Strait of Hormuz Crisis: मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच सुलगती युद्ध की आग अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ‘टाइम बम’ बन गई है। इस तनाव का सबसे खौफनाक असर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर दिख रहा है, जहाँ सुरक्षा कारणों से कम से कम 150 तेल और गैस टैंकर बीच समंदर में ठप पड़ गए हैं। रॉयटर्स और ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान द्वारा इस जलमार्ग को बाधित करने की आशंका ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में हड़कंप मचा दिया है। यदि यह गतिरोध जारी रहता है, तो भारत समेत कई एशियाई देशों में पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ रसोई गैस (LPG) और CNG की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी होना तय है।
होर्मुज की खाड़ी से दुनिया की कुल तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। इस रणनीतिक मार्ग पर जरा सी भी हलचल वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन को ताश के पत्तों की तरह बिखेर सकती है। शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, घबराहट के कारण कई एलएनजी टैंकरों ने अपनी यात्रा बीच में ही रोक दी है। भारत के लिए यह स्थिति इसलिए भी नाजुक है क्योंकि देश अपनी गैस जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आयात करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध से भी अधिक गहरा सकता है क्योंकि इस बार ऊर्जा संकट का केंद्र यूरोप नहीं, बल्कि एशिया है। (Strait of Hormuz Crisis)
एशियाई देशों की बढ़ती चिंता
इस पूरे ऊर्जा संकट के केंद्र में कतर है, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गैस निर्यातक देश है। कतर की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि उसका पूरा गैस निर्यात होर्मुज की खाड़ी पर निर्भर है। भारत अपनी कुल गैस जरूरत का 40 फीसदी हिस्सा अकेले कतर से खरीदता है। पिछले साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो कतर ने कुल 82.2 मिलियन टन गैस का निर्यात किया था। इसमें चीन 20 मिलियन टन के साथ सबसे बड़ा खरीदार रहा, जबकि 12 मिलियन टन के साथ भारत दूसरे स्थान पर है। पाकिस्तान, ताइवान और दक्षिण कोरिया भी अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए पूरी तरह इसी समुद्री मार्ग के भरोसे हैं। (Strait of Hormuz Crisis)
रूस-यूक्रेन युद्ध जैसा मंजर
ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों को आज के हालात में चार साल पुरानी वह तस्वीर याद आ रही है, जब यूक्रेन पर हमले के बाद रूस से गैस की सप्लाई ठप हो गई थी। उस वक्त यूरोप ने महंगाई की मार झेली थी, लेकिन इस बार चीन और भारत जैसे देश सीधे निशाने पर हैं। चीन ने अभी से वैकल्पिक रास्ते और स्रोत तलाशने शुरू कर दिए हैं, लेकिन जानकारों का कहना है कि कतर की गैस का कोई ठोस विकल्प खोजना, खासकर एशियाई देशों के लिए, फिलहाल नामुमकिन है। (Strait of Hormuz Crisis)

आपकी जेब पर होगा सीधा असर
शिपिंग डेटा के मुताबिक, कम से कम 11 बड़े एलएनजी टैंकरों ने अपनी लोकेशन बदल दी है या यात्रा रोक दी है। हालांकि ‘कतर एनर्जी’ ने अभी तक आधिकारिक तौर पर शिपमेंट नहीं रोका है, लेकिन युद्ध की आशंका ने इंश्योरेंस और शिपिंग लागत को बढ़ा दिया है। चूंकि एलएनजी के अंतरराष्ट्रीय सौदे अक्सर कच्चे तेल के दामों (ब्रेंट क्रूड) से जुड़े होते हैं, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में होने वाला उछाल सीधे आपके घर के बजट यानी रसोई गैस और वाहन ईंधन की कीमतों में आग लगा देगा। (Strait of Hormuz Crisis)
तुर्की और जापान भी संकट में
इस भू-राजनीतिक तनाव की तपिश तुर्की तक भी पहुंच गई है। तुर्की अपनी कुल गैस सप्लाई का 15 प्रतिशत हिस्सा पाइपलाइन के जरिए ईरान से मंगाता है। यदि युद्ध लंबा खिंचता है और ईरान अपनी सप्लाई रोकता है, तो तुर्की का पावर ग्रिड फेल हो सकता है। इसी तरह जापान और अन्य पूर्वी एशियाई देश भी इस सप्लाई चेन के टूटने से भारी मंदी की चपेट में आ सकते हैं। (Strait of Hormuz Crisis)



