आज के समय में लिव-इन रिलेशनशिप (Live In Relationship) का चलन बड़े शहरों से निकलकर छोटे शहरों तक भी दिखाई देने लगा है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या लिव-इन रिलेशनशिप सही है या गलत? और भारत का कानून इसके बारे में क्या कहता है? आइए इसके बारें में विस्तार से जानते हैं।
Live In Relationship क्या है?
लिव-इन रिलेशनशिप एक ऐसा रिश्ता है, जिसमें दो अविवाहित जोड़ा आपसी सहमति से बिना शादी किए एक साथ रहते हैं। अगर साफ-साफ कहें तो यह पति-पत्नी जैसा रिश्ता है, लेकिन इसमें कानूनी शादी की जरूरत नहीं होती।
कानून लिव-इन रिलेशनशिप को कैसे देखता है?
महिला वकील ज्योति गोयल के अनुसार, भारत में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कोई विशेष कानून नहीं है। लेकिन यह अपराध भी नहीं है। 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बालिग होने के बाद कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा से शादी कर सकता है या बिना शादी किसी के साथ रह सकता है।

2019 में मद्रास हाईकोर्ट और 2021 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप को निजी स्वतंत्रता के नजरिए से देखा जाना चाहिए, न कि सामाजिक नैतिकता के पैमाने पर।
क्या लिव-इन रिलेशनशिप में अधिकार मिलते हैं?
भले ही इसके लिए अलग से कोई कानून नहीं है, लेकिन भारतीय संविधान की विभिन्न धाराओं के तहत कुछ अधिकार मिलते हैं।
अगर रिश्ता टूटता है तो पार्टनर मेंटेनेंस (भरण-पोषण) का दावा कर सकता है।
अगर बच्चे पैदा होते हैं तो उन्हें संपत्ति में अधिकार मिलता है।
बच्चों की कस्टडी को लेकर भी कानून संरक्षण देता है।
यदि किसी तरह की हिंसा होती है तो घरेलू हिंसा अधिनियम (Domestic Violence Act) के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
क्या लिव-इन रिलेशनशिप के लिए कोई एग्रीमेंट होता है?
लिव-इन रिलेशनशिप में कोई औपचारिक एग्रीमेंट नहीं होता। यह पूरी तरह दो लोगो की व्यक्तिगत इच्छा पर आधारित है। हां, अगर दोनों चाहें तो आगे चलकर रजिस्टर्ड मैरिज कर सकते हैं या धार्मिक रीति-रिवाजों से शादी कर सकते हैं।

लिव-इन रिलेशनशिप सही है या गलत?
रिलेशनशिप एक्सपर्ट डॉ. धर्ना भारद्वाज का कहना है कि कोई भी रिश्ता अपने आप में सही या गलत नहीं होता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसे निभाने वाले लोग कैसे हैं।
साथ रहने पर रोजाना एक-दूसरे की आदतों को स्वीकारना पड़ता है।
कई बार सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
समझौता, धैर्य और एक-दूसरे की इज्जत करना ही रिश्ते को मजबूत बनाता है।
अगर दोनों साथी इन जिम्मेदारियों और चुनौतियों को निभाने के लिए तैयार हैं, तभी यह रिश्ता सफल हो सकता है।
कुल मिलकर लिव-इन रिलेशनशिप को भारत का कानून अपराध नहीं मानता और पार्टनर्स को कुछ कानूनी अधिकार भी देता है। यह सही है या गलत, इसका फैसला समाज नहीं बल्कि उसमें रहने वाले दो लोग ही कर सकते हैं। अगर आपसी सम्मान, समझदारी और जिम्मेदारी है तो यह रिश्ता भी शादी की तरह सुखद और स्थायी बन सकता है।
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