Lucknow Census Duty Negligence: लखनऊ में जनगणना-2027 का काम केवल सरकारी औपचारिकता बनकर नहीं रह जाएगा। ड्यूटी मिलने के बावजूद मैदान से गायब रहने वाले कर्मचारियों पर नगर निगम ने अब कार्रवाई का चाबुक चलाने की तैयारी कर ली है। नगर निगम प्रशासन ने अनुपस्थित कर्मचारियों की सूची संबंधित पुलिस थानों को भेजते हुए एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। Lucknow Census Duty Negligence के इस मामले ने कई सरकारी विभागों के कर्मचारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशिक्षण मिला, सामग्री मिली… फिर भी ड्यूटी से दूरी
नगर निगम के अनुसार, जनगणना कार्य में लगाए गए कर्मचारियों को पहले ही प्रशिक्षण दिया जा चुका था। उन्हें नियुक्ति से जुड़ी सामग्री, स्टेशनरी और जरूरी दिशा-निर्देश भी उपलब्ध कराए गए थे। इसके बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारी निर्धारित स्थानों पर नहीं पहुंचे। कुछ कर्मचारी तो सामग्री लेने तक नहीं आए। Lucknow Census Duty Negligence को लेकर प्रशासन का कहना है कि अब केवल नोटिस जारी करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जिम्मेदारी तय करते हुए कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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कई विभागों के कर्मचारी जनगणना कार्य में तैनात
नगर निगम के सभी आठ जोनों में अलग-अलग सरकारी विभागों के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। इनमें बेसिक शिक्षा विभाग, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग, पंचायत विभाग और मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय सहित कई विभागों के कर्मचारी शामिल हैं। जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के अभियान में विभिन्न विभागों की भागीदारी इसलिए सुनिश्चित की गई थी, ताकि प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक घर तक समयबद्ध तरीके से पहुंचा जा सके।
लेकिन Lucknow Census Duty Negligence का मामला सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन को आशंका है कि कर्मचारियों की अनुपस्थिति से सर्वेक्षण की गति और आंकड़ों की शुद्धता प्रभावित हो सकती है।
हजरतगंज से आशियाना तक भेजी गईं सूचियां
नगर निगम की ओर से अलग-अलग जोनों के अनुपस्थित कर्मचारियों की सूची संबंधित थानों को भेजी गई है। जोन-1 से जुड़े 69 कर्मचारियों की सूची हजरतगंज थाने भेजे जाने की बात सामने आई है। जोन-7 में 62 कर्मचारी नियुक्ति सामग्री और स्टेशनरी लेने के लिए भी नहीं पहुंचे। इनमें कई कर्मचारियों के मोबाइल बंद मिले, जबकि कुछ के संपर्क नंबर गलत बताए गए। इनके खिलाफ गाजीपुर थाने में तहरीर भेजी गई है।
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इसी तरह जोन-3 से संबंधित कर्मचारियों की सूची अलीगंज थाने, जोन-6 की सूची ठाकुरगंज थाने और जोन-8 की सूची आशियाना थाने भेजी गई है। Lucknow Census Duty Negligence पर कार्रवाई के लिए पूरा विवरण लखनऊ जिलाधिकारी को भी सौंपा गया है।
हालांकि उपलब्ध आंकड़ों में कर्मचारियों की कुल संख्या को लेकर अंतर दिखाई देता है। रिपोर्ट में कुल 435 कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की बात कही गई है, जबकि जोनवार उल्लिखित संख्याओं का योग इससे अधिक बनता है। एक अन्य प्रकाशित रिपोर्ट में अनुपस्थित कर्मचारियों की संख्या 615 बताई गई है। ऐसे में अंतिम संख्या की पुष्टि नगर निगम या जिलाधिकारी कार्यालय की आधिकारिक सूची से होना बाकी है।
जनगणना ड्यूटी सामान्य सरकारी काम नहीं
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के लिए नियुक्त कर्मचारी केवल अपने मूल विभाग के कर्मचारी नहीं रह जाते, बल्कि जनगणना से संबंधित जिम्मेदारी निभाते समय कानून के तहत उनकी अलग जवाबदेही तय होती है। जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 4 जनगणना कर्मचारियों की नियुक्ति से संबंधित है, जबकि धारा 11 कर्तव्य से इनकार, आदेश की अवहेलना या उचित परिश्रम नहीं बरतने पर दंड का प्रावधान करती है। Lucknow Census Duty Negligence के मामले में प्रशासन इसी कानूनी आधार पर संबंधित कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने की तैयारी कर रहा है।
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मोबाइल बंद और नंबर गलत मिलने से बढ़ी सख्ती
कार्रवाई का सबसे गंभीर पहलू यह है कि कुछ कर्मचारी केवल ड्यूटी पर अनुपस्थित नहीं मिले, बल्कि उनसे संपर्क करना भी संभव नहीं हो सका। कई मोबाइल फोन बंद पाए गए और कुछ कर्मचारियों के दर्ज नंबर गलत निकले। इससे विभागीय समन्वय और कर्मचारी विवरणों की सत्यता पर भी प्रश्न उठ रहे हैं।
नगर निगम अधिकारियों का मानना है कि यदि कोई कर्मचारी वास्तविक कारण से अनुपस्थित है, तो उसे संबंधित अधिकारी को समय रहते सूचना देनी चाहिए थी। बिना जानकारी दिए गायब रहना Lucknow Census Duty Negligence की श्रेणी में माना जा सकता है।
एक हजार रुपये जुर्माना, तीन साल तक सजा का प्रावधान
जनगणना अधिनियम की धारा 11 के अनुसार, जनगणना अधिकारी या सहायता के लिए विधिवत नियुक्त व्यक्ति द्वारा ड्यूटी से इनकार करने, उचित परिश्रम नहीं बरतने या आदेश की अवहेलना करने पर जुर्माना लगाया जा सकता है। कुछ श्रेणियों के अपराधों में एक हजार रुपये तक जुर्माने के साथ तीन वर्ष तक कारावास का प्रावधान भी है।
हालांकि अंतिम दंड आरोप सिद्ध होने पर, सक्षम अधिकारी की शिकायत और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। केवल सूची में नाम आने से किसी कर्मचारी को स्वतः दोषी नहीं माना जाएगा।
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डीएम को भेजी गई रिपोर्ट, विभागीय कार्रवाई भी संभव
नगर निगम ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि अनुपस्थित कर्मचारियों को तत्काल जनगणना कार्य में शामिल कराया जाए। निर्धारित समय में ड्यूटी पर वापस नहीं लौटने वालों की रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जाएगी। इसके बाद उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई, वेतन संबंधी कार्रवाई या अन्य दंडात्मक संस्तुति की जा सकती है।
Lucknow Census Duty Negligence पर प्रशासन का यह रुख दूसरे कर्मचारियों के लिए भी स्पष्ट संदेश है कि राष्ट्रीय अभियान में लापरवाही को सामान्य अनुपस्थिति मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
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समय पर सर्वे पूरा करना बड़ी चुनौती
लखनऊ जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, जनगणना-2027 के प्रथम चरण में हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस का कार्य 22 मई से 20 जून 2026 तक निर्धारित किया गया है। ऐसे में कर्मचारियों की अनुपस्थिति अभियान के तय कार्यक्रम को प्रभावित कर सकती है।
अब निगाह इस बात पर है कि थानों में भेजी गई तहरीरों पर कितनी एफआईआर दर्ज होती हैं और कितने कर्मचारी कार्रवाई से पहले ड्यूटी पर लौटते हैं। फिलहाल नगर निगम ने साफ कर दिया है कि Lucknow Census Duty Negligence में बहाने नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और जवाबदेही ही तय की जाएगी।
जनगणना-2027 की आधिकारिक अधिसूचना, प्रशिक्षण सामग्री, सेल्फ एन्यूमरेशन और चरणवार कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी के लिए पाठक भारत के जनगणना आयुक्त की आधिकारिक वेबसाइट और लखनऊ जिला प्रशासन के Census 2027 पोर्टल पर जा सकते हैं। लखनऊ में पहले चरण का हाउस लिस्टिंग एवं हाउसिंग सेंसस कार्य 22 मई से 20 जून 2026 तक निर्धारित है




