भारत में Gold Producing States in India को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में आंध्र प्रदेश के चित्तूर और कुरनूल क्षेत्र में नए स्वर्ण भंडार मिलने की जानकारी सामने आई है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) और राज्य सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार इन क्षेत्रों में सोने की संभावनाओं की पुष्टि होने के बाद आगे की खनन प्रक्रिया पर काम शुरू किया जा रहा है। इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि भारत अपनी कुल जरूरत का अधिकांश सोना आयात करता है और घरेलू उत्पादन अभी काफी सीमित है।
देश में सोना केवल आभूषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निवेश, विदेशी मुद्रा भंडार और आर्थिक स्थिरता से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में नए स्वर्ण भंडार मिलने की खबर खनन क्षेत्र और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कर्नाटक बना हुआ है देश का सबसे बड़ा स्वर्ण उत्पादक
भारत में यदि किसी राज्य को सोने का सबसे बड़ा केंद्र कहा जाए तो वह कर्नाटक है। राज्य की हट्टी गोल्ड माइंस देश की एकमात्र सक्रिय बड़ी स्वर्ण खदान मानी जाती है, जहां आज भी व्यावसायिक स्तर पर खनन जारी है।
रायचूर जिले स्थित हट्टी खदान में वर्ष 1902 से सोने का उत्पादन हो रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यहां से हर वर्ष लगभग 1.5 से 2 टन तक सोना निकाला जाता है। यही वजह है कि कर्नाटक वर्तमान में देश का सबसे बड़ा स्वर्ण उत्पादक राज्य माना जाता है।
कोलार गोल्ड फील्ड्स की ऐतिहासिक विरासत
इसी क्रम में कर्नाटक की कोलार गोल्ड फील्ड्स का भी उल्लेख जरूरी है। यह दुनिया की सबसे गहरी स्वर्ण खदानों में शामिल रही है। हालांकि वर्ष 2001 में उत्पादन लागत बढ़ने और भंडार कम होने के कारण इसे बंद कर दिया गया था। इसके बावजूद अपने संचालन काल में यहां से लगभग 800 टन सोना निकाला गया था।
आंध्र प्रदेश में बढ़ी नई उम्मीदें
वहीं दूसरी ओर आंध्र प्रदेश अब देश के स्वर्ण मानचित्र पर तेजी से उभरता हुआ राज्य माना जा रहा है। Gold Producing States in India की सूची में यह राज्य आने वाले वर्षों में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
जोन्नागिरी खदान पर सबकी नजर
कुरनूल जिले के जोन्नागिरी क्षेत्र में करीब 50 टन सोना होने का अनुमान व्यक्त किया गया है। यह स्वतंत्र भारत की पहली निजी स्वर्ण खदान मानी जाती है। यहां सालाना लगभग एक टन सोना निकालने का लक्ष्य रखा गया है।
चित्तूर में नए ब्लॉक मिले
खास बात यह है कि हाल ही में चित्तूर जिले के कुप्पम क्षेत्र में भी नए स्वर्ण ब्लॉक मिलने की जानकारी सामने आई है। भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार इन क्षेत्रों में आगे और खोज की संभावनाएं मौजूद हैं।
इसके अलावा रामगिरि, जाव्वाकुला और चिगुरूकुंटा क्षेत्रों में भी सोने की मौजूदगी को लेकर अध्ययन जारी है।
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झारखंड में स्वर्णरेखा का महत्व (Gold Producing States in India)
झारखंड लंबे समय से खनिज संपदा के लिए जाना जाता है। यहां सोने का उत्पादन सीमित मात्रा में होता है, लेकिन संभावनाएं लगातार बनी हुई हैं।
पलासन और सरायकेला क्षेत्र
झारखंड के पलासन और सरायकेला क्षेत्रों में स्वर्ण भंडार पाए गए हैं। साथ ही स्वर्णरेखा नदी की रेत से स्थानीय लोग वर्षों से पारंपरिक तरीके से सोना निकालते रहे हैं।
हालांकि वर्तमान में यहां व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन अपेक्षाकृत कम है और सालाना कुछ किलोग्राम से लेकर दर्जनों किलोग्राम तक सोना प्राप्त होता है।
राजस्थान में बढ़ रही संभावनाएं
राजस्थान को आमतौर पर तांबा, जस्ता और अन्य खनिजों के लिए जाना जाता है, लेकिन अब यह राज्य स्वर्ण भंडार के कारण भी चर्चा में है।
Gold Producing States in India: बांसवाड़ा और उदयपुर क्षेत्र
बांसवाड़ा के भोकिया-जगपुरा और उदयपुर के आसपास स्वर्ण अयस्क की महत्वपूर्ण मात्रा दर्ज की गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यहां लगभग 113 मिलियन टन स्वर्ण अयस्क होने का अनुमान लगाया गया है।
साथ ही राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियां इन क्षेत्रों में वाणिज्यिक खनन की संभावनाओं पर काम कर रही हैं।
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भारत में कितना होता है सोने का उत्पादन?
भारत में वर्तमान समय में सालाना लगभग 1.6 से 2.2 टन सोने का उत्पादन होता है। इसके मुकाबले देश की मांग कहीं अधिक है। यही कारण है कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 98 प्रतिशत सोना आयात करता है।
हर वर्ष भारत में लगभग 800 से 900 टन सोना विदेशों से मंगाया जाता है। प्रमुख आयात स्रोतों में स्विट्जरलैंड, यूएई और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं।
Gold Producing States in India: भविष्य में क्या बदल सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि आंध्र प्रदेश और राजस्थान में नए स्वर्ण भंडारों की खोज घरेलू उत्पादन बढ़ाने में मदद कर सकती है। हालांकि किसी भी खदान से बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू होने में कई वर्षों का समय लगता है क्योंकि इसके लिए पर्यावरणीय मंजूरी, तकनीकी सर्वे और निवेश की आवश्यकता होती है।
साथ ही केंद्र सरकार राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (NMET) के माध्यम से देशभर में नए खनिज भंडारों की खोज को बढ़ावा दे रही है। आधुनिक डीप माइनिंग तकनीक के उपयोग से भविष्य में अधिक गहराई में मौजूद स्वर्ण भंडारों तक पहुंचना संभव हो सकता है।
फिलहाल कर्नाटक भारत का सबसे बड़ा स्वर्ण उत्पादक राज्य बना हुआ है, जबकि आंध्र प्रदेश नए भंडारों की खोज के कारण तेजी से चर्चा में है। राजस्थान और झारखंड भी संभावनाओं वाले राज्यों में शामिल हैं। आने वाले वर्षों में यदि नई परियोजनाएं सफल रहती हैं तो भारत का घरेलू स्वर्ण उत्पादन बढ़ सकता है, जिससे आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।




