Paithani Rahu Temple: देवभूमि उत्तराखंड का पौड़ी गढ़वाल जिला न केवल प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से खास माना जाता है, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए भी इसकी अलग पहचान है। यहां तारकेश्वर महादेव, नीलकंठ महादेव, मां धारी देवी, ज्वाल्पा देवी, कंडोलिया बाबा और सिद्धबली जैसे प्रसिद्ध मंदिर पहले से ही श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र रहे हैं। अब इसी कड़ी में थलीसैंण विकासखंड के पैठाणी गांव में स्थित राहु मंदिर तेजी से धार्मिक पर्यटन का नया आकर्षण बनकर उभर रहा है।
Paithani Rahu Temple के सौंदर्यीकरण की शुरुआत, 1.90 करोड़ की योजना
Paithani Rahu Temple के विकास और सौंदर्यीकरण कार्यों का विधिवत शुभारंभ हो गया है। क्षेत्रीय विधायक एवं कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने भूमि पूजन कर लगभग 1 करोड़ 90 लाख रुपये की लागत से प्रस्तावित योजना की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र को तीर्थाटन और पर्यटन के मानचित्र पर और मजबूत करने के लिए सुनियोजित पर्यटन सर्किट विकसित किया जा रहा है, जिसमें पैठाणी राहु मंदिर की अहम भूमिका होगी।
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पर्यटन से जुड़ेगा क्षेत्र का विकास और रोजगार
कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि मंदिर तक पहुंच को आसान बनाने के लिए धर्मशाला मार्ग का निर्माण कार्य पहले से ही प्रगति पर है। आने वाले दो वर्षों में क्षेत्र में कई विकास योजनाओं को धरातल पर उतारा जाएगा। इससे न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। उनका कहना है कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देकर पहाड़ी क्षेत्रों की आर्थिकी को मजबूत किया जा सकता है।
उत्तर भारत का विशिष्ट Paithani Rahu Temple
Paithani Rahu Temple अपनी विशिष्टता के कारण देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। मान्यता है कि यह मंदिर भारत में राहु देव को समर्पित दूसरा प्रमुख मंदिर है, जबकि उत्तर भारत में यह अपनी तरह का एकमात्र मंदिर माना जाता है। यही कारण है कि अब उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु यहां राहु दोष की शांति के लिए पहुंच रहे हैं। Paithani Rahu Temple समिति के अनुसार, बीते कुछ वर्षों में यहां आने वाले भक्तों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।
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राहु दोष से मुक्ति की गहरी आस्था
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली में राहु दोष होने पर व्यक्ति को मानसिक तनाव, आर्थिक अस्थिरता, पारिवारिक विवाद और कार्यों में बार-बार बाधाओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में Paithani Rahu Temple श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा सहारा बनकर सामने आया है। लोगों का विश्वास है कि यहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना और शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से राहु दोष शांत होता है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
शिव और राहु का अद्भुत संगम
Paithani Rahu Temple की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां राहु देव के साथ भगवान शिव भी विराजमान हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान शिव की कृपा से राहु देव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। मंदिर में अखंड ज्योति वर्षभर प्रज्ज्वलित रहती है, जिसे आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। शांत वातावरण, घने जंगल और पहाड़ों के बीच स्थित यह मंदिर भक्तों को मानसिक शांति प्रदान करता है।
पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा है इतिहास
पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान राहु ने छल से अमृत ग्रहण किया था। यह देखकर भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उनका सिर धड़ से अलग कर दिया। मान्यता है कि राहु का सिर इसी क्षेत्र में गिरा, जिससे यह स्थान विशेष रूप से प्रभावशाली बन गया। बाद में आदि गुरु शंकराचार्य ने इस क्षेत्र में भगवान शिव और राहु का मंदिर स्थापित कराया, जिससे इसकी धार्मिक महत्ता और बढ़ गई।
आधुनिक सुविधाओं से होगा मंदिर का विस्तार
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर परिसर में धर्मशाला, पार्किंग और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास की योजना बनाई गई है। सौंदर्यीकरण के बाद यह Paithani Rahu Temple न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी पौड़ी गढ़वाल को नई पहचान देगा।
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दक्षिण भारत से भी जुड़ता है राहु मंदिर का महत्व
दक्षिण भारत के तमिलनाडु में स्थित थिरुनागेश्वरम राहु मंदिर की तरह पैठाणी का यह मंदिर भी राहु दोष निवारण के लिए विशेष माना जाता है। दोनों स्थानों की मान्यताओं ने राहु देव से जुड़ी आस्था को देशभर में मजबूत किया है। आज पैठाणी गांव आध्यात्मिक शांति, प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक विश्वास का संगम बनकर श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।



