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Lokhitkranti > अंतर्राष्ट्रीय > US Iran Conflict 2026: ट्रंप का ‘सिचुएशन रूम’ से आदेश, ईरान का शांति प्रस्ताव खारिज, अब आर-पार की जंग?
अंतर्राष्ट्रीय

US Iran Conflict 2026: ट्रंप का ‘सिचुएशन रूम’ से आदेश, ईरान का शांति प्रस्ताव खारिज, अब आर-पार की जंग?

Rupam
Last updated: 2026-04-28 9:51 अपराह्न
Rupam Published 2026-04-28
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US Iran Conflict 2026
US Iran Conflict 2026: ट्रंप का 'सिचुएशन रूम' से आदेश, ईरान का शांति प्रस्ताव खारिज, अब आर-पार की जंग?
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US Iran Conflict: दुनिया की दो महाशक्तियों, अमेरिका और ईरान के बीच जारी ‘कोल्ड वॉर’ अब किसी भी वक्त एक भीषण सैन्य संघर्ष में तब्दील हो सकता है। न्यूयॉर्क टाइम्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच सीजफायर के बावजूद कूटनीतिक गलियारों में बारूद जैसी गंध है। अमेरिका की स्पष्ट रणनीति है कि किसी भी बातचीत की शुरुआत ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बंद करने से होनी चाहिए, लेकिन ईरान अपनी ‘परमाणु जिद’ पर अड़ा हुआ है। जुबानी जंग और धमकियों के इस दौर में एक दिन समझौते की धुंधली उम्मीद दिखती है, तो अगले ही पल युद्ध के नगाड़े बजने लगते हैं।

Contents
ईरान का प्रस्ताव और ट्रंप का कड़ा रुखसमझौते की सबसे बड़ी ‘रेडलाइन’तेल के कुएं बंद होने की कगार परअनाज का संकट और बेतहाशा महंगाईईरान का पलटवार

हाल ही में ईरान ने शांति की दिशा में एक तीन चरणों वाला प्रस्ताव पेश किया था, जिस पर राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस के ‘सिचुएशन रूम’ में उच्च स्तरीय बैठक की। सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही ट्रंप ने ईरान की शर्तें सुनीं, वे भड़क गए और प्रस्ताव को तत्काल प्रभाव से खारिज कर दिया। अमेरिका का मानना है कि ईरान शांति की आड़ में केवल परमाणु शस्त्रागार भरने के लिए वक्त मांग रहा है। इस खींचतान ने न केवल पश्चिम एशिया, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी संकट में डाल दिया है। (US Iran Conflict)

ईरान का प्रस्ताव और ट्रंप का कड़ा रुख

ईरान ने बातचीत की मेज पर आने के लिए पहली शर्त यह रखी थी कि अमेरिका उसकी आर्थिक नाकाबंदी (Blockade) को तुरंत खत्म करे। ईरान का तर्क था कि यदि नाकाबंदी हटती है, तो वह सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए पहले की तरह खोल देगा। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने इसे ईरान की चाल करार दिया है। ट्रंप का मानना है कि परमाणु कार्यक्रम को सुलझाए बिना होर्मुज खोलने से अमेरिकी पक्ष कमजोर हो जाएगा और ईरान को अपनी अवैध महत्वाकांक्षाएं पूरी करने का मौका मिल जाएगा। (US Iran Conflict)

समझौते की सबसे बड़ी ‘रेडलाइन’

असली विवाद संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को लेकर है। अमेरिका चाहता है कि परमाणु निशस्त्रीकरण बातचीत का शुरुआती हिस्सा हो, जबकि ईरान इसे चर्चा से बाहर रखना चाहता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ईरान के इरादों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा, ‘होर्मुज स्ट्रेट एक तरह से आर्थिक परमाणु हथियार है जिसका इस्तेमाल ईरान दुनिया के खिलाफ करने की कोशिश कर रहा है. वे दुनिया की ऊर्जा को बंधक बनाने का दावा कर रहे हैं. सोचिए अगर उन्हीं लोगों के पास परमाणु हथियार होता तो क्या होता.’ (US Iran Conflict)

read also: OPEC से यूएई का ‘तलाक’! 60 साल पुराना रिश्ता टूटा, क्या अब दुनिया में मचेगा तेल का हाहाकार?

तेल के कुएं बंद होने की कगार पर

अमेरिका द्वारा की गई नाकाबंदी अब ईरान के लिए गले की हड्डी बन गई है। पिछले 15 दिनों से जारी इस आर्थिक घेराबंदी के कारण ईरानी बंदरगाहों से न तो तेल टैंकर निकल पा रहे हैं और न ही जरूरी सामान पहुंच पा रहा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट एक भयावह चेतावनी दे रही है— यदि यह नाकाबंदी अगले 13 दिन और जारी रही, तो ईरान को अपने तेल के कुएं स्थायी रूप से बंद करने पड़ सकते हैं। एक बार 72 घंटों से ज्यादा कुएं बंद हुए, तो उन्हें दोबारा शुरू करने में महीनों लग जाएंगे, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो सकती है। (US Iran Conflict)

अनाज का संकट और बेतहाशा महंगाई

नाकाबंदी का असर केवल तेल पर ही नहीं, बल्कि आम ईरानी नागरिक की थाली पर भी पड़ रहा है। देश में अनाज और जरूरी सामानों की आपूर्ति बाधित हो गई है, जिससे कीमतों में बेतहाशा वृद्धि की आशंका है। अमेरिका ने इस तरह घेराबंदी की है कि चीन और रूस से भी मदद पहुंचना मुश्किल नजर आ रहा है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी प्रतिनिधि माइक वाल्त्ज़ ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान को ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का कोई अधिकार नहीं है। (US Iran Conflict)

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ईरान का पलटवार

दूसरी ओर, ईरान के भीतर भी कट्टरपंथियों के सुर तेज हो गए हैं। ईरानी राजनेता महमूद नबावियन ने सख्त लहजे में कहा, ‘बातचीत व्यर्थ है हमें अमेरिका को नीचा दिखाना होगा. हमने एक ग्राम भी उच्च-संवर्धित यूरेनियम हटाने पर सहमति नहीं दी. ईरान को अपने शस्त्रागार को फिर से भरने के लिए युद्धविराम की आवश्यकता थी.’ एनपीटी समीक्षा सम्मेलन के अध्यक्ष डो हंग वियत ने भी चिंता जताई है कि प्रमुख शक्तियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन और देशों के बीच बढ़ता अविश्वास स्थिति को परमाणु युद्ध की ओर धकेल रहा है। (US Iran Conflict)

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