PM Modi Economic Appeal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 24 घंटों में दो बार देश के नाम संदेश देते हुए एक ऐसी अपील की है, जिसने आर्थिक विशेषज्ञों और आम जनता के बीच बड़ी चर्चा छेड़ दी है। पीएम मोदी ने देशवासियों से अगले एक साल तक सोना (Gold) न खरीदने और ईंधन व अन्य संसाधनों का बेहद किफायती इस्तेमाल करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही, उन्होंने स्कूलों को ‘ऑनलाइन क्लास’ और दफ्तरों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) मोड पर लौटने की सलाह दी है। यह अपील ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल हो गई है और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़’ में बढ़ते तनाव ने वैश्विक आर्थिक मंदी की आशंका को गहरा कर दिया है। (PM Modi Economic Appeal)
दरअसल, प्रधानमंत्री की इस असाधारण अपील के पीछे भारत की डगमगाती आर्थिक स्थिति और डॉलर के मुकाबले रुपये की रिकॉर्ड गिरावट है। भारत सरकार इस समय डॉलर बचाने की जद्दोजहद में जुटी है ताकि देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे भारी दबाव को कम किया जा सके। कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग और सोने के भारी आयात ने अर्थव्यवस्था के सामने एक बड़ी दीवार खड़ी कर दी है। पीएम मोदी का यह कदम एक एहतियाती ‘इकोनॉमिक शील्ड’ के तौर पर देखा जा रहा है, ताकि आने वाले समय में भारत को किसी बड़े वित्तीय झटके से बचाया जा सके। (PM Modi Economic Appeal)
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रुपये की ऐतिहासिक गिरावट और डॉलर का दबाव
पीएम मोदी की चिंता का सबसे बड़ा कारण डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की गिरती साख है। वर्तमान में रुपया लुढ़ककर 95 प्रति डॉलर के खतरनाक स्तर तक पहुँच गया है। जब रुपया कमजोर होता है, तो भारत को आयात की जाने वाली हर वस्तु (खासकर तेल और सोना) के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। यही वजह है कि सरकार चाहती है कि आम नागरिक ऐसी चीजों की मांग कम कर दें जिनका भुगतान अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में करना पड़ता है। (PM Modi Economic Appeal)
कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग
वैश्विक तनाव का सीधा असर भारत की जेब पर पड़ा है। कुछ समय पहले तक कच्चा तेल 71 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, लेकिन युद्ध जैसी स्थितियों के कारण अब यह 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। ईंधन बचाने के लिए ही पीएम मोदी ने ‘कार पूलिंग’ और ‘वर्क फ्रॉम होम’ जैसे विकल्पों पर जोर दिया है, ताकि देश के भीतर ईंधन की खपत कम हो और सरकारी खजाने से डॉलर कम बाहर जाए। (PM Modi Economic Appeal)
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विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) में सेंध
भारत का गौरव माना जाने वाला विदेशी मुद्रा भंडार अब 700 अरब डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया है। सोने और तेल के आयात पर भारी खर्च के कारण फॉरेक्स रिजर्व में लगातार गिरावट आ रही है। यदि भंडार इसी तरह खाली होता रहा, तो देश के सामने आवश्यक वस्तुओं के आयात का संकट खड़ा हो सकता है। इसीलिए ‘सोना न खरीदने’ की अपील सीधे तौर पर फॉरेक्स रिजर्व को सुरक्षित रखने की एक कोशिश है। (PM Modi Economic Appeal)
अर्थव्यवस्था की रैंकिंग और निवेशकों का पलायन
युद्ध और वैश्विक अस्थिरता से पहले भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर था, लेकिन ताजा आंकड़ों के मुताबिक अब इसके छठे स्थान पर खिसकने की आशंका जताई जा रही है। पिछले पांच महीनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से करीब 2 लाख करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। निवेशकों का यह घटता भरोसा सरकार के लिए बड़ी चुनौती है, जिसे संभालने के लिए कड़े आर्थिक सुधारों और जनता के सहयोग की जरूरत है। (PM Modi Economic Appeal)
LPG संकट और आपूर्ति की चुनौतियां
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में तनाव का असर रसोई तक भी पहुँच रहा है। युद्ध के हालातों के चलते LPG के आयात में करीब 50% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। संसाधनों की यह कमी भविष्य में महंगाई और किल्लत पैदा कर सकती है। प्रधानमंत्री ने इसीलिए संसाधनों के विवेकपूर्ण इस्तेमाल की बात कही है ताकि आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पर बोझ कम किया जा सके। (PM Modi Economic Appeal)
संकट काल में जन-भागीदारी की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह अपील साफ संकेत देती है कि आने वाला समय आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। सोना, ईंधन और विदेशी यात्राओं में कटौती कर देश के नागरिक सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने में योगदान दे सकते हैं। सरकार की कोशिश है कि डॉलर की बचत कर रुपये को मजबूती दी जाए और भारत को वैश्विक संकट के भंवर से सुरक्षित निकाला जा सके। (PM Modi Economic Appeal)
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