Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार की सुबह निवेशकों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं रही। बाजार खुलते ही Stock Market Crash का ऐसा माहौल देखने को मिला, जिसने लाखों निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख इंडेक्स भारी गिरावट के साथ खुले, जबकि आईटी सेक्टर के दिग्गज शेयरों में बिकवाली का तूफान आ गया। पिछले कारोबारी सत्र में शानदार प्रदर्शन करने वाले आईटी स्टॉक्स अचानक धराशायी हो गए और बाजार में घबराहट का माहौल बन गया।
सेंसेक्स और निफ्टी खुलते ही फिसले
बुधवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर से नीचे खुला और शुरुआती कारोबार में ही करीब 900 अंकों तक टूट गया। वहीं निफ्टी भी 200 अंकों से अधिक की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। निवेशकों को उम्मीद थी कि सकारात्मक वैश्विक संकेतों का असर भारतीय बाजार पर पड़ेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा Stock Market Crash केवल घरेलू कारणों की वजह से नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का भी बड़ा असर बाजार पर दिखाई दे रहा है। जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा, बिकवाली का दबाव और बढ़ता गया।
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IT Stocks में सबसे ज्यादा तबाही
इस गिरावट का सबसे बड़ा असर आईटी सेक्टर पर देखने को मिला। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक जैसे बड़े शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। कुछ शेयरों में 6 प्रतिशत तक की कमजोरी देखी गई।
मिडकैप आईटी कंपनियां भी इस दबाव से नहीं बच सकीं। पर्सिस्टेंट सिस्टम्स, एमफैसिस और कोफोर्ज जैसे शेयर भी लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। खास बात यह रही कि एक दिन पहले इन्हीं शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली थी, लेकिन बुधवार को तस्वीर पूरी तरह बदल गई। इस Stock Market Crash ने आईटी निवेशकों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया।
अमेरिका-ईरान तनाव बना बड़ी वजह
बाजार में अचानक आई इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता मानी जा रही है। वैश्विक निवेशक अभी भी इस बात को लेकर आशंकित हैं कि मध्य पूर्व में हालात किस दिशा में जाएंगे।
जब भी भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, उसका असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर पड़ता है। यही कारण है कि निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनानी शुरू कर दी। इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला और Stock Market Crash की स्थिति पैदा हो गई।
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कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई चिंता
कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी भी बाजार के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गई है। कुछ दिनों की गिरावट के बाद क्रूड ऑयल की कीमतें फिर तेजी से बढ़कर 97 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं।
भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। ऐसे में तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने और कंपनियों की लागत बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है। निवेशक इसी आशंका के चलते बाजार से पैसा निकालते नजर आए। इसका असर सीधे तौर पर Stock Market Crash के रूप में सामने आया।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी
विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FII लगातार भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली कर रहे हैं। जब बड़े विदेशी फंड बाजार से पैसा निकालते हैं, तो शेयरों पर दबाव बढ़ जाता है। हाल के दिनों में विदेशी निवेशकों की लगातार बिक्री ने बाजार की कमजोरी को और बढ़ाया है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहती है और वैश्विक अनिश्चितता बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
मौजूदा Stock Market Crash के बीच घबराकर फैसले लेने से बचना जरूरी है। बाजार में गिरावट अस्थायी भी हो सकती है और लंबी अवधि के निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए। निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर नजर बनाए रखनी चाहिए, क्योंकि आने वाले दिनों में यही कारक बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।
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