Ghaziabad Harish Rana Case: सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद के हरीश राणा के लिए Passive Euthanasia की अनुमति दी है। हरीश पिछले 12 साल से coma में हैं और डॉक्टरों के अनुसार उनकी ठीक होने की संभावना लगभग नहीं है। अदालत ने कहा कि यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि मानवता और परिवार की भावनाओं से जुड़ा हुआ है।
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Ghaziabad Harish Rana Case: परिवार की गुहार- गरिमापूर्ण विदाई
हरीश के माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि उनका बेटा अब केवल machines और life support के सहारे जीवित है और ठीक होने की संभावना नहीं है। परिवार ने अदालत से गुहार लगाई कि उन्हें गरिमा के साथ जीवन से विदा होने दिया जाए। इतने लंबे समय तक ऐसे जीवन को बनाए रखना मानसिक और भावनात्मक रूप से परिवार के लिए बेहद कठिन साबित हुआ। अदालत ने इस संवेदनशील मामले पर ध्यान देने का निर्णय लिया।
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Ghaziabad Harish Rana Case: सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया मानवीय फैसला
सुनवाई की बेंच में जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन शामिल थे। अदालत ने कहा कि मरीज की गंभीर स्थिति और परिवार की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए Passive Euthanasia की अनुमति दी जा सकती है। अदालत ने यह भी बताया कि ऐसे मामलों में human dignity सबसे पहले ध्यान में रखा जाना चाहिए।
Ghaziabad Harish Rana Case: हादसे ने पूरी जिंदगी बदल दी
हरीश राणा की जिंदगी साल 2013 में हुए एक हादसे के बाद पूरी तरह बदल गई। वह घर की चौथी मंजिल से गिर गए थे, जिससे सिर में गंभीर चोट आई। इसके बाद वह vegetative state में चले गए और पिछले 12 साल से बिस्तर पर ही हैं। उन्हें तरल भोजन और डॉक्टरों की निगरानी में देखभाल मिलती रही।
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Ghaziabad Harish Rana Case: मेडिकल रिपोर्ट में न मिली कोई उम्मीद
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाने से पहले दो मेडिकल बोर्डों की रिपोर्टों का अध्ययन किया। डॉक्टरों ने हरीश की स्थिति का पूरा मूल्यांकन किया और कहा कि ठीक होने की संभावना लगभग खत्म हो चुकी है। अदालत ने इस आधार पर life support हटाने की अनुमति दी और कहा कि प्रक्रिया संवेदनशील और सुरक्षित होनी चाहिए।
Ghaziabad Harish Rana Case: 2018 के फैसले का आधार
अदालत ने अपने आदेश में 2018 के Common Cause Case का भी उल्लेख किया। उस फैसले में पहली बार Right to Die with Dignity को कानूनी मान्यता मिली थी। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गंभीर हालत वाले मरीजों के मामलों में निर्णय लेते समय डॉक्टरों की राय और परिवार की इच्छाओं का पूरा ध्यान रखा जा सकता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया पूरी तरह मानवीय और सुरक्षित होनी चाहिए, ताकि मरीज की गरिमा बनी रहे।
Ghaziabad Harish Rana Case: इलाज धीरे-धीरे और सुरक्षित तरीके से बंद किया जाएगा
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि हरीश राणा का इलाज धीरे-धीरे बंद किया जाए। उन्हें AIIMS दिल्ली में palliative care में रखा जाएगा, ताकि उनकी देखभाल पूरी संवेदनशीलता और सुरक्षा के साथ की जा सके। डॉक्टरों को आदेश दिया गया है कि किसी भी तरह की अनावश्यक तकलीफ न हो और मरीज की गरिमा का पूरा ध्यान रखा जाए। यह प्रक्रिया पूरी तरह मानवीय तरीके से होगी, ताकि हरीश को सम्मान और आराम के साथ जीवन से विदा किया जा सके।
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