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Lokhitkranti > उत्तर प्रदेश > Ram Mandir CEO Appointment: राम मंदिर में CEO नियुक्ति पर संतों का विरोध, बोले- मंदिर नहीं चलाएगी नौकरशाही
उत्तर प्रदेश

Ram Mandir CEO Appointment: राम मंदिर में CEO नियुक्ति पर संतों का विरोध, बोले- मंदिर नहीं चलाएगी नौकरशाही

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-06-29 10:15 अपराह्न
By Lokhit Kranti 2 महीना ago
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Ram Mandir CEO Appointment Row
Ram Mandir CEO Appointment: राम मंदिर में CEO नियुक्ति पर संतों का विरोध, बोले- मंदिर नहीं चलाएगी नौकरशाही
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Ram Mandir CEO Appointment Row: अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े चढ़ावा अनियमितता मामले की जांच के बीच अब मंदिर प्रशासन में प्रस्तावित मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। अखिल भारतीय संत समिति और देशभर के कई संतों ने मंदिर प्रबंधन में नौकरशाही की भूमिका बढ़ाने का विरोध करते हुए इसे धार्मिक संस्थाओं की स्वायत्तता से जुड़ा मुद्दा बताया है।

Contents
CEO मॉडल पर संतों ने जताई आपत्ति‘मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च स्वतंत्र तो मंदिर क्यों नहीं?’अनियमितताओं पर कार्रवाई हो, लेकिन मंदिरों पर नियंत्रण नहींमहंत नृत्यगोपाल दास के जन्मोत्सव में उठा मुद्दाPM मोदी और CM योगी से की गई अपील11 जुलाई की बैठक पर टिकी निगाहें

संत समाज का कहना है कि देश में मस्जिदों का संचालन वक्फ बोर्ड, गुरुद्वारों का प्रबंधन शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और चर्चों का संचालन चर्च परिषदों द्वारा किया जाता है। ऐसे में केवल हिंदू मंदिरों के संचालन में सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही है? इस मुद्दे ने राम मंदिर प्रशासन और धार्मिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर नई बहस छेड़ दी है। (Ram Mandir CEO Appointment Row)

CEO मॉडल पर संतों ने जताई आपत्ति

राम मंदिर में प्रशासनिक पारदर्शिता और व्यवस्था को मजबूत करने के लिए CEO नियुक्त किए जाने की चर्चाओं के बीच संत समाज ने खुलकर विरोध दर्ज कराया है। अखिल भारतीय संत समिति का मानना है कि किसी भी प्रशासनिक सुधार के नाम पर मंदिरों की धार्मिक स्वतंत्रता और परंपरागत व्यवस्था को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए। संतों का कहना है कि मंदिर केवल एक प्रशासनिक संस्था (Ram Mandir CEO Appointment Row) नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, जिसका संचालन धार्मिक परंपराओं और ट्रस्ट व्यवस्था के अनुसार होना चाहिए।

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‘मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च स्वतंत्र तो मंदिर क्यों नहीं?’

अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय सचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश में अलग-अलग धर्मों की संस्थाओं के संचालन के लिए अलग व्यवस्थाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा, ‘मस्जिद वक्फ बोर्ड चलाता है, गुरुद्वारे एसजीपीसी चलाती है और चर्चों का संचालन चर्च काउंसिल करती है. फिर केवल हिंदू मंदिरों को ही सरकार क्यों चलाना चाहती है?’संत समिति ने यह भी मांग उठाई कि देशभर के लाखों हिंदू मंदिरों पर कथित सरकारी नियंत्रण समाप्त किया जाए और उनका संचालन (Ram Mandir CEO Appointment Row)धार्मिक परंपराओं के अनुरूप ही किया जाए।

अनियमितताओं पर कार्रवाई हो, लेकिन मंदिरों पर नियंत्रण नहीं

संत समाज ने स्पष्ट किया कि यदि किसी मंदिर में आर्थिक या प्रशासनिक अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, इसके आधार पर पूरे मंदिर प्रशासन को सरकारी नियंत्रण में देना उचित नहीं माना जा सकता।

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि देश के कई बड़े मंदिरों में समय-समय पर विवाद सामने आए हैं। उन्होंने पद्मनाभस्वामी मंदिर, तिरुपति बालाजी मंदिर और शनि शिंगणापुर मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि विवादों का समाधान जवाबदेही तय करके होना चाहिए, न कि धार्मिक संस्थाओं की स्वायत्तता (Ram Mandir CEO Appointment Row) खत्म करके।

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महंत नृत्यगोपाल दास के जन्मोत्सव में उठा मुद्दा

राम मंदिर प्रशासन में नौकरशाही की भूमिका का विरोध उस समय और तेज हो गया जब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के 88वें जन्मोत्सव समारोह में देशभर से आए संतों ने इस विषय पर प्रस्ताव पारित किया। कार्यक्रम में उपस्थित संतों ने ध्वनिमत से कहा कि राम मंदिर का संचालन संत परंपरा, श्रद्धालुओं और धार्मिक मूल्यों के अनुसार होना चाहिए। उनका मानना है कि नौकरशाही (Ram Mandir CEO Appointment Row) आधारित व्यवस्था मंदिर की मूल भावना को प्रभावित कर सकती है।

PM मोदी और CM योगी से की गई अपील

रामकथा व्यासपीठ से आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए सवाल किया कि क्या अयोध्या जैसे पवित्र धार्मिक केंद्र में स्थित राम मंदिर का संचालन प्रशासनिक अधिकारियों के हाथों में दिया जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आग्रह किया कि यदि ट्रस्ट के ढांचे में बदलाव किया जाए तो उसमें विभिन्न परंपराओं के संतों, विद्वानों और विश्वसनीय व्यक्तियों को शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि मंदिर को किसी भी रूप में “सत्ता का उपनिवेश” नहीं बनाया (Ram Mandir CEO Appointment Row)जाना चाहिए।

11 जुलाई की बैठक पर टिकी निगाहें

सूत्रों के अनुसार, 11 जुलाई को होने वाली श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस बैठक में ट्रस्ट के पुनर्गठन, प्रशासनिक ढांचे में बदलाव, संभावित CEO नियुक्ति और अन्य संगठनात्मक फैसलों पर चर्चा हो सकती है। यही कारण है कि बैठक से पहले ही संत समाज ने अपनी चिंताओं को सार्वजनिक करते हुए स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि यदि मंदिर प्रशासन में सरकारी हस्तक्षेप (Ram Mandir CEO Appointment Row) बढ़ाने की कोशिश हुई तो इसका व्यापक विरोध किया जाएगा।

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