Ajit Doval Russia Visit: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के रूस दौरे (Ajit Doval Russia Visit) ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि बदलते वैश्विक हालात में भारत अपनी रणनीतिक भूमिका को और मजबूत करने में जुटा है। मॉस्को में रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव के साथ हुई उनकी बैठक सिर्फ औपचारिक बातचीत नहीं थी, बल्कि इसमें रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और वैश्विक सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ रहा है और दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों पर खतरा मंडरा रहा है, भारत ने अपनी चिंताओं और प्राथमिकताओं को खुलकर सामने रखा।
रक्षा और ऊर्जा सहयोग पर विशेष जोर
मॉस्को में हुई बैठक (Ajit Doval Russia Visit) के दौरान भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। रूस लंबे समय से भारत का रणनीतिक साझेदार रहा है और दोनों देशों के बीच रक्षा सौदों से लेकर तकनीकी सहयोग तक मजबूत संबंध बने हुए हैं। माना जा रहा है कि दोनों देशों ने नई रक्षा तकनीकों, संयुक्त उत्पादन और ऊर्जा सुरक्षा पर भी बातचीत की।
ऊर्जा क्षेत्र में भी भारत और रूस के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारत रूस के साथ अपने ऊर्जा सहयोग को स्थिर बनाए रखना चाहता है। यही वजह है कि इस मुलाकात को आर्थिक और रणनीतिक दोनों नजरियों से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर भारत की चिंता
अजीत डोभाल (Ajit Doval Russia Visit) ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मंच को संबोधित करते हुए साफ कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा आज पूरी दुनिया के लिए जरूरी है। इन रास्तों से दुनिया का बड़ा व्यापार गुजरता है और किसी भी तरह का तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि व्यापारिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना सभी देशों की सामूहिक जिम्मेदारी है। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और समुद्री हमलों की घटनाओं के बीच भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह वैश्विक व्यापारिक स्थिरता को लेकर गंभीर है।
आतंकवाद पर दोहरे रवैये के खिलाफ भारत
अपने संबोधन में डोभाल (Ajit Doval Russia Visit) ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत दोहराई। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता और इसके खिलाफ लड़ाई में दोहरा मापदंड नहीं अपनाया जाना चाहिए। भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है। ऐसे में मॉस्को से दिया गया यह संदेश वैश्विक राजनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। डोभाल का बयान उन देशों के लिए भी संकेत माना जा रहा है जो आतंकवाद के मुद्दे पर चयनात्मक रवैया अपनाते हैं।
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रूस के सुरक्षा प्रमुख शोइगु से भी हुई अहम मुलाकात
रूस दौरे के दौरान अजीत डोभाल (Ajit Doval Russia Visit) ने रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा हालात, क्षेत्रीय तनाव और रणनीतिक साझेदारी को लेकर चर्चा की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब दुनिया तेजी से बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। अमेरिका, चीन, रूस और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और संतुलित कूटनीति को बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
अंतरिक्ष सहयोग को मिला नया महत्व
डोभाल ने रूस के राष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र का दौरा भी किया और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर मौजूद रूसी अंतरिक्ष यात्रियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की। भारत और रूस के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में दशकों पुराना सहयोग रहा है। साल 1984 में राकेश शर्मा सोवियत मिशन के जरिए अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बने थे। अब गगनयान मिशन और नई अंतरिक्ष तकनीकों के दौर में दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा मिलने की संभावना है।
बदलती दुनिया में भारत की मजबूत रणनीति
अजीत डोभाल का यह दौरा (Ajit Doval Russia Visit) सिर्फ एक कूटनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति में भारत की सक्रिय भूमिका का संकेत भी माना जा रहा है। समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद, ऊर्जा संकट और वैश्विक शक्ति संतुलन जैसे मुद्दों पर भारत अब खुलकर अपनी रणनीति दुनिया के सामने रख रहा है। रूस के साथ बढ़ता सहयोग यह भी दिखाता है कि भारत बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए संतुलित संबंध बनाए रखने की नीति पर आगे बढ़ रहा है।
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