Eid al-Adha 2025 : देशभर में 7 जून को बकरीद का पर्व मनाया जाएगा, जब बड़ी संख्या में बकरों की कुर्बानी दी जाती है। इस बीच उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के अमीनगर सराय कस्बे में एक अनोखी पहल सुर्खियों में है। यहां जैन समाज द्वारा संचालित ‘बकराशाला’ में सैकड़ों बकरों को कुर्बानी से बचाकर उन्हें नया जीवन दिया जा रहा है।
Eid al-Adha 2025 : जैन संत की प्रेरणा से हुई शुरुआत
‘जीव दया संस्थान’ नाम की यह संस्था जैन संत राजश्री राजेंद्र मुनि की प्रेरणा से 10 साल पहले शुरू की गई थी। संस्था के सदस्य दिनेश जैन ने बताया कि अब तक 2000 से अधिक बकरों को कुर्बानी से बचाया जा चुका है। उन्होंने बताया कि हम देशभर के कोनों से मंडियों में जाकर बकरों को दोगुनी कीमत पर खरीद लाते हैं, ताकि उनकी जान बचाई जा सके। कीमत मायने नहीं रखती, बकरे की जान बचनी चाहिए।
Eid al-Adha 2025 : बच्चों की तरह पाले जाते है बकरे
बकराशाला के प्रबंधक सचिन जैन ने बताया कि यहां 650 से अधिक बकरों को बच्चों की तरह पाला जाता है। उनके लिए खास खान-पान, स्वास्थ्य देखभाल और साफ-सफाई की व्यवस्था की गई है। बकरों को रोज सुबह नहलाया जाता है और डेटॉल से उनका मुंह साफ किया जाता है। इनके लिए डॉक्टर और कर्मचारियों की 24 घंटे सेवा उपलब्ध रहती है। बकराशाला की शुरुआत एक 800 गज की जमीन से हुई थी, जो अब 5000 वर्ग फुट तक फैला चुकी है। संस्था को देशभर से दानदाताओं का समर्थन मिलता है। एक बकरे की सेवा और संरक्षण के लिए सहयोग राशि ₹11,000 निर्धारित की गई है।
Eid al-Adha 2025 : ईद से पहले सक्रिय होती है टीम
सचिन जैन ने बताया कि ईद से एक हफ्ते पहले मेरठ, बड़ौत और दिल्ली की मंडियों में जाकर टीम सक्रिय हो जाती है। कुर्बानी के लिए लाए जा रहे बकरों को पहचान कर उन्हें तुरंत दोगुने दाम देकर खरीद लिया जाता है। बकरों के लिए राजस्थान के झुंझुनूं से खास चारा मंगाया जाता है। वहीं, कुछ स्थानीय लोगों को हायर कर बकरों को खेतों में चराने भी ले जाया जाता है। आपको बता दें कि इस अनोखी पहल ने ‘बकराशाला’ को न सिर्फ बागपत में बल्कि देशभर में चर्चा का विषय बना दिया है। गौशालाओं की तरह बकरों के लिए यह शरणस्थली जैन समाज की अहिंसा और करुणा की भावना को दर्शाती है।



