Seva Teerth Inauguration: आजादी के बाद से रायसीना हिल स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) देश के राजनीतिक और प्रशासनिक इतिहास का मूक साक्षी रहा है। स्वतंत्र भारत की चुनौतियां, युद्धकालीन फैसले, आर्थिक सुधारों की शुरुआत और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका-इन सबका केंद्र यही रहा। अब यह ऐतिहासिक अध्याय एक नए मोड़ पर पहुंच रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां अपनी अंतिम कैबिनेट बैठक करेंगे और इसके बाद प्रशासनिक तंत्र नए परिसर ‘सेवा तीर्थ’ (Seva Teerth Inauguration) में स्थानांतरित होगा।
13 फरवरी को दोपहर 1:30 बजे प्रधानमंत्री ‘सेवा तीर्थ’ का अनावरण करेंगे। इसके बाद वे औपचारिक रूप से सेवा तीर्थ, कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 का उद्घाटन करेंगे। शाम करीब 6 बजे सेवा तीर्थ परिसर (Seva Teerth Inauguration) में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम को भी संबोधित करेंगे। यह सिर्फ भवन परिवर्तन नहीं, बल्कि शासन प्रणाली के पुनर्गठन का प्रतीक माना जा रहा है।
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इतिहास से आधुनिकता की ओर
रायसीना हिल के नॉर्थ और साउथ ब्लॉक का डिजाइन 1900 के शुरुआती दशक में ब्रिटिश आर्किटेक्ट हर्बर्ट बेकर ने तैयार किया था। उस दौर में ये इमारतें औपनिवेशिक शासन की प्रशासनिक जरूरतों के अनुरूप थीं। आजादी के बाद इन्हीं भवनों ने लोकतांत्रिक भारत के शासन को दिशा दी। अब सरकार की योजना है कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक की ऐतिहासिक इमारतों को ‘युगे-युगेन भारत नेशनल म्यूजियम’ में बदला जाए। इसे विश्वस्तरीय संग्रहालय के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है, जहां भारत की प्राचीन से आधुनिक सभ्यता की झलक दिखाई जाएगी। अनुमान है कि यहां 25 से 30 हजार तक कलाकृतियां प्रदर्शित की जाएंगी। इसे दुनिया के सबसे बड़े संग्रहालयों में शामिल करने की परिकल्पना की गई है।
‘सेवा तीर्थ’ क्या है और क्यों खास है?
सेवा तीर्थ (Seva Teerth Inauguration) में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय एक ही परिसर में कार्य करेंगे। अभी तक ये विभाग अलग-अलग स्थानों से संचालित होते रहे हैं। एकीकृत परिसर का उद्देश्य प्रशासनिक समन्वय को मजबूत करना और निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है। सरकार के अनुसार, यह परिवर्तन केवल भौतिक स्थानांतरण नहीं बल्कि ‘नागरिक-केंद्रित सुशासन’ की दिशा में बड़ा कदम है। आधुनिक तकनीक, डिजिटल इंटीग्रेशन और केंद्रीकृत कार्य प्रणाली के माध्यम से प्रशासन को अधिक कुशल और पारदर्शी बनाने की योजना है।
डिजिटल और सुरक्षित प्रशासनिक ढांचा
नए भवन परिसरों में डिजिटल रूप से इंटीग्रेटेड ऑफिस सिस्टम स्थापित किए गए हैं। यहां व्यवस्थित सार्वजनिक संपर्क क्षेत्र और केंद्रीकृत स्वागत सुविधाएं होंगी, जिससे आम नागरिकों और अधिकारियों के बीच संवाद आसान हो सके। सुरक्षा के लिहाज से भी सेवा तीर्थ (Seva Teerth Inauguration)अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल सिस्टम, व्यापक मॉनिटरिंग नेटवर्क और एडवांस इमरजेंसी रिस्पॉन्स इन्फ्रास्ट्रक्चर के जरिए सुरक्षित और सुलभ वातावरण सुनिश्चित किया गया है। इससे अधिकारियों, कर्मचारियों और आगंतुकों के लिए बेहतर कार्य वातावरण तैयार होगा।
प्रशासनिक संस्कृति में बदलाव का संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक संस्कृति में बदलाव का संकेत देता है। जहां पहले ऐतिहासिक इमारतें सत्ता के प्रतीक के रूप में देखी जाती थीं, वहीं ‘सेवा तीर्थ’ (Seva Teerth Inauguration) नाम से ही सेवा-आधारित शासन की अवधारणा को रेखांकित किया गया है। यह परिवर्तन सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप बनाना है। सरकार का दावा है कि इससे विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय बेहतर होगा और नीति निर्माण में तेजी आएगी।
राजनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व
रायसीना हिल से सेवा तीर्थ तक का यह सफर प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण है। एक ओर जहां ऐतिहासिक धरोहरों को संग्रहालय के रूप में संरक्षित करने की योजना है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक तंत्र को आधुनिक, तकनीक-संचालित और केंद्रीकृत रूप में ढाला जा रहा है। प्रधानमंत्री का यहां अंतिम कैबिनेट बैठक करना और फिर नए परिसर में शिफ्ट होना इस परिवर्तन को ऐतिहासिक आयाम देता है। आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नया ढांचा शासन की कार्यप्रणाली में कितना बदलाव ला पाता है।
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