Parimal Nathwani झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। गुरुवार को घोषित परिणामों में झारखंड की दो राज्यसभा सीटों में से एक पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) समर्थित उम्मीदवार की जीत हुई, जबकि दूसरी सीट पर एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में नाथवानी को 28 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को 20 वोट प्राप्त हुए।
राज्यसभा चुनाव के इस परिणाम ने झारखंड की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। Parimal Nathwani की जीत के बाद कांग्रेस ने क्रॉस-वोटिंग के आरोप लगाए हैं और दावा किया है कि इंडिया गठबंधन के कुछ सहयोगी दलों के विधायकों ने पार्टी उम्मीदवार का समर्थन नहीं किया।
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चौथी बार राज्यसभा पहुंचेंगे परिमल नाथवानी
इस जीत के साथ Parimal Nathwani चौथी बार राज्यसभा सदस्य बनेंगे। उन्होंने चुनाव परिणाम आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें राज्यसभा सदस्य के रूप में चौथे कार्यकाल में सेवा करने का अवसर मिलने पर गर्व है। उन्होंने इसे अपने लिए भावुक क्षण बताते हुए कहा कि झारखंड से उनकी संसदीय यात्रा 2008 में शुरू हुई थी और एक बार फिर उसी धरती से संसद पहुंचना उनके लिए सम्मान की बात है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा नेतृत्व का भी धन्यवाद किया।
क्रॉस-वोटिंग को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद
Parimal Nathwani की जीत के बाद कांग्रेस ने चुनाव परिणाम पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के सभी 16 वोट सुरक्षित थे और झारखंड मुक्ति मोर्चा के चार वोट भी मिले थे। इसके बावजूद पार्टी उम्मीदवार को केवल 20 वोट मिले।
कांग्रेस का दावा है कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के कुछ विधायकों ने पार्टी उम्मीदवार का समर्थन नहीं किया। हालांकि इन आरोपों को संबंधित दलों के नेताओं ने खारिज कर दिया है। पूर्व विधायक विनोद सिंह ने कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक कमजोरियों को छिपाने का प्रयास कर रही है और लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं।
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कॉर्पोरेट जगत से संसद तक का सफर
Parimal Nathwani भारतीय कॉर्पोरेट और राजनीतिक जगत का जाना-पहचाना नाम हैं। वर्तमान में वे रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड में कॉर्पोरेट अफेयर्स के निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। इसके अलावा वे गुजरात फुटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष और नाथद्वारा मंदिर बोर्ड से भी जुड़े रहे हैं।
उनका शुरुआती जीवन व्यवसाय से जुड़ा रहा। उन्होंने मुंबई में छोटे स्तर पर व्यापार शुरू किया और बाद में गुजरात के वडोदरा में पीसीओ नेटवर्क का संचालन किया। कारोबारी जीवन में उन्हें आर्थिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन 1997 में धीरूभाई अंबानी से मुलाकात उनके करियर का बड़ा मोड़ साबित हुई।
रिलायंस समूह में बढ़ी भूमिका
Parimal Nathwani ने रिलायंस समूह के कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में भूमिका निभाई। जामनगर रिफाइनरी परियोजना से जुड़े भूमि अधिग्रहण कार्यों में उनकी भागीदारी को अहम माना जाता है। बाद के वर्षों में उन्होंने कॉर्पोरेट मामलों और संस्थागत समन्वय के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई।
रिलायंस समूह के विस्तार और विभिन्न रणनीतिक परियोजनाओं में सक्रिय भूमिका के कारण उनका प्रभाव लगातार बढ़ता गया। उद्योग जगत में उनकी पहचान एक अनुभवी कॉर्पोरेट प्रबंधक और रणनीतिकार के रूप में रही है।
राज्यसभा में तीन कार्यकाल का अनुभव
Parimal Nathwani पहली बार वर्ष 2008 में झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा पहुंचे थे। इसके बाद 2014 में उन्हें फिर से झारखंड से राज्यसभा सदस्य बनने का अवसर मिला। तीसरे कार्यकाल में वे आंध्र प्रदेश से वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के समर्थन से राज्यसभा पहुंचे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों में विभिन्न दलों का समर्थन हासिल करने की उनकी क्षमता उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती है। संसद में अपने पिछले कार्यकालों के दौरान वे कई महत्वपूर्ण संसदीय समितियों के सदस्य भी रहे हैं।
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झारखंड की राजनीति पर क्या असर?
Parimal Nathwani की जीत को केवल एक चुनावी सफलता के रूप में नहीं देखा जा रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह परिणाम झारखंड में विपक्षी एकजुटता और इंडिया गठबंधन की आंतरिक स्थिति पर नए सवाल खड़े कर सकता है।
हालांकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दोनों नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्यों को बधाई दी है और कहा है कि वे झारखंड की आवाज को संसद के उच्च सदन तक पहुंचाएंगे। वहीं भाजपा और एनडीए नेताओं ने नाथवानी की जीत को झारखंड के विकास के लिए सकारात्मक बताया है।
चुनाव परिणाम के बाद Parimal Nathwani ने कहा कि वे झारखंड के लोगों की आकांक्षाओं और राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों को पूरी प्रतिबद्धता के साथ संसद में उठाने का प्रयास करेंगे। आने वाले समय में उनकी जीत का राजनीतिक प्रभाव कितना व्यापक होगा, इस पर सभी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों की नजर बनी रहेगी।
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