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Lokhitkranti > उत्तराखंड > Monsoon in Uttarakhand के बीच आपदा से निपटने की तैयारियां तेज, 2 जुलाई को होगा बड़ा अभ्यास
उत्तराखंड

Monsoon in Uttarakhand के बीच आपदा से निपटने की तैयारियां तेज, 2 जुलाई को होगा बड़ा अभ्यास

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-07-01 2:31 अपराह्न
By Lokhit Kranti 2 महीना ago
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Monsoon in Uttarakhand disaster mock drill conducted across 66 locations in 13 districts for emergency preparedness
Monsoon in Uttarakhand disaster mock drill conducted across 66 locations in 13 districts for emergency preparedness
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Monsoon in Uttarakhand की आधिकारिक दस्तक के साथ ही राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गए हैं। पहाड़ी राज्य होने के कारण उत्तराखंड में हर वर्ष मॉनसून अपने साथ भारी बारिश, भूस्खलन, बादल फटने, नदी-नालों के उफान और सड़क बाधित होने जैसी कई प्राकृतिक चुनौतियां लेकर आता है। इन्हीं संभावित आपदाओं से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।

Contents
आपदा से पहले तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा प्रशासनटेबल टॉप एक्सरसाइज में परखी गई विभागों की कार्ययोजना13 जिलों के 66 स्थानों पर होगा राहत एवं बचाव का अभ्यासआधुनिक उपकरणों और संसाधनों की होगी जांचआपदा प्रबंधन विभाग ने बताया अभ्यास का उद्देश्यबेहतर समन्वय बनेगा सबसे बड़ी ताकतसंवेदनशील क्षेत्रों पर प्रशासन की विशेष नजर

इसी क्रम में 2 जुलाई को पूरे प्रदेश के सभी 13 जिलों में 66 चिन्हित स्थानों पर राज्य स्तरीय Monsoon in Uttarakhand मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। इस अभ्यास का उद्देश्य वास्तविक आपदा की स्थिति में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और राहत एवं बचाव कार्यों की क्षमता का परीक्षण करना है।

आपदा से पहले तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा प्रशासन

मॉनसून सीजन शुरू होने से पहले उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA), जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, विद्युत विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां लगातार तैयारियों की समीक्षा कर रही हैं।

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राज्य सरकार का मानना है कि किसी भी प्राकृतिक आपदा में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका समय पर प्रतिक्रिया और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल की होती है। यही वजह है कि इस बार Monsoon in Uttarakhand को देखते हुए तैयारियों को और अधिक मजबूत बनाया गया है।

टेबल टॉप एक्सरसाइज में परखी गई विभागों की कार्ययोजना

राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल से पहले 30 जून को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) देहरादून में टेबल टॉप एक्सरसाइज आयोजित की गई। इस दौरान संभावित आपदा परिदृश्यों को सामने रखकर संबंधित विभागों की कार्ययोजना, संसाधनों की उपलब्धता और आपसी समन्वय की समीक्षा की गई।

अधिकारियों ने बाढ़, क्लाउडबर्स्ट, अतिवृष्टि, भूस्खलन, जलभराव, नदी-नालों के उफान और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। इस अभ्यास का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि वास्तविक संकट की स्थिति में किसी भी स्तर पर समन्वय की कमी न रहे।

13 जिलों के 66 स्थानों पर होगा राहत एवं बचाव का अभ्यास

2 जुलाई को होने वाली राज्यव्यापी मॉक ड्रिल में प्रदेश के सभी 13 जिलों के 66 संवेदनशील स्थानों को शामिल किया गया है। इस दौरान विभिन्न विभाग वास्तविक आपदा जैसी परिस्थितियों का अभ्यास करेंगे।

रेस्क्यू टीमों द्वारा घायलों को सुरक्षित निकालने, राहत शिविर स्थापित करने, मेडिकल सहायता उपलब्ध कराने, सड़क मार्ग बहाल करने, बिजली एवं संचार सेवाओं को सामान्य बनाने तथा प्रभावित लोगों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाने जैसी गतिविधियों का भी प्रदर्शन किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं इस राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल का निरीक्षण करेंगे और विभिन्न जिलों में तैयारियों की समीक्षा करेंगे।

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आधुनिक उपकरणों और संसाधनों की होगी जांच

मॉक ड्रिल के दौरान केवल मानव संसाधनों की नहीं बल्कि आधुनिक उपकरणों की कार्यक्षमता का भी परीक्षण किया जाएगा। इसमें जेसीबी मशीनें, बोट, राफ्ट, जल पुलिस, गोताखोर दल, संचार प्रणाली, राहत सामग्री, मेडिकल टीम और आपातकालीन परिवहन व्यवस्था को सक्रिय रूप से शामिल किया जाएगा।

इसके अलावा राहत शिविरों में भोजन, पेयजल, चिकित्सा सुविधा, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा तथा आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता का भी मूल्यांकन किया जाएगा ताकि वास्तविक आपदा के समय किसी प्रकार की परेशानी न हो।

आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया अभ्यास का उद्देश्य

आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य केवल औपचारिक अभ्यास करना नहीं है, बल्कि सभी विभागों की वास्तविक तैयारी का आकलन करना है।

विभाग का मानना है कि यदि संभावित कमियों की पहचान पहले ही कर ली जाए और समय रहते उनका समाधान कर लिया जाए, तो प्राकृतिक आपदा के दौरान जन-धन के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसी सोच के साथ पूरे राज्य में Monsoon in Uttarakhand को ध्यान में रखते हुए व्यापक स्तर पर यह अभ्यास कराया जा रहा है।

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बेहतर समन्वय बनेगा सबसे बड़ी ताकत

आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर सभी रेखीय विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करने के लिए यह विशेष अभ्यास आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आपदा प्रबंधन एक बहु-विभागीय जिम्मेदारी है, जिसमें प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, ऊर्जा विभाग, सिंचाई विभाग, स्थानीय निकाय और स्वयंसेवी संस्थाओं की समान भागीदारी आवश्यक होती है।

उन्होंने कहा कि प्रभावी आपदा प्रबंधन की सबसे मजबूत नींव पूर्व तैयारी होती है। यदि सभी एजेंसियां समय रहते अपनी व्यवस्थाओं का परीक्षण कर लें तो किसी भी आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्य अधिक प्रभावी तरीके से संचालित किए जा सकते हैं।

संवेदनशील क्षेत्रों पर प्रशासन की विशेष नजर

उत्तराखंड के कई पर्वतीय जिले हर वर्ष भारी बारिश के दौरान भूस्खलन, सड़क अवरोध, नदी कटाव और बादल फटने जैसी घटनाओं से प्रभावित होते हैं। चारधाम यात्रा मार्ग, सीमांत क्षेत्र और पर्वतीय गांव विशेष रूप से संवेदनशील माने जाते हैं।

इसी कारण इस वर्ष Monsoon in Uttarakhand के दौरान जिला प्रशासन को पहले से ही अलर्ट रहने, संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

राज्य सरकार का मानना है कि समय पर चेतावनी, बेहतर समन्वय और आधुनिक संसाधनों के प्रभावी उपयोग से मॉनसून के दौरान होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यही उद्देश्य राज्यव्यापी मॉक ड्रिल के माध्यम से हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

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