Varanasi Madarsa ATS Investigation: वाराणसी के मदरसों की ATS जांच को लेकर चल रहे विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने जांच पर रोक लगाने की मांग को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट किया कि किसी संस्था के खिलाफ जांच शुरू करना उसे दोषी मान लेना नहीं होता। कोर्ट ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले उसमें दखल देने की आवश्यकता नहीं है।
Varanasi Madarsa ATS Investigation: ATS जांच को क्यों दी गई थी चुनौती?
दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार ने 9 दिसंबर 2025 को एक आदेश जारी कर कुछ मदरसों समेत कई संस्थानों की ATS से जांच कराने का निर्णय लिया था। सरकार का कहना था कि सुरक्षा एजेंसियों को मिले कुछ खुफिया संकेतों के आधार पर यह कदम उठाया गया है। इसके बाद मदरसा प्रबंधन समिति और टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया ने इस आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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Varanasi Madarsa ATS Investigation: याचिकाकर्ताओं ने क्या कहा?
याचिका में कहा गया कि ATS जांच से मदरसों की प्रतिष्ठा प्रभावित होगी और बिना किसी ठोस कारण के उन्हें संदेह के दायरे में लाया जा रहा है।याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई कि जांच के आधार पर आगे उनके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है। इसी वजह से उन्होंने अदालत से जांच प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
Varanasi Madarsa ATS Investigation: सरकार ने रखा अपना पक्ष
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि यह कार्रवाई केवल वाराणसी के मदरसों तक सीमित नहीं है। सरकार के अनुसार, पूरे उत्तर प्रदेश में करीब 4,000 संस्थानों की जांच की जा रही है। यह प्रक्रिया इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर शुरू की गई है और इसका उद्देश्य केवल तथ्यों की पुष्टि करना है, किसी संस्था को पहले से दोषी मानना नहीं।
Varanasi Madarsa ATS Investigation: हाईकोर्ट ने क्या टिप्पणी की?
जस्टिस नीरज तिवारी और जस्टिस विवेक सरन की पीठ ने कहा कि किसी भी जांच की शुरुआत को दंडात्मक कार्रवाई नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि जब तक जांच निष्पक्ष तरीके से चल रही है, तब तक उसमें हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं बनता। इसलिए याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती।
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Varanasi Madarsa ATS Investigation: मदरसों को दिया यह अधिकार
जिन संस्थानों की ATS जांच की जा रही है, उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार दिया है। अदालत ने कहा कि संबंधित संस्थान जांच समिति के सामने सभी जरूरी दस्तावेज और अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत कर सकते हैं। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी को कानून के दायरे में रहकर निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई करनी होगी। जांच पूरी होने से पहले किसी संस्था को दोषी नहीं माना जा सकता और सभी पक्षों को उचित अवसर दिया जाना चाहिए।
Varanasi Madarsa ATS Investigation: अब आगे की प्रक्रिया क्या होगी?
हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद ATS की जांच जारी रहेगी। संबंधित मदरसों को जांच में सहयोग करना होगा और मांगे जाने पर जरूरी रिकॉर्ड उपलब्ध कराने होंगे। यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, यदि याचिकाकर्ता इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं तो वे उच्च अदालत में अपील करने का विकल्प भी अपना सकते हैं।
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