Sanjeev Arora ED Case: पंजाब सरकार के मंत्री संजीव अरोड़ा (Sanjeev Arora ED Case) की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। गुरुग्राम स्थित सेशन कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की मांग पर उनकी हिरासत को दो दिन के लिए और बढ़ा दिया है। यह मामला करीब ₹100 करोड़ रुपये से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग और GST धोखाधड़ी से संबंधित बताया जा रहा है। ED ने पहले सात दिन की हिरासत पूरी होने के बाद मंत्री को अदालत में पेश किया था, जहां एजेंसी ने उनकी रिमांड को पांच दिन बढ़ाने की मांग की थी। हालांकि कोर्ट ने सुनवाई के बाद केवल दो दिन की ही अनुमति दी।
कोर्ट में ED की दलील क्या थी?
प्रवर्तन निदेशालय (Sanjeev Arora ED Case) ने अदालत में कहा कि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में नहीं है, लेकिन कई अहम पहलुओं की गहराई से जांच जरूरी है। एजेंसी के अनुसार, फर्जी कंपनियों के जरिए हुए फंड ट्रांसफर, बेनामी संपत्तियों की खरीद और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन को लेकर कई अहम सबूतों की जांच की जानी है। ED ने यह भी कहा कि कुछ व्यक्तियों से आमने-सामने पूछताछ जरूरी है, ताकि पूरे नेटवर्क को समझा जा सके।
कथित संपत्तियों और लेनदेन पर सवाल
एजेंसी के मुताबिक, संजीव अरोड़ा पर आरोप है कि उन्होंने गुरुग्राम में करोड़ों रुपये की संपत्तियां खरीदीं, जो संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से जुड़ी हो सकती हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि उनके परिसरों से छापेमारी के दौरान कई वित्तीय दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिनसे कथित निवेश और लेनदेन के संकेत मिले हैं। ED का कहना है कि इन दस्तावेजों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है और कई स्तरों पर पूछताछ की आवश्यकता है।
गिरफ्तारी कैसे हुई थी?
सूत्रों के अनुसार, ED ने 9 मई को चंडीगढ़ स्थित आवास से संजीव अरोड़ा (Sanjeev Arora ED Case) को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें गुरुग्राम की सेशन कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें पहले एक सप्ताह की हिरासत मिली थी। अब उस अवधि के समाप्त होने के बाद कोर्ट ने रिमांड को दो दिन और बढ़ा दिया है, जिससे जांच एजेंसी को आगे पूछताछ का समय मिल गया है।
मामला ₹100 करोड़ GST धोखाधड़ी से जुड़ा
यह पूरा मामला (Sanjeev Arora ED Case) करीब ₹100 करोड़ की GST धोखाधड़ी से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि इसमें कुछ कंपनियां शामिल थीं, जिन्होंने फर्जी दस्तावेजों और गलत निर्यात दिखाकर सरकारी खजाने से GST रिफंड हासिल किया। जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे मामले में हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड (HSRL) नाम की कंपनी की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। यह कंपनी पहले रितेश प्रॉपर्टीज एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड के नाम से जानी जाती थी।
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ED की जांच में क्या है फोकस?
ED इस समय तीन मुख्य पहलुओं पर जांच कर रही है-
- फर्जी कंपनियों के जरिए पैसों का लेनदेन
- बेनामी संपत्तियों की खरीद और निवेश
- GST रिफंड से जुड़ी कथित धोखाधड़ी
एजेंसी का कहना है कि जांच में कई अन्य लोगों और संस्थाओं की भूमिका भी सामने आ सकती है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज
इस मामले (Sanjeev Arora ED Case) के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल बढ़ गई है। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि प्रशासनिक स्तर पर जांच प्रक्रिया को तेज किया गया है। हालांकि अभी तक मामले की न्यायिक जांच जारी है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी माना जा रहा है।
आगे क्या होगा?
अब संजीव अरोड़ा की हिरासत दो दिन और बढ़ने के बाद ED उनसे और पूछताछ करेगी। इसके बाद उन्हें फिर से अदालत में पेश किया जाएगा। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि जांच एजेंसी कई वित्तीय लेनदेन और दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है।
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