McDonald Food Safety Action: राजस्थान सरकार के ‘शुद्ध आहार मिलावट पर वार’ अभियान के अंतर्गत राजधानी जयपुर में खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण राजस्थान डॉ. टी. शुभमंगला के निर्देश पर सीएमएचओ जयपुर द्वितीय की फूड सेफ्टी टीम ने गौरव टावर स्थित दो रेस्टोरेंट्स पर निरीक्षण कर लगभग 100 किलो दूषित और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाद्य सामग्री को मौके पर ही नष्ट करवाया।
मैकडॉनल्ड्स में घटिया तेल का इस्तेमाल उजागर (McDonald Food Safety Action)
सीएमएचओ जयपुर द्वितीय डॉ. मनीष मित्तल ने बताया कि निरीक्षण के दौरान मैकडॉनल्ड्स रेस्टोरेंट में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। टीम ने पाया कि जिस रिफाइंड पामोलीन तेल में फ्रेंच फ्राइज और अन्य खाद्य पदार्थ तले जा रहे थे, उसका टीपीसी (Total Polar Compounds) स्तर तय मानक से कहीं अधिक था।
जहां खाद्य तेल में टीपीसी की अधिकतम स्वीकार्य सीमा 25 है, वहीं नॉन-वेज फ्राई किए जा रहे तेल का टीपीसी 28 और वेज खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल हो रहे तेल का टीपीसी 31 पाया गया। यह स्थिति सीधे तौर परस्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक मानी जाती है।

क्या है टीपीसी और क्यों है खतरनाक?
टीपीसी यानी टोटल पोलर कंपाउंड्स खाद्य तेल की गुणवत्ता मापने का एक वैज्ञानिक पैमाना है। जब तेल को बार-बार उच्च तापमान पर गर्म किया जाता है, तो उसमें कैंसरकारक तत्व ट्रांस फैट और अन्य विषैले रसायन बनने लगते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, टीपीसी स्तर 25 से ऊपर पहुंचने पर तेल लगभग विषाक्त हो जाता है, जिससे दिल की बीमारियां, मोटापा और कैंसर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
काला और अनुपयोगी तेल फिर भी किया जा रहा था इस्तेमाल
फूड सेफ्टी टीम ने मौके पर पाया कि मैकडॉनल्ड्स में उपयोग किया जा रहा तेल अत्यधिक काला, जला हुआ और पूरी तरह अनुपयोगी हो चुका था। इसके बावजूद इसे लगभग 150 डिग्री सेल्सियस तापमान पर गर्म कर दिनभर फ्राइंग के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। टीम ने तेल के नमूने लेकर लगभग 40 लीटर तेल को तत्काल नष्ट करवाया। रेस्टोरेंट के मैनेजर संभव भारद्वाज को तुरंत प्रभाव से फ्रेश तेल उपयोग में लेने के निर्देश दिए गए। रेस्टोरेंट को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत इंप्रूवमेंट नोटिस जारी किया जाएगा और लैब रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सड़े टमाटर और अन्य दूषित सामग्री भी मिली
निरीक्षण के दौरान रेस्टोरेंट के कोल्ड रूम में प्लास्टिक की कैरेट में रखे सड़े-गले टमाटर भी पाए गए। मौके पर ही 40 किलो खराब टमाटर नष्ट करवाए गए। इससे साफ हुआ कि रेस्टोरेंट में खाद्य सामग्री के भंडारण और गुणवत्ता को लेकर गंभीर लापरवाही बरती जा रही थी।
दूसरे रेस्टोरेंट पर भी कार्रवाई
गौरव टावर स्थित एक अन्य रेस्टोरेंट ‘चाट का चस्का’ में भी फूड सेफ्टी टीम ने निरीक्षण किया। यहां से लगभग 25 किलो दूषित खाद्य सामग्री नष्ट करवाई गई और खाद्य तेल का नमूना जांच के लिए लिया गया।
फूड सेफ्टी टीम रही मौके पर मौजूद
इस कार्रवाई में खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुशील चोटवानी, राजेश नागर सहित प्रोबेशनरी खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम शामिल रही। विभाग ने साफ किया कि आमजन के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और ऐसे निरीक्षण आगे भी लगातार जारी रहेंगे।
आगे भी जारी रहेगी सख्त निगरानी
खाद्य सुरक्षा विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे रेस्टोरेंट या खाद्य प्रतिष्ठानों में किसी भी तरह की अनियमितता या खराब गुणवत्ता की शिकायत तुरंत विभाग को दें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ भविष्य में और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि लोगों को सुरक्षित और शुद्ध भोजन मिल सके।
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