Dehradun firing incident: राजधानी देहरादून में सोमवार सुबह हुआ Dehradun firing incident पूरे शहर को झकझोर गया। गढ़ी कैंट-मालसी रोड पर तड़के करीब 6 से 6:30 बजे के बीच दो गाड़ियों के बीच फिल्मी अंदाज में पीछा और ताबड़तोड़ फायरिंग हुई, जिसमें एक निर्दोष बुजुर्ग की जान चली गई। मॉर्निंग वॉक पर निकले रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी इस गोलीबारी की चपेट में आ गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
सिनौला चौक से शुरू हुआ खौफनाक पीछा
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, Dehradun firing incident की शुरुआत सिनौला चौक से हुई। जोहड़ी गांव की तरफ से आई एक स्कॉर्पियो कार, आगे चल रही फॉर्च्यूनर का तेज रफ्तार में पीछा कर रही थी। स्कॉर्पियो में बैठे युवक लगातार गोलियां चला रहे थे, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
स्थानीय निवासी रमेश सिंह बोहरा ने बताया कि उन्होंने सुबह करीब 6:20 बजे गोलियों की आवाज सुनी। जब वे घर से बाहर निकले, तो देखा कि एक काली गाड़ी सफेद गाड़ी का पीछा करते हुए फायरिंग कर रही थी। इसी दौरान सड़क किनारे पैदल जा रहे रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी को गोली लग गई।
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निर्दोष की जान गई, हमलावर फरार
Dehradun firing incident में सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि इसका शिकार एक निर्दोष व्यक्ति बना। गोली लगने के बाद मुकेश जोशी सड़क पर गिर पड़े, लेकिन हमलावर नहीं रुके। थोड़ी दूरी पर सफेद फॉर्च्यूनर एक पेड़ से टकरा गई, जिसके बाद हमलावर कार से उतरे और उसमें बैठे लोगों पर लाठी-डंडों से हमला कर फरार हो गए।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मुकेश जोशी रोज इसी रास्ते पर मॉर्निंग वॉक करते थे और बेहद मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति थे। उनकी अचानक मौत से इलाके में शोक और गुस्से का माहौल है।
स्कूल बंद होने से टला बड़ा हादसा
प्रत्यक्षदर्शी कुलदीप बिष्ट ने बताया कि जिस स्थान पर यह Dehradun firing incident हुआ, वहां पास में ही एक स्कूल है। संयोग से उस दिन स्कूल बंद था, वरना बड़ी संख्या में बच्चे वहां मौजूद होते और हादसा और भी बड़ा हो सकता था।
उन्होंने बताया कि दोनों गाड़ियां इतनी तेज रफ्तार में थीं कि कोई भी राहगीर उनकी चपेट में आ सकता था। गोलीबारी के बाद जब गाड़ियां निकल गईं, तब सड़क किनारे एक बुजुर्ग को खून से लथपथ पड़ा देखा गया।
सीसीटीवी में कैद हुई वारदात
स्थानीय निवासी मुजाहिद हसन अंसारी ने बताया कि घटना के समय वे सिनौला चौक पर मौजूद थे। उन्होंने बताया कि दोनों गाड़ियों में युवा लड़के सवार थे और काली गाड़ी पर नंबर प्लेट भी नहीं थी। यह पूरा Dehradun firing incident पास लगे सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हुआ है, जिससे पुलिस को जांच में मदद मिल रही है।
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क्लब विवाद से जुड़ा मामला
शुरुआत में इस घटना को ओवरटेकिंग विवाद माना जा रहा था, लेकिन जांच में सामने आया कि यह मामला एक क्लब में हुए झगड़े से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, 29 मार्च की रात मसूरी रोड स्थित एक क्लब में बिल को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हुआ था।
अगली सुबह जब क्लब संचालक वहां से निकले, तो आरोपियों ने उनका पीछा किया और यह Dehradun firing incident हुआ। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए संबंधित क्लब को सील कर दिया है और लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की है।
स्थानीय लोगों में डर और नाराजगी
इस घटना के बाद इलाके के लोगों में भारी दहशत है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में तेज रफ्तार और लापरवाह ड्राइविंग की समस्या पहले से ही थी, लेकिन अब अपराध की घटनाएं भी बढ़ रही हैं।
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स्थानीय लोगों ने पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर समय रहते सख्ती की जाती, तो शायद यह Dehradun firing incident टल सकता था।
पुलिस जांच जारी, आरोपियों की तलाश
पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियों की तलाश जारी है। सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर संदिग्धों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
यह Dehradun firing incident न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि निजी विवाद किस तरह आम लोगों की जान के लिए खतरा बन सकते हैं। अब सभी की नजर पुलिस कार्रवाई पर टिकी है कि दोषियों को कब तक पकड़कर सजा दिलाई जाती है।
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