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Lokhitkranti > मध्य प्रदेश > Ujjain Borewell Accident: 23 घंटे का रेस्क्यू, लेकिन ढाई साल के भागीरथ को नहीं बचाया जा सका
मध्य प्रदेश

Ujjain Borewell Accident: 23 घंटे का रेस्क्यू, लेकिन ढाई साल के भागीरथ को नहीं बचाया जा सका

Gajendra Singh Tanwar
Last updated: 2026-04-11 12:57 पूर्वाह्न
Gajendra Singh Tanwar Published 2026-04-11
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Ujjain Borewell Accident
Ujjain Borewell Accident: 23 घंटे का रेस्क्यू, लेकिन ढाई साल के भागीरथ को नहीं बचाया जा सका
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Ujjain Borewell Accident: मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के बडनगर तहसील के झलारिया गांव से एक बेहद दर्दनाक घटना (Ujjain Borewell Accident) सामने आई है। यहां बोरवेल में गिरे ढाई वर्षीय मासूम भागीरथ को करीब 23 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बाहर निकाल लिया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस हादसे ने पूरे इलाके को गहरे शोक में डुबो दिया है और एक बार फिर खुले बोरवेलों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Contents
कैसे हुआ हादसा – जिज्ञासा बनी मौत की वजह23 घंटे का रेस्क्यू ऑपरेशन – SDRF और NDRF की जंगअस्पताल में घोषित किया गया मृतप्रशासन का बयान और बचाव प्रयासपरिवार का दर्द – पल भर में उजड़ गई दुनियाबड़ा सवाल – खुले बोरवेल कब बनेंगे जानलेवा खतरे से मुक्त?

कैसे हुआ हादसा – जिज्ञासा बनी मौत की वजह

जानकारी के अनुसार, यह घटना (Ujjain Borewell Accident) बृहस्पतिवार शाम लगभग 7 से 7:30 बजे के बीच हुई। राजस्थान के पाली जिले के निवासी प्रवीण देवासी, जो अपने परिवार के साथ भेड़ चराने के काम से यहां आए थे, अपने बच्चों के साथ खेतों में थे। इसी दौरान ढाई वर्षीय भागीरथ खेलते-खेलते बोरवेल के पास पहुंच गया। बताया जा रहा है कि बोरवेल पर रखा पत्थर और ढक्कन खिसक गया, और बच्चा जिज्ञासावश उसमें झांकने लगा। तभी वह अचानक करीब 60 से 65 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया।

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23 घंटे का रेस्क्यू ऑपरेशन – SDRF और NDRF की जंग

घटना (Ujjain Borewell Accident) की जानकारी मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया। मौके पर SDRF और NDRF की टीमें पहुंचीं और रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया।

  • करीब आधा दर्जन JCB और पोकलेन मशीनें लगाई गईं
  • कैमरे के जरिए बच्चे की स्थिति पर नजर रखी गई
  • ऑक्सीजन सप्लाई की व्यवस्था की गई
  • रेस्क्यू रोप से निकालने की कोशिशें भी की गईं

लेकिन पथरीली जमीन और बीच-बीच में चट्टानों के कारण खुदाई बेहद मुश्किल हो गई। कई जगह मशीनों को भी रोका गया और वैकल्पिक रास्ते तलाशे गए।

अस्पताल में घोषित किया गया मृत

कड़ी मशक्कत के बाद बच्चे को बोरवेल से बाहर निकालकर तुरंत सिविल अस्पताल ले जाया गया। लेकिन वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुयश श्रीवास्तव ने पुष्टि की कि बच्चे को अस्पताल पहुंचने पर ही मृत पाया गया था। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया की जा रही है।

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प्रशासन का बयान और बचाव प्रयास

जिला प्रशासन ने बताया कि जैसे ही घटना की सूचना मिली, सभी एजेंसियों को सक्रिय कर दिया गया था। उज्जैन के जिलाधिकारी रोशन कुमार सिंह ने बताया कि बचाव कार्य हर संभव प्रयास के साथ किया गया। प्रशासन के अनुसार, बच्चे को 40 फीट तक खुदाई के बाद आगे चट्टान मिलने से रेस्क्यू में और देरी हुई। इसके बावजूद टीमों ने लगातार प्रयास जारी रखे।

परिवार का दर्द – पल भर में उजड़ गई दुनिया

भागीरथ अपने परिवार का सबसे छोटा बेटा था। उसके पिता प्रवीण देवासी राजस्थान के पाली जिले के निवासी हैं और पशुपालन का काम करते हैं। परिजनों के अनुसार, घटना के समय वे पास ही थे लेकिन कुछ ही सेकंड में हादसा हो गया। बच्चे की मां ने उसे बोरवेल के पास देखा भी था, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव में मातम पसरा हुआ है।

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बड़ा सवाल – खुले बोरवेल कब बनेंगे जानलेवा खतरे से मुक्त?

यह घटना एक बार फिर इस गंभीर समस्या को उजागर करती है कि खुले और असुरक्षित बोरवेल आज भी ग्रामीण इलाकों में जानलेवा साबित हो रहे हैं। हर साल ऐसे कई हादसे सामने आते हैं, लेकिन स्थायी समाधान अब भी अधूरा है। प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि भविष्य में ऐसे हादसों को कैसे रोका जाए। उज्जैन का यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक गहरी चेतावनी है। एक मासूम की जिज्ञासा ने उसका जीवन छीन लिया और परिवार को कभी न भरने वाला दर्द दे दिया। पूरा देश इस दर्दनाक घटना से स्तब्ध है और अब उम्मीद की जा रही है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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