LokhitkrantiLokhitkrantiLokhitkranti
  • होम
  • मेरा शहर
    • गाजियाबाद
    • नोएडा
    • हापुड़
    • मुजफ्फरनगर
    • दिल्ली एनसीआर
  • राज्य
    • दिल्ली एनसीआर
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • झारखंड
    • आंध्र प्रदेश
    • हिमाचल प्रदेश
    • हरियाणा
    • राजस्थान
    • मध्य प्रदेश
    • बिहार
    • पश्चिम बंगाल
    • पंजाब
    • जम्मू-कश्मीर
    • छत्तीसगढ़
    • गुजरात
    • महाराष्ट्र
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • राजनीति
  • ताज़ा खबरे
  • शिक्षा
  • ई पेपर
  • अन्य
    • खेल
    • बॉलीवुड
    • लाइफस्टाइल
    • टेक्नोलॉजी
    • जीडीए
    • हेल्थ
    • ट्रेंडिंग
    • वायरल
    • धर्म कर्म
    • बिज़नेस
    • ऑटोमोबाइल
    • जॉब
    • मनोरंजन
Reading: Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला,जूनियर डिविजन सिविल जज बनने के लिए अब अनिवार्य होगी तीन साल की वकालत
Share
Notification Show More
Font ResizerAa
Font ResizerAa
LokhitkrantiLokhitkranti
Search
  • होम
  • मेरा शहर
    • गाजियाबाद
    • नोएडा
    • हापुड़
    • मुजफ्फरनगर
    • दिल्ली एनसीआर
  • राज्य
    • दिल्ली एनसीआर
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • झारखंड
    • आंध्र प्रदेश
    • हिमाचल प्रदेश
    • हरियाणा
    • राजस्थान
    • मध्य प्रदेश
    • बिहार
    • पश्चिम बंगाल
    • पंजाब
    • जम्मू-कश्मीर
    • छत्तीसगढ़
    • गुजरात
    • महाराष्ट्र
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • राजनीति
  • ताज़ा खबरे
  • शिक्षा
  • ई पेपर
  • अन्य
    • खेल
    • बॉलीवुड
    • लाइफस्टाइल
    • टेक्नोलॉजी
    • जीडीए
    • हेल्थ
    • ट्रेंडिंग
    • वायरल
    • धर्म कर्म
    • बिज़नेस
    • ऑटोमोबाइल
    • जॉब
    • मनोरंजन
Have an existing account? Sign In
Follow US
Lokhitkranti > राष्ट्रीय > Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला,जूनियर डिविजन सिविल जज बनने के लिए अब अनिवार्य होगी तीन साल की वकालत
राष्ट्रीय

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला,जूनियर डिविजन सिविल जज बनने के लिए अब अनिवार्य होगी तीन साल की वकालत

Lokhit Kranti
Last updated: 2025-05-20 6:08 अपराह्न
By Lokhit Kranti 1 वर्ष ago
Share
SHARE

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम निर्णय में जूनियर डिविजन सिविल जज (निचली अदालतों के जज) की नियुक्ति प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए कहा है कि इन पदों के लिए अब उम्मीदवारों को न्यूनतम तीन साल की वकालत का अनुभव अनिवार्य रूप से होना चाहिए। इस फैसले के साथ ही अब सीधे लॉ ग्रेजुएट्स की भर्ती पर रोक लगा दी गई है।

अब कानून की डिग्री हासिल करने के बाद उम्मीदवार तभी इस पद के लिए परीक्षा में बैठ सकेंगे, जब उन्होंने कम से कम तीन साल तक एक वकील के रूप में काम किया हो। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से न्यायिक सेवा में अनुभव आधारित भर्ती को बढ़ावा मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने सुनाया फैसला

Supreme Court: मुख्य न्यायाधीश भूषण रामाकृष्ण गवई, जस्टिस एजी मसीह और जस्टिस विनोद चंद्रन की पीठ ने यह निर्णय सुनाया। फैसले में कहा गया कि नए लॉ ग्रेजुएट्स की सीधे नियुक्ति से न्यायिक व्यवस्था में कई समस्याएं उत्पन्न हुई हैं, जिनका उल्लेख विभिन्न उच्च न्यायालयों द्वारा दाखिल किए गए हलफनामों में भी किया गया है।

जस्टिस गवई ने कहा, “हम हाईकोर्ट्स की इस राय से सहमत हैं कि न्यायिक पदों के लिए न्यूनतम प्रैक्टिस जरूरी है। न्यायाधीश बनने से पहले प्रत्याशी को न्यायालय में काम करने का अनुभव होना चाहिए। पिछले दो दशकों में नए स्नातकों की सीधी भर्ती एक सफल मॉडल साबित नहीं हुआ है।”

2002 में हटाई गई थी प्रैक्टिस की शर्त

Supreme Court: गौरतलब है कि 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश में वकालत के न्यूनतम अनुभव की शर्त को हटा दिया था, जिसके बाद लॉ ग्रेजुएट्स सीधे न्यायिक सेवा की परीक्षा में भाग ले सकते थे। हालांकि समय के साथ इसके खिलाफ आवाजें उठने लगीं। कई हाईकोर्ट्स ने पुनः प्रैक्टिस की आवश्यकता को बहाल करने की मांग की और इसे न्यायिक प्रक्रिया की गुणवत्ता से जोड़ा।

भविष्य पर असर

Supreme Court: इस फैसले से अब न्यायिक सेवा की ओर बढ़ने की सोच रखने वाले कानून के छात्रों को पहले वकील के रूप में कम से कम तीन साल तक अनुभव लेना जरूरी होगा। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को न्यायपालिका में गुणवत्ता और व्यावहारिक समझ को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

You Might Also Like

NEET Paper Leak: पीएम मोदी ने दिए सख्त कार्रवाई के संकेत, जल्द आएगा नया कानून

PM Modi Australia Visit: भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच ऐतिहासिक रक्षा समझौता, बढ़ेगी सैन्य विमानों की तैनाती

PM Modi Australia Visit 2026: आतंकवाद, रक्षा और इकोनॉमी पर भारत-ऑस्ट्रेलिया की बड़ी सहमति, PM मोदी का बड़ा बयान

PM Modi Australia Visit: ‘भारत में निवेश का यही सही समय’… ऑस्ट्रेलिया के CEO फोरम से PM मोदी का ग्लोबल संदेश

PM Modi Australia Visit: ‘मां तुझे सलाम’ से लेकर ‘शिव तांडव’ तक… मेलबर्न में PM मोदी के स्वागत की भव्य तस्वीर

TAGGED:Chief Justice Bhushan Ramakrishna Gavaiimportant decisionsjudicial serviceJunior Division Civil JudgeJustice Vinod ChandranSupreme Courtजस्टिस एजी मसीह
Share This Article
Facebook Twitter Email Print
Share
Leave a comment

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
TwitterFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
स्कूल वाहन सुरक्षा नियम को लेकर कासगंज परिवहन विभाग सख्त
उत्तर प्रदेश

स्कूल वाहनों को लेकर कासगंज परिवहन विभाग की सख्त चेतावनी, बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

Meena Chauhan By Meena Chauhan 6 दिन ago
पटना साइबर ठगी: बैंक खाता किराए पर देने वाले रैपिडो ड्राइवर समेत तीन दबोचे गए
CM योगी सख्त: रास्ता न दिला पाएं तो लेखपाल-कानूनगो-तहसीलदार सस्पेंड करो
मुजफ्फरपुर पुलिस का बड़ा एक्शन, 342 गिरफ्तार, 190 जेल भेजे
प्रतापविहार में फायरिंग: विवाद में युवक को मारी गोली, अस्पताल में भर्ती
- Advertisement -
Ad imageAd image

Categories

  • ताज़ा खबरे
  • बॉलीवुड
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • धर्म कर्म
  • वायरल
  • बिज़नेस

About US

लोकहित क्रांति न्यूज़ एक निष्पक्ष, विश्वसनीय और जनहित को समर्पित डिजिटल समाचार मंच है। हमारा उद्देश्य देश–दुनिया की ताज़ा, सटीक और प्रमाणिक ख़बरें आप तक तेज़ी से पहुँचाना है।
Quick Link
  • About Us
  • Terms and Condition
  • DNPA Code of Ethics
Must Read
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Grievance Redressal Policy

Follow Us

Lokhit Kranti
Copyrights © Lokhit Kranti. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?