BRICS Meeting 2026: दुनिया इस वक्त दो बड़ी कूटनीतिक बैठकों पर नजर टिकाए हुए है। एक तरफ नई दिल्ली में हो रही BRICS Meeting 2026, तो दूसरी तरफ बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping की अहम मुलाकात। इन दोनों बैठकों को सिर्फ राजनीतिक इवेंट नहीं, बल्कि आने वाले वैश्विक शक्ति संतुलन का संकेत माना जा रहा है। दुनिया इस समय युद्ध, ऊर्जा संकट और व्यापारिक तनाव से जूझ रही है, ऐसे में भारत की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
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दिल्ली में क्यों अहम है BRICS Meeting 2026?
नई दिल्ली में आयोजित BRICS Meeting 2026 की अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर कर रहे हैं। इस बैठक में रूस, ईरान, चीन, ब्राजील और अन्य सदस्य देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। यह बैठक सितंबर में होने वाले बड़े ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की दिशा तय करेगी।
इस दौरान पश्चिम एशिया में जारी तनाव, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। खासतौर पर ईरान संकट को लेकर दुनिया की निगाहें भारत पर टिकी हैं। भारत लगातार संतुलित विदेश नीति अपनाते हुए अमेरिका और ईरान दोनों के साथ रिश्ते मजबूत रखने की कोशिश कर रहा है।
बीजिंग में ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात क्यों खास?
उधर बीजिंग में करीब 9 साल बाद ट्रंप का चीन दौरा दुनिया की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल हो गया है। डोनाल्ड ट्रम्प और Xi Jinping के बीच हुई बैठक को अमेरिका-चीन संबंधों में नए मोड़ के तौर पर देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, टेक्नोलॉजी और इंडो-पैसिफिक रणनीति को लेकर चल रही प्रतिस्पर्धा अब नई दिशा ले सकती है। यही कारण है कि BRICS Meeting 2026 और बीजिंग वार्ता को आपस में जुड़ी घटनाओं के रूप में देखा जा रहा है।
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ईरान संकट बना सबसे बड़ा मुद्दा
पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। तेल सप्लाई, समुद्री व्यापार और ऊर्जा कीमतों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। भारत के लिए यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि ईरान में भारत का चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस संघर्ष का समाधान नहीं निकला तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसी वजह से BRICS Meeting 2026 में सदस्य देश शांति और स्थिरता को लेकर साझा रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं।
ग्लोबल साउथ की नई आवाज बन रहा BRICS
ब्रिक्स लंबे समय से खुद को ‘ग्लोबल साउथ’ की मजबूत आवाज के तौर पर पेश कर रहा है। ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से शुरू हुआ यह संगठन अब तेजी से विस्तार कर रहा है। ईरान, यूएई, सऊदी अरब और इथियोपिया जैसे देशों के शामिल होने के बाद इसकी ताकत और बढ़ गई है।
आज दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाला यह संगठन पश्चिमी देशों के प्रभाव को चुनौती देने की क्षमता रखता है। यही वजह है कि BRICS Meeting 2026 को भविष्य की वैश्विक राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत लगातार वैश्विक मंचों पर अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है। नई दिल्ली में हो रही यह बैठक भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय ताकत का बड़ा संकेत मानी जा रही है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में ब्रिक्स सिर्फ आर्थिक संगठन नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक संघर्षों को सुलझाने वाला बड़ा मंच बन सकता है। इसी कारण BRICS Meeting 2026 को दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाओं में गिना जा रहा है।
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