Bihar politics: बिहार की राजनीति इस वक्त अपने सबसे बड़े निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आगामी दिल्ली दौरे और राज्यसभा सांसद के रूप में उनके शपथ ग्रहण की खबरों ने प्रदेश में ‘सत्ता हस्तांतरण’ की चर्चाओं को पंख दे दिए हैं। जानकारी के मुताबिक, नीतीश कुमार 9 अप्रैल को दिल्ली रवाना होंगे और 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। इसके तुरंत बाद बिहार एनडीए में बड़े बदलाव की पटकथा लिखी जाएगी। माना जा रहा है कि खरमास की समाप्ति के बाद 15 अप्रैल को बिहार में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है, जो राज्य की सियासत में एक नए युग की शुरुआत होगी।
नीतीश कुमार के संभावित इस्तीफे को लेकर पटना से दिल्ली तक हलचल तेज है। 10 अप्रैल को दिल्ली में भाजपा की एक हाई-लेवल मीटिंग होने वाली है, जिसमें बिहार के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है। इसके बाद 12 अप्रैल को पटना में एनडीए विधानमंडल दल की महत्वपूर्ण बैठक बुलाए जाने की संभावना है। करीब 20 वर्षों तक बिहार की कमान संभालने वाले नीतीश कुमार ने हाल ही में विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देकर साफ कर दिया था कि वे अब राष्ट्रीय राजनीति में नई भूमिका के लिए तैयार हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नीतीश का उत्तराधिकारी कौन होगा और भाजपा किसे बिहार की गद्दी सौंपेगी। Bihar politics
मुख्यमंत्री की रेस में कौन सबसे आगे?
बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर कयासों का बाजार गर्म है, लेकिन इस रेस में वर्तमान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे ऊपर चल रहा है। भाजपा के भीतर और बाहर उन्हें इस पद का सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है। हालांकि, पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता भी इस बदलाव पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। Bihar politics
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दिग्गज नेताओं के अलग-अलग सुर
सत्ता के इस बदलाव के बीच भाजपा नेताओं के बयानों ने सस्पेंस और बढ़ा दिया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने संकेत देते हुए कहा कि “बिहार से जल्द ही अच्छी खबर आएगी।’ वहीं, मुख्यमंत्री की रेस में दूसरे दावेदार माने जा रहे उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने विनम्रता दिखाते हुए कहा, “मैं मुख्यमंत्री की रेस में ही नहीं हूं।’ दूसरी ओर, सम्राट चौधरी ने भविष्य को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा कि “अगले हजारों वर्षों तक बिहार में भाजपा की सरकार रहेगी।’Bihar politics
10 अप्रैल की दिल्ली बैठक और 15 अप्रैल का शपथ ग्रहण
सूत्रों के अनुसार, 10 अप्रैल को दिल्ली में होने वाली भाजपा की बैठक में अमित शाह और जेपी नड्डा जैसे शीर्ष नेता बिहार के भविष्य का खाका तैयार करेंगे। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो 12 अप्रैल को नए नेता का चयन कर लिया जाएगा और 15 अप्रैल को भव्य शपथ ग्रहण समारोह होगा। इस समारोह में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के भी शामिल होने की उम्मीद है। Bihar politics
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नीतीश कुमार का ‘विधान परिषद’ से विदा लेना
नीतीश कुमार साल 2006 से लगातार बिहार विधान परिषद के सदस्य रहे थे। उनका इस सदस्यता से इस्तीफा देना इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण था कि वे अब मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने का मन बना चुके हैं। 20 साल तक बिहार की राजनीति के केंद्र में रहने वाले नीतीश अब दिल्ली की राजनीति में सक्रिय होंगे, जिससे बिहार भाजपा के लिए अपना मुख्यमंत्री बनाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। Bihar politics



