IAS Anuradha Pal: पिता ने दूध बेचकर पढ़ाया, बेटी बनीं IAS
उत्तराखंड सरकार ने 2016 बैच की तेजतर्रार आईएएस अधिकारी अनुराधा पाल को राज्य की नई आबकारी आयुक्त नियुक्त किया है। इस पद पर तैनात होने वाली वह पहली महिला अधिकारी बनी हैं, जिससे उनका नाम सुर्खियों में है। 2 जून को उन्होंने इस जिम्मेदारी का कार्यभार संभाल लिया और 3 जून को उन्होंने विभागीय बैठक बुलाकर अपने काम की शुरुआत भी कर दी है। अनुराधा पाल के इस मुकाम तक पहुंचने का सफर संघर्षों से भरा रहा है, जहां उन्होंने तमाम आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद अपने सपनों को साकार किया।
IAS Anuradha Pal: संघर्षों से भरी हैं अनुराधा पाल की कहानी
हरिद्वार के एक छोटे से गांव से आने वाली अनुराधा पाल का बचपन सीमित संसाधनों के बीच बीता। उनके पिता दूध बेचकर घर चलाते थे और उसी कमाई से उन्होंने बेटी की पढ़ाई-लिखाई का खर्च उठाया। अनुराधा की शुरुआती शिक्षा नवोदय विद्यालय, हरिद्वार में हुई। इसके बाद उन्होंने गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय से 2008 में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में बीटेक किया। बीटेक के बाद उन्होंने कुछ समय तक एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी की, लेकिन उनका सपना कुछ और था। उन्होंने नौकरी छोड़ दी और यूपीएससी की तैयारी में जुट गईं। इस दौरान उन्होंने कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी, रुड़की में तीन साल तक लेक्चरर के तौर पर भी काम किया ताकि आर्थिक बोझ को कुछ हद तक कम किया जा सके।
अनुराधा पाल ने पहली बार 2012 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दी और ऑल इंडिया रैंक 451 हासिल की, लेकिन आईएएस नहीं बन पाईं। इसके बाद उन्होंने हार नहीं मानी और 2015 में दोबारा परीक्षा दी, जिसमें उन्हें ऑल इंडिया 62वीं रैंक मिली और वह आईएएस अधिकारी बन गईं। अब तक वे उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में जिलाधिकारी (DM) सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुकी हैं। ईमानदारी, मेहनत और प्रशासनिक क्षमता के लिए उनकी पहचान है। आबकारी आयुक्त पद पर उनकी नियुक्ति से उत्तराखंड सरकार को एक सशक्त और सक्षम नेतृत्व की उम्मीद है।
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