रिपोर्टर- फारुक शिद्दीकी
Annapurna Sweets : दिल्ली-एनसीआर की रफ्तार भरी जिंदगी में अगर कोई चीज हर वर्ग, हर उम्र और हर तबके को जोड़ती है तो वह है – समोसा। सुबह-शाम की चाय के साथ हो या ऑफिस से लौटते वक्त का नाश्ता, समोसा हर किसी की पहली पसंद है।
लेकिन यही साधारण दिखने वाला समोसा जब संध्या राठौड़ के हाथों से बनता है, तो यह सिर्फ एक नाश्ता नहीं बल्कि स्वाद और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन जाता है।
Annapurna Sweets : “संध्या राठौड़ के समोसे” के नाम से बनाई पहचान
दिलशाद गार्डन स्थित अन्नपूर्णा स्वीट्स (A-78, C ब्लॉक) आज सिर्फ एक मिठाई की दुकान नहीं रही, बल्कि पूरे NCR में “संध्या राठौड़ के समोसे” के नाम से पहचानी जाने लगी है। लोग कहते हैं कि अगर आप NCR में रहते हैं और आपने अभी तक यहां का समोसा नहीं खाया है तो आपने बहुत कुछ मिस कर दिया है।

Annapurna Sweets : कैसे बनी “samosa क्वीन”
संध्या राठौड़ की कहानी प्रेरणा से भरी हुई है। समाज में अक्सर यह धारणा रही है कि “महिलाएं घर तक ही सीमित होती हैं” या फिर नौकरी तक। लेकिन व्यवसाय या कारोबार महिलाओं के बस की बात नहीं। संध्या ने इस सोच को अपने दमदार संघर्ष और मेहनत से गलत साबित किया। शुरुआत में लोग कहते थे – “बेटी क्या करेगी? समोसे बनाने से क्या होगा?”
लेकिन संध्या ने समोसा बनाकर ही अपनी पहचान बनाई और अब वही लोग गर्व से कहते हैं कि “हमारी संध्या NCR की समोसा क्वीन है।” उनका मानना है कि अगर किसी महिला की नौकरी चली जाए या उसे घर-परिवार की जिम्मेदारियों के बीच नया रास्ता चुनना हो तो वह अपने हुनर से भी आत्मनिर्भर बन सकती है।
Annapurna Sweets : स्वाद का जादू – क्या है राज?
संध्या के समोसे साधारण समोसे नहीं हैं। उनका स्वाद बाकी दुकानों से अलग है।
•बाहर से कुरकुरे – सुनहरा तला हुआ परत जो खाने में चटखदार लगता है।
•अंदर से मसालेदार – आलू, मटर, मसाले और उनके खुद के बनाए गए सीक्रेट मसाला मिक्स का जादू।
•प्यार और लगन – लोग कहते हैं कि समोसे में संध्या का ‘दिल’ भी शामिल होता है।
ग्राहकों का कहना है – “संध्या जी के समोसे खाने के बाद बाकी दुकानों का समोसा फीका लगता है। उनके समोसे में सिर्फ मसाला नहीं, मेहनत और संघर्ष की खुशबू भी मिलती है।”
Annapurna Sweets : भीड़ का आलम – मानो लंगर चल रहा हो
अन्नपूर्णा स्वीट्स पर जब समोसे बनते हैं तो वहां का नजारा देखने लायक होता है। कड़ाही से जैसे ही गरमा-गरम समोसे निकलते हैं, लोग लाइन लगाकर इंतजार करते हैं। कुछ ही मिनटों में सारे समोसे बिक जाते हैं। ग्राहक मजाक में कहते हैं – “यह दुकान कम, गुरुद्वारे का लंगर ज्यादा लगती है। यहां हर किसी को हिस्से का स्वाद जरूर मिलता है।”
Annapurna Sweets : NCR में बनी पहचान
दिलशाद गार्डन की गली से शुरू हुआ यह स्वाद अब पूरे NCR में छा गया है।
•नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम से लोग यहां आते हैं।
•कई फूड ब्लॉगर्स और यूट्यूब चैनल्स संध्या के समोसों की रिव्यू वीडियो बना चुके हैं।
•त्योहारों और छुट्टियों में तो दुकान पर इतनी भीड़ लगती है कि ग्राहकों को समोसे के लिए इंतजार करना पड़ता है।
Annapurna Sweets : समाज के लिए संदेश
संध्या राठौड़ की यह सफलता सिर्फ एक दुकान तक सीमित नहीं है। यह एक बड़ा संदेश है –
1.महिलाएं हर क्षेत्र में सक्षम हैं – अगर मौका और समर्थन मिले तो महिलाएं कारोबार भी चला सकती हैं।
2.छोटा काम भी बड़ा बन सकता है – समोसा जो आमतौर पर सड़क किनारे बिकता है, उसी ने संध्या को NCR में स्टार बना दिया।
3.आत्मनिर्भरता ही असली ताकत है – नौकरी पर निर्भर रहने के बजाय हुनर से अपना भविष्य बनाना ही सही रास्ता है।
Annapurna Sweets : ग्राहकों की राय
मैं नोएडा से सिर्फ इनके समोसे खाने आता हूं। स्वाद ऐसा है कि बार-बार खींच लाता है।” – विकास शर्मा
जब भी दिलशाद गार्डन आती हूं, बिना संध्या जी के समोसे खाए नहीं जाती।” – पूनम अरोड़ा
इनका काम देखकर लगता है कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं।”
Annapurna Sweets : महिलाओं के लिए प्रेरणा
संध्या आज न सिर्फ अपने परिवार की जिम्मेदारी निभा रही हैं बल्कि औरतों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी हैं। उन्होंने दिखा दिया कि अगर कोई ठान ले तो समोसे जैसा साधारण काम भी सफलता और पहचान का बड़ा जरिया बन सकता है।
उनकी दुकान पर कई युवा लड़कियां आकर पूछती हैं कि “दीदी, आप कैसे यह सब कर लेती हैं?” तो संध्या का जवाब होता है –
“अगर मेहनत और विश्वास हो तो कोई भी महिला खुद का कारोबार खड़ा कर सकती है। बस पहला कदम उठाने की हिम्मत चाइये
Annapurna Sweets : स्वाद ने लोगों को बनाया कायल
दिल्ली-एनसीआर में जहां आधुनिक कैफे, रेस्टोरेंट और ब्रांड्स का बोलबाला है, वहीं संध्या राठौड़ ने एक साधारण समोसे से ऐसा स्वाद और पहचान बनाई है कि हर कोई उनका कायल हो गया है।
अगर आप NCR में रहते हैं और अभी तक आपने संध्या राठौड़ के हाथ का समोसा नहीं खाया है तो अगली बार दिलशाद गार्डन जरूर जाइए। हो सकता है कि एक गरमा-गरम समोसे का स्वाद न सिर्फ आपकी भूख मिटा दे बल्कि आपके दिल में यह यकीन भी जगा दे कि काम कोई छोटा नहीं होता, बस करने वाला बड़ा होना चाहिए।”



