Hanuman Temple Roof Collapse: महाराष्ट्र के परभणी जिले से एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया है। Hanuman Temple Roof Collapse में 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 25 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा शनिवार दोपहर उस समय हुआ जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में प्रसाद ग्रहण कर रहे थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सब कुछ सामान्य चल रहा था। लोग दर्शन और पूजा के बाद प्रसाद लेने के लिए लाइन में खड़े थे। तभी निर्माणाधीन सभा मंडप की छत अचानक भरभराकर गिर गई और देखते ही देखते पूरा परिसर चीख-पुकार से गूंज उठा।
कैसे हुआ हादसा?
जानकारी के मुताबिक मंदिर के सामने एक नए सभामंडप का निर्माण कार्य चल रहा था। निर्माण के दौरान बांस, लोहे की रॉड और सेंट्रिंग स्ट्रक्चर का उपयोग किया गया था। दोपहर करीब 3 बजे अचानक यह ढांचा कमजोर पड़ गया और पूरी छत नीचे आ गिरी।
CCTV फुटेज में भी हादसे का भयावह दृश्य कैद हुआ है। वीडियो में साफ दिखाई देता है कि श्रद्धालु प्रसाद लेने में व्यस्त थे, तभी निर्माणाधीन ढांचा टूटकर नीचे गिर गया। Hanuman Temple Roof Collapse की यह घटना कुछ ही सेकंड में कई परिवारों की खुशियां छीन ले गई।
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मलबे में दबे लोगों को बचाने के लिए चला रेस्क्यू ऑपरेशन
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने बिना समय गंवाए मलबा हटाना शुरू कर दिया। पुलिस, प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें भी मौके पर पहुंच गईं। बचाव अभियान में अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग और स्थानीय ग्रामीणों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
लगातार कई घंटों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकाला गया। प्रशासन ने पुष्टि की कि कुल 32 लोग हादसे की चपेट में आए थे। Hanuman Temple Roof Collapse में 7 लोगों की मौत हुई, जबकि बाकी घायलों का इलाज अस्पताल में जारी है।
मृतकों के परिवारों को मिलेगा मुआवजा (Hanuman Temple Roof Collapse)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस दुर्घटना पर शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। सरकार ने घायलों के इलाज का पूरा खर्च उठाने का भी भरोसा दिया है।
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400 साल पुराने मंदिर से जुड़ा है इतिहास
जिस मंदिर में यह हादसा हुआ, वह यशवाड़ी गांव स्थित त्रिमूर्ति हनुमान मंदिर है। इस मंदिर का इतिहास लगभग 400 साल पुराना बताया जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, एक समय पूरा गांव उजड़ गया था, लेकिन मंदिर अपनी जगह मजबूती से खड़ा रहा।
पिछले कुछ वर्षों में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर परिसर के विस्तार और सौंदर्यीकरण का काम चल रहा था। इसी परियोजना के तहत सभा मंडप का निर्माण किया जा रहा था। दुर्भाग्यवश, इसी निर्माण कार्य के दौरान Hanuman Temple Roof Collapse जैसी दुखद घटना हो गई।
हादसे ने खड़े किए कई सवाल
यह दुर्घटना केवल एक निर्माण हादसा नहीं है, बल्कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी धार्मिक स्थल पर निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा उपायों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि Hanuman Temple Roof Collapse के पीछे लापरवाही थी या कोई अन्य तकनीकी कारण। पूरे देश की नजर अब जांच के निष्कर्षों पर टिकी हुई है।
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