Uttarakhand Mining Revenue Record: उत्तराखंड में खनन से मिलने वाले राजस्व ने इस बार नया रिकॉर्ड कायम किया है। रामनगर क्षेत्र में कोसी और दाबका नदी से हुए उपखनिज निकासी कार्य ने सरकार की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान सरकार को 9 करोड़ 79 लाख 19 हजार 791 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 46 प्रतिशत अधिक है। यह उपलब्धि न केवल खनन प्रबंधन की बेहतर व्यवस्था को दर्शाती है, बल्कि अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण और नियमित निगरानी का भी परिणाम मानी जा रही है।
Uttarakhand Mining Revenue Record के तहत इस बार राजस्व में हुई बढ़ोतरी ने वन विभाग और वन विकास निगम की कार्यप्रणाली को भी चर्चा में ला दिया है।
मानसून के साथ सात माह बाद बंद हुआ खनन कार्य
रामनगर क्षेत्र में मानसून की दस्तक के साथ ही कोसी और दाबका नदी में चल रहा खनन कार्य बंद कर दिया गया है। लगभग सात महीने तक चले इस अभियान के दौरान उपखनिज निकासी का काम लगातार जारी रहा। हर वर्ष की तरह इस बार भी मानसून को देखते हुए खनन गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है, ताकि नदी तंत्र और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।
इस वर्ष खनन कार्य सामान्य अवधि से अधिक समय तक चला। जहां पहले यह कार्य 31 मई तक बंद हो जाता था, वहीं इस बार 19 जून तक उपखनिज निकासी जारी रही। इसी अतिरिक्त अवधि का असर राजस्व में भी दिखाई दिया और Uttarakhand Mining Revenue Record ने नया मुकाम हासिल कर लिया।
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कोसी और दाबका नदी से हुई रिकॉर्ड उपखनिज निकासी
तराई पश्चिमी वन प्रभाग के अधीन आने वाली कोसी और दाबका नदी से उपखनिज निकालने का कार्य वन विकास निगम द्वारा किया जाता है। रामनगर में कोसी नदी के कालूसिद्ध, बंजारी प्रथम, बंजारी द्वितीय, खड़ंजा और कठियापुल गेट के अलावा दाबका नदी के छोई गेट से खनन गतिविधियां संचालित होती हैं।
इस वर्ष कुल 10 लाख 87 हजार 997 घनमीटर उपखनिज निकाला गया। इसमें कोसी नदी से 9 लाख 59 हजार 626 घनमीटर और दाबका नदी से 1 लाख 28 हजार 371 घनमीटर उपखनिज की निकासी की गई। पिछले वर्ष की तुलना में उपखनिज की मात्रा में वृद्धि होने से राजस्व में भी बड़ा उछाल देखने को मिला।
Uttarakhand Mining Revenue Record के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2024-25 में जहां कुल आय 4 करोड़ 54 लाख 54 हजार 858 रुपये थी, वहीं इस बार यह आंकड़ा लगभग दोगुना होकर 9.79 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
46 प्रतिशत बढ़ी आय, सरकार को मिला अतिरिक्त लाभ
खनन से इस बार सरकार को पांच करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई है। अधिकारियों का मानना है कि यह वृद्धि केवल खनन क्षेत्र के विस्तार की वजह से नहीं हुई, बल्कि निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई का भी इसमें बड़ा योगदान रहा है।
Uttarakhand Mining Revenue Record में हुई इस वृद्धि ने यह साबित किया है कि यदि संसाधनों का सही प्रबंधन किया जाए तो राजस्व में उल्लेखनीय सुधार संभव है। इससे राज्य सरकार की आय में भी मजबूती आई है और विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हुए हैं।
अवैध खनन पर सख्ती बनी सफलता की बड़ी वजह
तराई पश्चिमी वन प्रभाग के अधिकारियों के अनुसार इस बार अवैध खनन और अवैध परिवहन के खिलाफ विशेष अभियान चलाया गया। नियमित गश्त, आकस्मिक निरीक्षण और रात के समय औचक चेकिंग के जरिए खनन गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी गई।
निकासी गेटों पर अभिलेखों का सत्यापन भी लगातार किया गया, जिससे राजस्व चोरी की संभावनाओं को काफी हद तक रोका जा सका। अधिकारियों का कहना है कि निर्धारित क्षेत्र से बाहर खनन करने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की गई।
इन्हीं प्रयासों का परिणाम रहा कि Uttarakhand Mining Revenue Record के तहत इस बार पिछले वर्षों की तुलना में कहीं बेहतर आंकड़े सामने आए।
वन विभाग ने बेहतर प्रबंधन को बताया बड़ी उपलब्धि
तराई पश्चिमी वन प्रभाग के डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्या के अनुसार, इस वर्ष राजस्व में हुई बढ़ोतरी का मुख्य कारण बेहतर निगरानी व्यवस्था और अवैध गतिविधियों के खिलाफ निरंतर अभियान रहा। उन्होंने कहा कि राजस्व हानि को रोकने के लिए विशेष रणनीति अपनाई गई थी, जिसका सकारात्मक परिणाम सामने आया है।
उनके मुताबिक, रात में गश्त बढ़ाने, आकस्मिक निरीक्षण करने और सभी गेटों पर दस्तावेजों की जांच के कारण राजस्व संग्रहण में बड़ी वृद्धि हुई है। इसी वजह से इस बार Uttarakhand Mining Revenue Record एक नए स्तर तक पहुंच सका।
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स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिला लाभ
खनन गतिविधियों से केवल सरकारी खजाने को ही फायदा नहीं हुआ, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े। परिवहन, श्रमिकों और संबंधित व्यवसायों से जुड़े लोगों को भी इसका सीधा लाभ मिला।
रामनगर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में खनन गतिविधियों का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। ऐसे में राजस्व में हुई बढ़ोतरी का असर स्थानीय व्यापार और रोजगार पर भी सकारात्मक रूप में दिखाई दे रहा है।
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मानसून के बाद फिर शुरू होगा खनन कार्य
अब मानसून के चलते खनन गतिविधियां बंद हो चुकी हैं। बारिश का मौसम समाप्त होने के बाद अक्टूबर महीने से एक बार फिर उपखनिज निकासी का कार्य शुरू किया जाएगा। विभाग को उम्मीद है कि यदि इसी तरह निगरानी और नियंत्रण की व्यवस्था कायम रही तो आने वाले वर्षों में भी Uttarakhand Mining Revenue Record नए आयाम स्थापित कर सकता है।
खनन से प्राप्त यह रिकॉर्ड राजस्व राज्य सरकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है और इससे यह संकेत भी मिलता है कि प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक और पारदर्शी उपयोग से विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।




