Ghaziabad News : नगर निगम गाजियाबाद द्वारा वसुंधरा सेक्टर 13 स्थित बहुमंज़िला मर्लिन सोसाइटी के ठीक सामने सड़क किनारे खाली पड़ी जमीन पर लाखों रुपये खर्च कर कराई गई चारदीवारी, तार फेंसिंग, समरसेबिल पंप स्थापना और घास लगवाने जैसी गतिविधियां एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। यह निर्माण ऐसे समय में किया गया है जब आसपास के लोगों को इससे कोई प्रत्यक्ष लाभ नहीं है और इस स्थान पर आम जनता के प्रवेश के लिए न कोई रास्ता छोड़ा गया है, न ही इसे सार्वजनिक उपयोग के लिए खोला गया है।
Ghaziabad News : सिंचाई की व्यवस्था नहीं होने से हरित पट्टी सूखी
वहीं दूसरी ओर, वसुंधरा सेक्टर 19 से सेक्टर 1 तक लगभग 5.5 किलोमीटर लंबा मुख्य सेंट्रल वर्ज देखरेख के अभाव में बदहाल अवस्था में पहुंच चुका है। यहां नगर निगम द्वारा पूर्व में लगाए गए समरसेबिल पंप या तो काम नहीं कर रहे या फिर उनकी मोटरें चोरी हो चुकी हैं। हरियाली के लिए जरूरी सिंचाई की कोई व्यवस्था नहीं होने से यह हरित पट्टी सूख चुकी है। लेकिन ये मामला तब और गंभीर हो जाता है जब यह तथ्य सामने आता है कि 18 जून 2023 को मर्लिन सोसाइटी में शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लग गई थी, जिसमें फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियों ने इसी खाली स्थान पर खड़े होकर आग पर काबू पाया था। उस हादसे के बाद यह माना गया था कि आवास विकास परिषद इस क्षेत्र की ज़रूरतों के प्रति संवेदनशील हो गया है। लेकिन अब उसी जीवनरक्षक खाली भूमि पर नगर निगम द्वारा पक्के निर्माण ने आपातकालीन परिस्थितियों में बचाव कार्यों को कठिन बना दिया है।
Ghaziabad News : उठते हैं कई सवाल ?
स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा इस निर्माण को लेकर नगर निगम से कुछ गंभीर सवाल पूछे जा रहे हैं। जैसे- क्या इस निर्माण की स्वीकृति आवास विकास परिषद से ली गई थी? क्या निर्माण से पहले किसी प्रकार की सार्वजनिक प्रतिक्रिया या जन-सुनवाई आयोजित की गई? क्या किसी हितधारक या स्थानीय निवासियों से परामर्श किया गया? यह स्थिति एक बार फिर सरकार और नगर निकायों की बिना समन्वय और पारदर्शिता के काम करने की प्रवृत्ति को उजागर करती है। नगर निगम की इस परियोजना को बजट समाप्ति के बहाने से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे जनता के पैसों का गलत इस्तेमाल स्पष्ट होता है।
Ghaziabad News : अवैध निर्माण और नियमों की अनदेखी
जानकारी के अनुसार, मर्लिन सोसाइटी में बिल्डर द्वारा किया गया अधिकांश निर्माण पहले ही अवैध घोषित किया जा चुका है और इस पर आवास विकास परिषद कार्रवाई कर चुकी है। इसके बावजूद, नगर निगम द्वारा उसी क्षेत्र में बिना स्पष्ट अनुमति के निर्माण करना उत्तर प्रदेश रोड कंट्रोल एक्ट 1964 और अन्य शहरी विकास नियमों का उल्लंघन हो सकता है।
Ghaziabad News : जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज
स्थानीय निवासियों द्वारा इस पूरे मामले को लेकर जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज की गई है और उम्मीद जताई जा रही है कि उच्च अधिकारी इस विवादित निर्माण पर जांच बैठाएंगे। लेकिन यह मामला न केवल शहर की योजना और आपातकालीन प्रबंधन की कमियों को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि किस तरह बिना जनहित को ध्यान में रखे निर्णय लिए जा रहे हैं, जिनका असर भविष्य में गंभीर हो सकता है।



