Badaun Ganga Ghat Accident: गंगा दशहरा के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में एक दर्दनाक हादसे ने खुशियों के माहौल को मातम में बदल दिया। हजारों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने गंगा घाट पहुंचे थे, लेकिन कछला और अटेना घाट पर अचानक हुए हादसे (Badaun Ganga Ghat Accident) ने कई परिवारों की जिंदगी उजाड़ दी। गंगा स्नान के दौरान पांच श्रद्धालुओं की डूबने से मौत हो गई, जबकि एक मासूम बच्ची अब भी लापता बताई जा रही है। घटना के बाद घाट पर अफरा-तफरी और चीख-पुकार का माहौल बन गया।
स्नान के दौरान अचानक बढ़ी अफरा-तफरी
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक गंगा दशहरा के कारण घाटों पर सुबह से ही भारी भीड़ उमड़ी हुई थी। श्रद्धालु परिवार के साथ गंगा स्नान कर रहे थे, तभी कुछ लोग अचानक गहरे पानी में चले गए। देखते ही देखते कई लोग डूबने लगे और मौके पर हड़कंप मच गया। घटना (Badaun Ganga Ghat Accident) के बाद स्थानीय लोगों और नाविकों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया। कई श्रद्धालुओं ने पानी में कूदकर लोगों को बचाने की कोशिश की। हालांकि तेज बहाव और गहराई के कारण पांच लोगों को नहीं बचाया जा सका।
एक बच्ची अब भी लापता
हादसे (Badaun Ganga Ghat Accident) के बाद सबसे ज्यादा चिंता उस मासूम बच्ची को लेकर बनी हुई है जो अब तक लापता है। पुलिस और गोताखोरों की टीम लगातार उसकी तलाश में जुटी हुई है। गंगा किनारे देर शाम तक सर्च ऑपरेशन जारी रहा। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जो परिवार कुछ घंटे पहले धार्मिक आस्था के साथ पूजा-पाठ कर रहे थे, वही अब अपने प्रियजनों की तलाश में घाटों पर भटकते नजर आए।
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स्थानीय नाविक बने फरिश्ता
इस दर्दनाक हादसे (Badaun Ganga Ghat Accident) के बीच कुछ लोगों ने बहादुरी दिखाकर कई जानें बचाईं। स्थानीय नाविक रिजवान, अनिल और उनकी गोताखोर टीम ने पुलिस के साथ मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। उनकी मदद से चार श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाला गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर नाविक समय पर मदद के लिए आगे नहीं आते, तो मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती थी। प्रशासन ने भी रेस्क्यू टीम के प्रयासों की सराहना की है।
प्रशासन अलर्ट, अधिकारियों ने किया निरीक्षण
घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन हरकत में आ गया। डीएम अविनाश कुमार राय और एसएसपी अंकित शर्मा मौके पर पहुंचे और पूरे घटनास्थल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने रेस्क्यू टीमों को सर्च ऑपरेशन तेज करने के निर्देश दिए। प्रशासन ने बताया कि मृतकों की पहचान फर्रुखाबाद, मैनपुरी, हाथरस और बदायूं जिले के रहने वाले श्रद्धालुओं के रूप में हुई है। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
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सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
हर साल गंगा दशहरा और अन्य धार्मिक आयोजनों पर लाखों श्रद्धालु गंगा घाटों पर पहुंचते हैं। ऐसे में इस हादसे ने सुरक्षा इंतजामों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि घाटों पर पर्याप्त सुरक्षा कर्मी और चेतावनी बोर्ड नहीं थे। कई श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया कि भीड़ के मुकाबले सुरक्षा व्यवस्था कमजोर थी। गहरे पानी वाले क्षेत्रों में बैरिकेडिंग और निगरानी की व्यवस्था और मजबूत होनी चाहिए थी। अब प्रशासन इस मामले की समीक्षा करने की बात कह रहा है।
आस्था और लापरवाही का खतरनाक मेल
गंगा दशहरा जैसे पर्व पर लोग बड़ी श्रद्धा के साथ स्नान करने पहुंचते हैं, लेकिन कई बार भीड़, लापरवाही और सुरक्षा नियमों की अनदेखी हादसों का कारण बन जाती है। नदी में स्नान के दौरान सावधानी बेहद जरूरी है, खासकर उन घाटों पर जहां पानी का बहाव तेज हो। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे गहरे पानी में जाने से बचें और केवल निर्धारित सुरक्षित क्षेत्रों में ही स्नान करें।
पूरे इलाके में शोक का माहौल
इस हादसे के बाद (Badaun Ganga Ghat Accident) बदायूं और आसपास के इलाकों में शोक का माहौल है। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके घरों में मातम पसरा हुआ है। गंगा दशहरा का पर्व जहां आस्था और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है, वहीं इस हादसे ने एक बार फिर यह याद दिला दिया कि धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा इंतजाम कितने जरूरी हैं। फिलहाल प्रशासन की टीम लापता बच्ची की तलाश में जुटी हुई है और पूरे मामले की जांच जारी है।
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