Bhojpur Encounter Case: बिहार के भोजपुर जिले में चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस मामले में अब पुलिस विभाग के कई अधिकारियों और जवानों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। भरत तिवारी की मां आशा देवी की शिकायत के आधार पर शाहपुर थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद पूरे राज्य में इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
एनकाउंटर के बाद लगातार उठ रहे सवालों के बीच यह कार्रवाई बेहद अहम मानी जा रही है। पहले जहां मामले में पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया था, वहीं अब एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। इस घटनाक्रम ने बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली और एनकाउंटर की परिस्थितियों को लेकर नई बहस (Bhojpur Encounter Case) छेड़ दी है।
सातवें दिन दर्ज हुई एफआईआर
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में घटना के सात दिन बाद प्राथमिकी दर्ज की गई है। भोजपुर पुलिस अधीक्षक ने इसकी पुष्टि की है। एफआईआर में आरा शाहपुर के तत्कालीन एसडीपीओ, शाहपुर थाना के तत्कालीन एसएचओ और अन्य पुलिसकर्मियों के नाम शामिल (Bhojpur Encounter Case) किए गए हैं। यह मामला अब केवल विभागीय कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आपराधिक जांच के दायरे में भी आ गया है।
मां आशा देवी ने लगाए गंभीर आरोप
भरत तिवारी की मां आशा देवी ने पुलिस अधीक्षक को दिए गए आवेदन में कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनका बेटा बाढ़ विस्थापितों और स्थानीय लोगों की समस्याओं को लेकर प्रशासन के खिलाफ लगातार आवाज उठाता था। इसी वजह से वह प्रशासन (Bhojpur Encounter Case) के निशाने पर था। आवेदन में दावा किया गया है कि घटना वाले दिन कई पुलिस अधिकारी और जवान उनके घर पहुंचे और भरत तिवारी को अपने साथ चलने के लिए कहा।
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फेसबुक लाइव और सरेंडर का दावा
आशा देवी के आवेदन में कहा गया है कि पुलिस के सामने आने के बाद भरत तिवारी ने फेसबुक लाइव किया था। आवेदन के अनुसार, लाइव वीडियो के दौरान उन्होंने अपने हाथ में मौजूद हथियार फेंक दिया था और स्वयं को पुलिस के हवाले कर दिया था। इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें पकड़कर जमीन पर गिराया और बाद में उन पर गोलियां चलाईं। परिजनों का आरोप है कि भरत तिवारी को कुल पांच गोलियां मारी गईं।
SDPO के आदेश पर गोली चलाने का आरोप
शिकायत में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि गोलीबारी जगदीशपुर पुलिस उपाधीक्षक (SDPO) के निर्देश पर की गई। आशा देवी ने अपने आवेदन में कहा है कि उनके बेटे को हिरासत में लेने के बाद भी जानबूझकर गोली मारी गई। इसी आधार पर संबंधित अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ (Bhojpur Encounter Case) हत्या का मामला दर्ज कराया गया है। हालांकि इन आरोपों की सत्यता की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
पहले ही निलंबित हो चुके हैं पांच पुलिसकर्मी
इस मामले में प्रशासन पहले ही पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है। निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश कुमार मालाकार, पुलिस अवर निरीक्षक अंकित आर्यन, पुलिस अवर निरीक्षक हरश्चंद्र कुमार, सहायक अवर निरीक्षक रामाशंकर यादव और महिला सिपाही (Bhojpur Encounter Case) मीरा कुमारी शामिल हैं। विभागीय जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर यह कार्रवाई की गई थी।
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परिजनों ने पुलिस पर जानकारी छिपाने का भी लगाया आरोप
आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि घटना के बाद पुलिस भरत तिवारी को अपने साथ ले गई थी और कई घंटों तक परिवार को सही जानकारी नहीं दी गई। परिजनों का कहना है कि उन्हें लंबे समय तक यह नहीं बताया गया कि भरत तिवारी की स्थिति क्या है। बाद में शाम के समय उन्हें उनकी मौत (Bhojpur Encounter Case) की सूचना दी गई। यही कारण है कि परिवार लगातार निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बढ़ी चर्चा
भरत तिवारी एनकाउंटर मामला अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। विभिन्न संगठनों और स्थानीय लोगों द्वारा घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच एजेंसियों को सभी तथ्यों, वीडियो फुटेज, पुलिस रिकॉर्ड और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों का बारीकी से (Bhojpur Encounter Case) परीक्षण करना होगा।
आगे क्या होगा?
अब प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जांच की प्रक्रिया तेज होगी। पुलिस अधिकारियों के बयान, तकनीकी साक्ष्य और अन्य दस्तावेजों की जांच की जाएगी। इस मामले का अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल पूरे बिहार की नजर इस हाई-प्रोफाइल एनकाउंटर केस (Bhojpur Encounter Case) की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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