Nirmala Sitharaman Budget Saree: जब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में बजट पेश करने के लिए खड़ी होती हैं, तो देश की नजर सिर्फ टैक्स स्लैब, सब्सिडी और योजनाओं पर नहीं होती। हर साल एक और चीज़ चर्चा में रहती है उनकी साड़ी। पिछले करीब एक दशक में सीतारमण ने बजट (Nirmala Sitharaman Budget Saree) को सिर्फ आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की हथकरघा विरासत का मंच बना दिया है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट के दिन भी कुछ ऐसा ही हुआ, जब उन्होंने तमिलनाडु की गहरे मैरून रंग की कांजीवरम साड़ी पहनकर लोकसभा में प्रवेश किया। यह उनका लगातार नौवां बजट था, और साड़ी का चयन फिर एक बार “वोकल फॉर लोकल” की सोच को मजबूत करता दिखा।
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2026-27: कांजीवरम में आत्मविश्वास और परंपरा
इस साल चुनी गई कांजीवरम साड़ी (Nirmala Sitharaman Budget Saree) का गहरा मैरून रंग गंभीरता और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। कंट्रास्ट बॉर्डर और हल्के सुनहरे डिज़ाइन के साथ पीला ब्लाउज, इस लुक को पारंपरिक होने के साथ-साथ प्रभावशाली बनाता है। यह चयन केवल फैशन नहीं, बल्कि दक्षिण भारत की बुनाई परंपरा को राष्ट्रीय मंच पर सम्मान देने का संकेत भी है।

जब बजट भाषण बना कला का कैनवास
- सीतारमण की साड़ियों (Nirmala Sitharaman Budget Saree) में हर साल किसी न किसी राज्य, कला या कारीगर की कहानी छुपी रहती है।
- 2025 में उन्होंने बिहार की मधुबनी कला से सजी ऑफ-व्हाइट सिल्क साड़ी पहनी थी। खास बात यह रही कि यह साड़ी उन्हें पद्म पुरस्कार विजेता दुलारी देवी ने भेंट की थी, जिसने इस लुक को और भावनात्मक बना दिया।
- 2024 (अंतरिम बजट) के दौरान पश्चिम बंगाल की कांथा कढ़ाई वाली नीली तसर सिल्क साड़ी ने चुनाव से पहले सांस्कृतिक संतुलन का संदेश दिया।
रंगों के जरिए संदेश
- 2023 में पहनी गई लाल साड़ी को शक्ति, ऊर्जा और आत्मविश्वास के प्रतीक के रूप में देखा गया। उस साल के बजट को सरकार की आर्थिक मजबूती से जोड़कर देखा गया था।
- वहीं 2024 के पूर्ण बजट में उन्होंने सुनहरी और मैजेंटा बॉर्डर वाली ऑफ-व्हाइट मंगलगिरि साड़ी चुनी। इसे आंध्र प्रदेश पर विशेष फोकस के संकेत के रूप में भी देखा गया।
2019: साड़ी के साथ बदली परंपरा
2019 का बजट ऐतिहासिक रहा। गुलाबी मंगलगिरि सिल्क साड़ी के साथ-साथ उन्होंने बजट दस्तावेज़ के लिए ब्रीफकेस की जगह ‘बही-खाता’ अपनाया। यह कदम औपनिवेशिक प्रतीकों से दूरी और भारतीय परंपराओं को अपनाने का मजबूत संदेश था।
ओडिशा से आशावाद तक
- 2022 में ओडिशा के गंजाम जिले की बोमकाई साड़ी रस्ट ब्राउन रंग, सिल्वर जरी और जटिल डिज़ाइन ने क्षेत्रीय शिल्प को राष्ट्रीय पहचान दी।
- 2020 में पहनी गई पीली साड़ी को देश की अर्थव्यवस्था को लेकर आशावाद के प्रतीक के तौर पर देखा गया, खासकर उस दौर की वैश्विक चुनौतियों के बीच।
साड़ी से जुड़ी सियासत
निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman Budget Saree) की साड़ियां अब सिर्फ व्यक्तिगत पसंद नहीं रहीं। वे एक सॉफ्ट पॉलिसी टूल बन चुकी हैं जो बिना भाषण के स्थानीय कारीगरों, टेक्सटाइल परंपराओं और ‘मेक इन इंडिया’ सोच को आगे बढ़ाती हैं। बजट के दिन उनकी साड़ी अक्सर उतनी ही चर्चा में रहती है, जितनी नई घोषणाएं।
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