भूमिका
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद भी खतरा पूरी तरह टला नहीं है। सेना और राहत दल लगातार मलबे में दबी जिंदगियों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं, वहीं भोटे कोशी नदी में जलस्तर बढ़ने की सूचना ने चिंता और बढ़ा दी है।
मृतकों का आंकड़ा 675 के पार
इस भीषण आपदा में अब तक 675 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2500 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें 320 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। मलबे से पटे इलाकों और अपनों की तलाश में बिलखते परिवारों की तस्वीरें इस त्रासदी की भयावहता को दर्शा रही हैं।
भोटे कोशी नदी को लेकर नई चेतावनी
रसुवा जिला पुलिस कार्यालय के अनुसार भोटे कोशी नदी में पानी का बहाव फिर तेज होने की सूचना मिली है, जबकि नुवाकोट में भी बाढ़ का स्तर कुछ बढ़ा है। नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने आधिकारिक चेतावनी जारी करते हुए रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग के नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने का अनुरोध किया है। त्रिशूली और भोटेकोशी जैसी प्रमुख नदियों के आसपास स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है।
बचाव कार्यों में आ रही बड़ी चुनौतियां
कई सड़कें और पुल बह जाने से राहत कार्यों में भारी दिक्कतें आ रही हैं। सुरंगों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचना बचाव दलों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसके बावजूद प्रशासन लगातार प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटा है।
भारत से मिल रही राहत सामग्री
भारत ने भी नेपाल की मदद के लिए राहत अभियान तेज कर दिया है। नेपाल में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव के अनुसार भारत से चौथी राहत उड़ान काठमांडू पहुंच चुकी है, जिसमें कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट सहित करीब 11 टन सामग्री शामिल थी। इस उड़ान के जरिए सुरंगों में खोज और बचाव अभियान के लिए जरूरी उपकरण और तकनीकी टीम भी भेजी गई है।
जिलावार मृतकों की संख्या
बाढ़ के कारण सबसे ज्यादा तबाही चितवन जिले में हुई है, जहां 233 लोगों की जान गई। इसके बाद नवलपरासी (पूर्व) में 158, गोरखा में 48, नवलपरासी (पश्चिम) में 47, धाडिंग में 45, नुवाकोट में 41, तनहुन में 31 और रसुवा में 13 लोगों की मौत दर्ज की गई है।
निष्कर्ष
नेपाल में बाढ़ की यह त्रासदी अभी पूरी तरह थमी नहीं है। भोटे कोशी नदी में बढ़ता जलस्तर आने वाले दिनों में और चुनौतियां खड़ी कर सकता है। ऐसे में प्रशासन और राहत एजेंसियों की सतर्कता तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग इस आपदा से निपटने में अहम भूमिका निभा रहा है।


