Voter List SIR Campaign उत्तराखंड में तेजी से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर शुरू किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत राज्य में मतदाताओं तक गणना प्रपत्र पहुंचाने का कार्य लगभग पूरा होने की स्थिति में पहुंच गया है। निर्वाचन विभाग के अनुसार 17 जून तक प्रदेश के करीब 97 प्रतिशत मतदाताओं तक गणना प्रपत्र सफलतापूर्वक पहुंचाए जा चुके हैं। अब विभाग का पूरा ध्यान प्राप्त प्रपत्रों के सत्यापन, डिजिटाइजेशन और ऑनलाइन अपलोडिंग पर केंद्रित किया जा रहा है।
निर्वाचन अधिकारियों का मानना है कि Voter List SIR Campaign के माध्यम से राज्य की मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाया जा सकेगा। यही कारण है कि इस बार अभियान को तकनीक आधारित स्वरूप भी दिया गया है।
8 जून से शुरू हुआ विशेष पुनरीक्षण अभियान
भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत 8 जून से 7 जुलाई तक Voter List SIR Campaign संचालित किया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची में मौजूद त्रुटियों को दूर करना, नए पात्र मतदाताओं को शामिल करना और मृत या स्थानांतरित मतदाताओं की पहचान करना है।
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अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे के अनुसार बूथ स्तर अधिकारियों (BLO) के माध्यम से घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित किए जा रहे हैं। अभियान के दौरान मतदाताओं से प्राप्त जानकारी को डिजिटल रिकॉर्ड में भी परिवर्तित किया जा रहा है ताकि भविष्य में मतदाता सूची को अद्यतन रखने की प्रक्रिया अधिक आसान हो सके।
पर्वतीय जिलों ने दिखाई शानदार प्रगति
Voter List SIR Campaign के तहत पर्वतीय जिलों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। रुद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, पौड़ी और चंपावत जैसे जिलों में 99 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं तक गणना प्रपत्र पहुंचाए जा चुके हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और दूरस्थ गांवों तक पहुंचने की चुनौतियों के बावजूद यह उपलब्धि निर्वाचन विभाग के लिए बड़ी सफलता मानी जा सकती है। पर्वतीय क्षेत्रों में बूथ स्तर अधिकारियों ने घर-घर जाकर अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
देहरादून और नैनीताल में भी तेजी से आगे बढ़ रहा अभियान
राज्य के सबसे बड़े जिलों में शामिल देहरादून और नैनीताल में भी Voter List SIR Campaign तेजी से आगे बढ़ रहा है। निर्वाचन विभाग का दावा है कि अगले कुछ दिनों में गणना प्रपत्र वितरण का कार्य पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
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देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जैसे अधिक जनसंख्या वाले जिलों में बड़ी संख्या में मतदाताओं तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन निर्वाचन विभाग ने समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।
डिजिटाइजेशन बना अभियान का सबसे अहम चरण
इस बार Voter List SIR Campaign केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। निर्वाचन आयोग पूरी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर विशेष जोर दे रहा है।
प्राप्त गणना प्रपत्रों का सत्यापन कर उन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। इससे मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत होगी। निर्वाचन विभाग का मानना है कि डिजिटाइजेशन के बाद मतदाता सूची में सुधार और अपडेट करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो जाएगा। राज्य के अधिकांश जिलों में करीब 10 प्रतिशत से अधिक प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन और सत्यापन कार्य पूरा भी किया जा चुका है।
नैनीताल जिले में बढ़ाई जा रही गति
हालांकि Voter List SIR Campaign के तहत डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया में नैनीताल जिला अन्य जिलों की तुलना में कुछ पीछे बताया जा रहा है। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश जारी किए हैं।
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निर्वाचन विभाग का लक्ष्य है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी जिलों में सत्यापन, डिजिटाइजेशन और पोर्टल अपलोडिंग का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया जाए। इसके लिए अतिरिक्त संसाधन और तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।
राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी
Voter List SIR Campaign की एक विशेषता राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी भी है। निर्वाचन आयोग ने सभी मान्यता प्राप्त दलों से बूथ लेवल एजेंट (BLA) नियुक्त करने का अनुरोध किया था ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
जानकारी के अनुसार भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेशभर में 11 हजार से अधिक BLA नियुक्त किए हैं। वहीं कांग्रेस ने 10 हजार से ज्यादा बूथ लेवल एजेंट तैनात किए हैं। अन्य राजनीतिक दलों ने भी अपने स्तर पर प्रतिनिधियों की नियुक्ति की है। निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि राजनीतिक दलों की भागीदारी से मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय और निष्पक्ष बनेगी।
क्यों महत्वपूर्ण है Voter List SIR Campaign?
विशेषज्ञों के अनुसार Voter List SIR Campaign केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। इसके जरिए मतदाता सूची में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की जानकारी को अद्यतन किया जा रहा है।
इस प्रक्रिया से मृत मतदाताओं के नाम हटाने, दोहरी प्रविष्टियों की पहचान करने और नए पात्र मतदाताओं को सूची में जोड़ने में मदद मिलेगी। इससे आगामी चुनावों के दौरान अधिक सटीक और स्वच्छ मतदाता सूची उपलब्ध होगी।
आगामी चरणों पर निर्वाचन विभाग की नजर
निर्वाचन विभाग का कहना है कि गणना प्रपत्र वितरण की सफलता के बाद अब पूरा ध्यान सत्यापन, डिजिटाइजेशन और पोर्टल अपलोडिंग पर रहेगा। विभाग को उम्मीद है कि 7 जुलाई तक Voter List SIR Campaign के सभी निर्धारित लक्ष्य पूरे कर लिए जाएंगे।
राज्यभर में अभियान को मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया से अधिकारियों का उत्साह बढ़ा है। यदि यह प्रक्रिया तय समय में पूरी हो जाती है तो उत्तराखंड देश के उन राज्यों में शामिल हो सकता है जहां मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य सबसे प्रभावी और तकनीक आधारित तरीके से संपन्न हुआ है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि Voter List SIR Campaign भविष्य के चुनावों को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और निष्पक्ष बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
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