Uddhav Thackeray Shiv Sena Split: महाराष्ट्र की राजनीति में Uddhav Thackeray Shiv Sena Split एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। शिवसेना नेता रामदास कदम ने दावा किया है कि उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसदों के अलावा एक और सांसद भी एकनाथ शिंदे के साथ आने के लिए तैयार थे। उनके मुताबिक उस सांसद ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी कर दिए थे, लेकिन मंत्री पद की मांग पूरी नहीं होने के कारण उन्होंने अंतिम समय में अपना फैसला बदल दिया।

रामदास कदम का बड़ा दावा
रामदास कदम ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सातवें सांसद ने कैबिनेट मंत्री पद की शर्त रखी थी। जब यह मांग स्वीकार नहीं की गई तो वे वापस उद्धव गुट में चले गए। हालांकि कदम ने सांसद का नाम उजागर नहीं किया, लेकिन इतना जरूर कहा कि वह नेता उद्धव ठाकरे के बिल्कुल पास बैठते हैं।
इस बयान के बाद Uddhav Thackeray Shiv Sena Split को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं और तेज हो गई हैं। विपक्षी दल भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
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शिंदे गुट में शामिल हुए 6 सांसद
सोमवार को शिवसेना (UBT) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद आधिकारिक रूप से एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए। इसके बाद लोकसभा में शिंदे गुट के सांसदों की संख्या 7 से बढ़कर 13 हो गई।
मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एकनाथ शिंदे ने कहा कि उनकी लड़ाई बालासाहेब ठाकरे के विचारों को बचाने के लिए है। उन्होंने दावा किया कि असली शिवसेना वही है जो बालासाहेब के सिद्धांतों पर चल रही है। इस घटनाक्रम ने Uddhav Thackeray Shiv Sena Split को महाराष्ट्र की सबसे बड़ी राजनीतिक खबर बना दिया है।
उद्धव की बैठक से विधायक भी रहे गायब (Uddhav Thackeray Shiv Sena Split)
इसी बीच विधानसभा के मानसून सत्र से पहले उद्धव ठाकरे ने अपने विधायकों की बैठक बुलाई थी। लेकिन तीन विधायक और एक एमएलसी बैठक में शामिल नहीं हुए। इससे पार्टी में और टूट की अटकलें तेज हो गईं।
हालांकि विधायक सुनील शिंदे ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि वह निजी कारणों से अपने गांव में थे और उनकी अनुपस्थिति को राजनीतिक रंग देना गलत है।
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क्या बढ़ सकता है संकट?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि Uddhav Thackeray Shiv Sena Split आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है। यदि कुछ और सांसद या विधायक शिंदे गुट का रुख करते हैं, तो उद्धव ठाकरे के लिए संगठन को एकजुट रखना बड़ी चुनौती बन सकता है।
2024 विधानसभा चुनाव में महायुति गठबंधन को भारी सफलता मिली थी, जबकि उद्धव ठाकरे की पार्टी केवल 20 सीटों तक सिमट गई थी। वहीं लोकसभा चुनाव में भले ही उद्धव गुट ने बेहतर प्रदर्शन किया हो, लेकिन अब पार्टी के भीतर उठे असंतोष ने नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
शिवसेना में बगावत का पुराना इतिहास
शिवसेना में बगावत कोई नई बात नहीं है। 1991 में छगन भुजबल ने बालासाहेब ठाकरे का साथ छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा था। इसके बाद कई बार पार्टी में बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिले।
अब Uddhav Thackeray Shiv Sena Split की ताजा घटनाएं इस बात का संकेत दे रही हैं कि महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले दिनों में और बड़े उलटफेर संभव हैं।
शिवसेना (UBT) में बढ़ेगी टूट? (Uddhav Thackeray Shiv Sena Split)
उद्धव ठाकरे गुट से 6 सांसदों का अलग होना पहले ही बड़ा झटका माना जा रहा था। अब सातवें सांसद को लेकर किए गए दावे ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि क्या आने वाले दिनों में शिवसेना (UBT) में और टूट देखने को मिलेगी या उद्धव ठाकरे अपने संगठन को संभालने में सफल रहेंगे।
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