Ayatollah Ali Khamenei Funeral: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव के बीच ईरान से एक ऐसी खबर सामने आ रही है जिसने पूरी दुनिया के विशेषज्ञों को चौंका दिया है। ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका-इजरायल के संयुक्त एयरस्ट्राइक में मौत हुए करीब 50 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक उनका अंतिम संस्कार नहीं किया जा सका है। 28 फरवरी को हुई इस घटना के बाद से ही तेहरान में सन्नाटा पसरा है। हालांकि वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच एक नाजुक सीजफायर लागू है, लेकिन खामेनेई को दफनाने की जगह और तारीख को लेकर ईरान सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
मीडिया रिपोर्ट्स और रणनीतिक विशेषज्ञों का दावा है कि ईरान सरकार एक बड़े सार्वजनिक अंतिम संस्कार को आयोजित करने से बहुत डरी हुई है। सरकार को डर है कि यदि लाखों लोग सड़कों पर उतरे, तो युद्धग्रस्त स्थिति में देश के भीतर भारी अशांति फैल सकती है, जिसका फायदा इजरायल या आंतरिक विद्रोही गुट उठा सकते हैं। यह देरी ईरान की प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी कमजोरी को दुनिया के सामने उजागर कर रही है। तेहरान अभी तक यह तय नहीं कर पाया है कि खामेनेई को मशहद में दफनाया जाए या राजधानी तेहरान में, क्योंकि किसी भी बड़े जमावड़े पर दुश्मन देश की मिसाइलों का खतरा मंडरा रहा है। (Ayatollah Ali Khamenei Funeral)
1989 की यादें और वर्तमान का डर
साल 1989 में जब ईरान के पहले अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी का निधन हुआ था, तब तेहरान की सड़कों पर लाखों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। वह ईरान की ताकत का प्रदर्शन था। लेकिन आज स्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के विशेषज्ञ बेहनाम तालेब्लू का कहना है कि सरकार अब ‘पासा फेंकने’ की स्थिति में नहीं है। युद्ध एक अनिश्चित सीजफायर के बीच अटका है, जो आने वाले बुधवार को समाप्त हो सकता है। ऐसे में किसी भी बड़ी शोक सभा को सुरक्षा देना ईरान के लिए मुमकिन नहीं लग रहा है। (Ayatollah Ali Khamenei Funeral)

सिक्योरिटी चीफ की हत्या और नेतृत्व का संकट
ईरान की चिंता केवल खामेनेई तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ हफ्तों के दौरान अमेरिका और इजरायली हमलों में देश के सिक्योरिटी चीफ अली लारीजानी समेत कई वरिष्ठ सैन्य और सुरक्षा अधिकारी मारे गए हैं। सुरक्षा ढांचे में लगी इस सेंध ने ईरान के भीतर अविश्वास का माहौल पैदा कर दिया है। सरकार को डर है कि अंतिम संस्कार के दौरान यदि नेतृत्व एक ही स्थान पर जमा हुआ, तो दुश्मन एक और बड़ा हमला कर सकता है। (Ayatollah Ali Khamenei Funeral)
इंटरनेट ब्लैकआउट और सच छुपाने की कोशिश
ईरान में पिछले 50 दिनों से जारी ‘इंटरनेट ब्लैकआउट’ इस डर को और पुख्ता करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को डर है कि खामेनेई की मौत के बाद उपजे जनाक्रोश या देश की बदहाली की तस्वीरें अगर बाहर आईं, तो इसके गंभीर नतीजे होंगे। इस्लामिक रिपब्लिक जो अक्सर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर भीड़ जुटाने की बातें करता था, आज वह अपनी ही जनता और दुश्मन के डर से चुपचाप बैठा है। (Ayatollah Ali Khamenei Funeral)
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कहां दी जाएगी अंतिम विदाई?
शुरुआती खबरों में IRGC से जुड़ी ‘फार्स न्यूज’ ने बताया था कि खामेनेई को उनके गृहनगर मशहद में दफनाया जाएगा। तेहरान के इमाम खुमैनी प्रार्थना स्थल पर तीन दिन के विदाई समारोह की योजना भी बनाई गई थी, लेकिन हकीकत में ऐसी कोई श्रद्धांजलि सभा आयोजित नहीं हुई। पांच मिलियन की आबादी वाला मशहद शहर आज भी अपने नेता की देह का इंतजार कर रहा है, जबकि तेहरान में प्रशासनिक सन्नाटा बरकरार है। (Ayatollah Ali Khamenei Funeral)
ट्रंप की चेतावनी और सीजफायर का संकट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि यदि बुधवार तक कोई ठोस समझौता नहीं हुआ, तो ईरान के साथ युद्ध फिर से शुरू हो सकता है। वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका के दबाव के आगे झुकने से इनकार करते हुए अपने ‘परमाणु अधिकारों’ पर जोर दिया है। इस कूटनीतिक और सैन्य रस्साकशी के बीच खामेनेई का शव ईरान के लिए एक बड़ा राजनीतिक और सुरक्षा बोझ बन गया है। (Ayatollah Ali Khamenei Funeral)
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