अब तक 10 अरब डाटा प्वाइंट्स जमा हो चुके हैं, जिनके आधार पर भविष्य की आपूर्ति रणनीति भी तैयार की जा रही है।
रात 9 बजे के बाद खपत घटी तो पहुंचेगी टीम
बिजली कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक, कई मामलों में व्यावसायिक प्रतिष्ठान अपना कनेक्शन घरेलू उपभोक्ता के नाम पर लेकर गैरकानूनी तरीके से बिजली इस्तेमाल करते हैं। ऐसे कनेक्शनों की पहचान अब स्मार्ट मीटर के जरिए आसानी से हो रही है।
व्यावसायिक मीटर पर आमतौर पर शाम 6 से रात 9 बजे के बीच खपत अधिक रहती है और उसके बाद लगभग खत्म हो जाती है, जबकि असली घरेलू कनेक्शन में रात 9 बजे के बाद खपत बढ़ जाती है। जब आंकड़ों में यह पैटर्न उलटा नजर आता है, तो बिजली कंपनी की टीम को संबंधित उपभोक्ता के घर जाकर जांच करने का निर्देश दिया जाता है।
ट्रांसफार्मर पर लगे मीटर भी बने निगरानी तंत्र
हर मोहल्ले के वितरण ट्रांसफार्मर पर भी स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, जिनसे यह पूरा ब्योरा मिलता है कि मोहल्ले में कुल कितनी बिजली भेजी जा रही है। अगर बिलिंग के आंकड़े ट्रांसफार्मर से जा रही बिजली से कम निकलते हैं, तो बिजली कंपनी तुरंत सक्रिय हो जाती है और मोहल्ले के सभी स्मार्ट मीटर की जांच कर यह पता लगाया जाता है कि कम खपत का आंकड़ा कहां से आ रहा है। इसके बाद संबंधित उपभोक्ता के घर जांच की जाती है।
बिहार में देश के 70% स्मार्ट मीटर
बिहार में अब तक करीब 93 लाख घरेलू उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जबकि राज्य में इस श्रेणी के कुल उपभोक्ताओं की संख्या करीब 2.25 करोड़ है। बिहार में लगे स्मार्ट मीटर पूरे देश में लगे स्मार्ट मीटर का करीब 70 प्रतिशत हैं।
इन मीटरों से मिलने वाले आंकड़ों से यह भी पता चल रहा है कि बिजली खपत किस रफ्तार से बढ़ रही है और आने वाले समय में इसका रुख क्या रहेगा। इसी विश्लेषण के आधार पर बिजली कंपनी भविष्य की आपूर्ति की रणनीति भी तैयार कर रही है।


