Windfall Tax Revised July 1: देश में ईंधन आपूर्ति और वैश्विक ऊर्जा बाजार की बदलती परिस्थितियों के बीच केंद्र सरकार ने विंडफॉल टैक्स को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने 1 जुलाई से लागू होने वाली नई दरों का ऐलान करते हुए पेट्रोल के निर्यात पर टैक्स बढ़ा दिया है, जबकि डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर लगने वाली ड्यूटी में कटौती की गई है। इस कदम को पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और घरेलू बाजार में ईंधन उपलब्धता सुनिश्चित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, नई दरें 1 जुलाई से अगले पखवाड़े के लिए प्रभावी होंगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू आपूर्ति पर न पड़े और तेल कंपनियां केवल निर्यात के जरिए अतिरिक्त मुनाफा कमाने के बजाय घरेलू बाजार की (Windfall Tax Revised July 1) जरूरतों को प्राथमिकता दें।
पेट्रोल निर्यात पर विंडफॉल टैक्स में बड़ी बढ़ोतरी
सरकार ने पेट्रोल निर्यात पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) को 1.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 4 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। यानी अब पेट्रोल का निर्यात करने वाली कंपनियों को पहले की तुलना में अधिक टैक्स चुकाना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम घरेलू बाजार में पेट्रोल की पर्याप्त उपलब्धता (Windfall Tax Revised July 1) बनाए रखने और वैश्विक बाजार में ऊंची कीमतों का फायदा उठाकर होने वाले अत्यधिक निर्यात को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है।
डीजल निर्यात पर टैक्स में राहत
सरकार ने डीजल निर्यात पर लगने वाली ड्यूटी में उल्लेखनीय कमी की है। नई अधिसूचना के अनुसार, डीजल पर SAED की दर 14 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 8.5 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। इस कटौती से तेल रिफाइनिंग कंपनियों को राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय डीजल की प्रतिस्पर्धात्मक (Windfall Tax Revised July 1) स्थिति भी बेहतर हो सकती है।
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ATF पर भी कम हुई ड्यूटी
एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर भी सरकार ने राहत प्रदान की है। ATF पर लगने वाली ड्यूटी को 12.5 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 7.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। एटीएफ विमानन उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण ईंधन है। ड्यूटी में यह कमी एयरलाइन सेक्टर और ईंधन निर्यात से जुड़ी कंपनियों के लिए सकारात्मक (Windfall Tax Revised July 1) मानी जा रही है।
क्यों बदली गईं विंडफॉल टैक्स की दरें?
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बाद सरकार ने मार्च में डीजल और ATF के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लगाया था। बाद में 16 मई से पेट्रोल निर्यात को भी इसके दायरे में लाया गया। सरकार का उद्देश्य था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के कारण कंपनियां केवल निर्यात पर ध्यान न दें और देश के भीतर ईंधन की कमी जैसी स्थिति पैदा न हो। विंडफॉल टैक्स के जरिए (Windfall Tax Revised July 1)सरकार अतिरिक्त मुनाफे को नियंत्रित करने और घरेलू आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश कर रही है।
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पड़ोसी देशों को दी गई विशेष छूट
वित्त मंत्रालय ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों द्वारा नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका को किए जाने वाले पेट्रोल, डीजल और ATF निर्यात पर पहले की तरह छूट जारी रहेगी। इसके अलावा अब इस सूची में मॉरीशस और मालदीव को भी शामिल कर लिया गया है। यानी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों द्वारा इन देशों को किए जाने वाले निर्यात पर विंडफॉल टैक्स (Windfall Tax Revised July 1) लागू नहीं होगा।
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घरेलू उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?
सरकार ने साफ किया है कि घरेलू उपभोग के लिए बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा टैक्स ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की कीमतों पर इस फैसले का तत्काल कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। हालांकि ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि यह फैसला भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और वैश्विक अस्थिरता के बीच घरेलू आपूर्ति को सुरक्षित रखने (Windfall Tax Revised July 1) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।




