Baramati Airport Safety: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन ने न सिर्फ राज्य की राजनीति को झकझोर दिया है, बल्कि बारामती एयरपोर्ट की सुरक्षा (Baramati Airport Safety) और संचालन व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुणे से करीब 95 किलोमीटर दूर स्थित इस एयरपोर्ट पर हुए विमान हादसे में अजित पवार समेत पांच लोगों की मौत हो गई। इसके बाद यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि जहां VVIP विमानों की नियमित लैंडिंग होती है, वहां बुनियादी एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी कैसे रह गई? खुद DGCA ने माना है कि बारामती एक अनियंत्रित (Uncontrolled) हवाई अड्डा है, जो एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के दायरे में भी नहीं आता। ऐसे में यह एयरपोर्ट आखिर किसके भरोसे संचालित हो रहा था?
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बारामती एयरपोर्ट: कहां है और कैसे चलता है?
बारामती एयरपोर्ट (Baramati Airport Safety) पुणे जिले में स्थित है और इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से फ्लाइंग ट्रेनिंग और चार्टर विमानों के लिए किया जाता है। महाराष्ट्र एयरपोर्ट्स डेवलपमेंट कंपनी (MADC) के अनुसार, यह राज्य के 15 बिना लाइसेंस वाले घरेलू एयरपोर्ट्स में से एक है।
इस एयरपोर्ट की जमीन महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MIDC) के अधीन है और इसका संचालन बारामती एयरपोर्ट लिमिटेड (BAL) द्वारा किया जाता है। यहां मौजूद रनवे करीब 7710 फीट लंबा है, जिसे 1990 के दशक में बनाया गया था और यह करीब 450 एकड़ क्षेत्र में फैला है।
हर महीने नेताओं की चार्टर फ्लाइट, फिर भी सीमित सुविधाएं
एयरफील्ड मैनेजर शिवाजी तवारे के मुताबिक, हर महीने यहां 6 से 7 चार्टर फ्लाइट्स उतरती हैं, जिनमें से ज्यादातर राजनीतिक नेताओं की होती हैं। बावजूद इसके, एयरपोर्ट की टर्मिनल बिल्डिंग में सिर्फ दो केबिन और एक कमरा है। हादसे के दिन एयरपोर्ट (Baramati Airport Safety) पर अधिकारियों से ज्यादा मीडियाकर्मी मौजूद थे। पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा और दिनभर मंत्री व वरिष्ठ अधिकारी दुर्घटनास्थल का दौरा करते रहे।

ट्रेनिंग एयरफील्ड और बेसिक ATC सिस्टम
बारामती एयरपोर्ट परिसर में दो फ्लाइट ट्रेनिंग एकेडमी संचालित हैं-
- रेडबर्ड फ्लाइट ट्रेनिंग एकेडमी
- एकेडमी ऑफ कार्वर एविएशन प्राइवेट लिमिटेड
इस एयरफील्ड का उपयोग मुख्य रूप से ट्रेनिंग के लिए होता है। यहां कोई फुल-फ्लेज्ड एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम नहीं है। DGCA के अनुसार, ATC सपोर्ट आमतौर पर फ्लाइंग स्कूल के इंस्ट्रक्टर या स्टूडेंट्स द्वारा ही दिया जाता है। हादसे वाले दिन VVIP लैंडिंग के कारण कार्वर एविएशन के एक फ्लाइट इंस्ट्रक्टर ATC को मैनेज कर रहे थे। यानी एक हाई-प्रोफाइल उड़ान भी बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर के भरोसे थी।
अनकंट्रोल्ड एयरोड्रोम: क्या होती है यह कैटेगरी?
बारामती एयरपोर्ट (Baramati Airport Safety) को अनकंट्रोल्ड एयरोड्रोम (Category A) में रखा गया है। भारत में एयरपोर्ट्स को चार कैटेगरी में बांटा गया है-
- Category A: अनकंट्रोल्ड, कोई ATC नहीं
- Category B: आंशिक ATC या AFIS सर्विस
- Category C: प्रोसीजरल ATC (बिना रडार)
- Category D: पूरी तरह रडार-बेस्ड ATC (जैसे दिल्ली, मुंबई)
बारामती Category A में आता है, जहां ILS (Instrument Landing System) जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद नहीं हैं।
दुर्घटना के वक्त क्या हालात थे?
ATC के अनुसार, हादसे के समय विजिबिलिटी करीब 3 किलोमीटर थी, जबकि इस एयरस्ट्रिप के लिए जरूरी न्यूनतम दृश्यता 5 किलोमीटर मानी जाती है। इसी कारण पायलट ने पहली लैंडिंग रद्द की थी। सेवानिवृत्त पायलट एहसान खालिद के मुताबिक, रनवे की लंबाई लियरजेट जैसे विमान के लिए पर्याप्त थी और दुर्घटना रनवे से पहले हुई। उनका मानना है कि अगर एयरपोर्ट पर ILS या अन्य इंस्ट्रूमेंट-बेस्ड सिस्टम होते, तो संभव है कि यह हादसा टल (Baramati Airport Safety) सकता था।
हादसे के बाद हरकत में प्रशासन और वायुसेना
विमान हादसे के बाद भारतीय वायुसेना ने एयरपोर्ट पर एक समर्पित टीम तैनात की है, जो अस्थायी तौर पर ATC और मौसम संबंधी सेवाएं दे रही है। वायुसेना ने कहा कि यह कदम प्रशासन के अनुरोध पर सुरक्षित हवाई संचालन सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
सबक क्या है?
यह हादसा (Baramati Airport Safety) एक बड़ा सवाल छोड़ गया है- क्या VVIP मूवमेंट वाले अनियंत्रित एयरपोर्ट्स को अब भी बेसिक सिस्टम के भरोसे छोड़ा जा सकता है? जांच के नतीजे आने के बाद शायद भारत की रीजनल एविएशन पॉलिसी पर नए सिरे से विचार किया जाए।
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