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Lokhitkranti > राष्ट्रीय > Delimitation Bill: महिला आरक्षण और परिसीमन बिल फिर लाएगी मोदी सरकार? जानिए पूरा गणित
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Delimitation Bill: महिला आरक्षण और परिसीमन बिल फिर लाएगी मोदी सरकार? जानिए पूरा गणित

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-06-23 9:06 अपराह्न
By Lokhit Kranti 2 महीना ago
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Delimitation Bill
Delimitation Bill: महिला आरक्षण और परिसीमन बिल फिर लाएगी मोदी सरकार? जानिए पूरा गणित
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Womens Reservation Bill: केंद्र की मोदी सरकार एक बार फिर महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक विधेयक को संसद में लाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, सरकार इस बार संशोधित प्रारूप में बिल पेश करने पर विचार कर रही है, जिसमें महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत और अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 20 प्रतिशत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने जैसे प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं। यह कदम भारतीय राजनीति और चुनावी व्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

Contents
क्या है महिला आरक्षण और परिसीमन बिल?पहले क्यों अटक गया था विधेयक?संशोधित बिल में क्या हो सकते हैं बदलाव?बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?क्या विपक्ष का समर्थन मिल सकता है?आगामी मॉनसून सत्र पर टिकी निगाहें

हालांकि, इस बिल के सामने सबसे बड़ी चुनौती संसद में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाने की है। इससे पहले अप्रैल 2026 में लोकसभा में पेश किए गए परिसीमन विधेयक को पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाया था, जिसके चलते वह पारित नहीं हो सका। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार (Womens Reservation Bill)  इस बार राजनीतिक सहमति का गणित कैसे साधेगी।

क्या है महिला आरक्षण और परिसीमन बिल?

महिला आरक्षण बिल का उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की कुल सीटों में से 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। वहीं, परिसीमन का अर्थ लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण करना है। जनसंख्या और भौगोलिक बदलावों को ध्यान में रखते हुए समय-समय (Womens Reservation Bill) पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं बदली जाती हैं, ताकि प्रतिनिधित्व अधिक संतुलित और न्यायसंगत हो सके।

पहले क्यों अटक गया था विधेयक?

अप्रैल 2026 में लोकसभा में परिसीमन विधेयक पर मतदान कराया गया था। उस दौरान विधेयक के पक्ष में 298 सांसदों ने मतदान किया, जबकि 230 सांसद इसके विरोध में रहे। चूंकि यह एक संवैधानिक संशोधन विधेयक था, इसलिए इसे पारित कराने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता थी। लोकसभा की कुल (Womens Reservation Bill)  प्रभावी संख्या के हिसाब से लगभग 352 मतों की जरूरत थी, जो सरकार जुटाने में सफल नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप यह विधेयक पारित नहीं हो पाया।

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संशोधित बिल में क्या हो सकते हैं बदलाव?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार नए बिल में कुछ महत्वपूर्ण संशोधन कर सकती है। बताया जा रहा है कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के साथ-साथ सामाजिक प्रतिनिधित्व को और मजबूत बनाने पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति के लिए वर्तमान आरक्षण व्यवस्था में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं बताई जा रही है। इसके अलावा (Womens Reservation Bill) लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने को लेकर भी अभी अंतिम फैसला सार्वजनिक नहीं किया गया है।

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बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

वर्तमान राजनीतिक स्थिति में बीजेपी और उसके सहयोगियों के पास संवैधानिक संशोधन पारित कराने के लिए आवश्यक संख्या नहीं है। ऐसे में सरकार को विपक्षी दलों के एक हिस्से का समर्थन हासिल करना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण जैसे मुद्दे पर कई क्षेत्रीय दल खुलकर विरोध करने से बच सकते हैं। यदि सरकार व्यापक राजनीतिक सहमति बनाने में सफल रहती है, तो दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा हासिल करना संभव हो सकता है। (Womens Reservation Bill)

क्या विपक्ष का समर्थन मिल सकता है?

महिला आरक्षण को लेकर अधिकांश राजनीतिक दल सार्वजनिक रूप से समर्थन का रुख अपनाते रहे हैं। ऐसे में सरकार इस मुद्दे को महिला सशक्तिकरण और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व से जोड़कर व्यापक समर्थन जुटाने की कोशिश कर सकती है। हालांकि परिसीमन का मुद्दा कई राज्यों के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जाता है। दक्षिण भारत के कुछ राज्यों ने पहले भी परिसीमन (Womens Reservation Bill)  को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। इसलिए सरकार को केवल संख्या ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन का भी ध्यान रखना होगा।

आगामी मॉनसून सत्र पर टिकी निगाहें

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार आगामी मॉनसून सत्र में ही संशोधित बिल पेश करेगी या बाद में। लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस विषय पर चर्चा तेज हो चुकी है। यदि यह विधेयक संसद में दोबारा आता है और पारित हो जाता है, तो भारतीय लोकतंत्र की संरचना में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने के साथ-साथ परिसीमन की नई व्यवस्था देश की चुनावी राजनीति (Womens Reservation Bill) को भी नई दिशा दे सकती है।

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