Sadhvi Prem Baisa: राजस्थान की धरती ने सदियों से संतों, साधकों और वीरों को जन्म दिया है। इसी परंपरा में एक नाम इन दिनों देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है- साध्वी प्रेम बाईसा। कम उम्र में सांसारिक वैभव को छोड़कर भक्ति और वैराग्य का मार्ग अपनाने वाली साध्वी प्रेम बाईसा को उनके अनुयायी ‘आधुनिक मीरा’ के रूप में देखते थे। लेकिन 28 जनवरी 2026 को जोधपुर में हुआ उनका अचानक और दर्दनाक निधन अब एक गहरा रहस्य बन गया है।
जन्म, परिवार और शुरुआती जीवन
Sadhvi Prem Baisa का जन्म वर्ष 2000–2001 के आसपास माना जाता है। निधन के समय उनकी उम्र करीब 25 वर्ष बताई गई। वे राजस्थान के जोधपुर जिले के छोटी धनारी गांव (अब कृष्ण नगर) की रहने वाली थीं। उनका परिवार राठौड़ (राजपूत) समाज से ताल्लुक रखता था। उनके पिता का नाम देवीसिंह राठौड़ है, जो उनके आध्यात्मिक जीवन में गुरु की भूमिका में भी रहे।
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कहा जाता है कि प्रेम बाईसा का झुकाव बचपन से ही भक्ति और आध्यात्म की ओर था। जहां उनकी उम्र की अन्य लड़कियां पढ़ाई, करियर और आधुनिक जीवन के सपनों में व्यस्त थीं, वहीं प्रेम बाईसा कृष्ण भक्ति, भजनों और सत्संग में लीन रहा करती थीं।
कम उम्र में संन्यास और आध्यात्मिक पहचान
बहुत कम उम्र में Sadhvi Prem Baisa सांसारिक जीवन से वैराग्य ले लिया और साध्वी जीवन अपना लिया। जोधपुर के बोरानाडा क्षेत्र में उन्होंने ‘साधना कुटीर’ नाम से आश्रम की स्थापना की, जहां नियमित सत्संग, भजन और प्रवचन होते थे। उनकी सुरीली आवाज में गाए गए भजन और सरल, भावपूर्ण प्रवचन पश्चिमी राजस्थान में तेजी से लोकप्रिय हुए।
उनके अनुयायी उन्हें ‘आधुनिक मीरा’ कहते थे, क्योंकि वे भक्ति को दिखावे से नहीं, बल्कि आत्मिक प्रेम से जोड़कर देखती थीं। उनके प्रवचनों में सादगी, प्रेम और त्याग का संदेश प्रमुख रहता था। वे अक्सर कहती थीं कि सच्चा सुख भौतिक सुविधाओं में नहीं, बल्कि आत्मा की शांति में छिपा होता है।
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वायरल वीडियो और विवाद
जुलाई 2025 के आसपास Sadhvi Prem Baisa का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें वे अपने गुरु—जो उनके पिता भी थे—को गले लगाती हुई नजर आईं। इस वीडियो को लेकर कई तरह की भ्रामक बातें फैलाई गईं। बाद में साध्वी प्रेम बाईसा ने स्पष्ट किया था कि यह एक पिता-पुत्री के स्नेह का सामान्य दृश्य था, जिसे गलत संदर्भ में पेश किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया था कि आश्रम के कुछ पूर्व कर्मियों ने उनसे कथित तौर पर 20 लाख रुपये की मांग की थी और मांग पूरी न होने पर वीडियो को एडिट कर सोशल मीडिया पर फैलाया गया। इस मामले के बाद वे काफी मानसिक दबाव में भी बताई गईं।
रहस्यमय परिस्थितियों में निधन
28 जनवरी 2026 की शाम Sadhvi Prem Baisa का जोधपुर में निधन हो गया। जानकारी के अनुसार वे अस्वस्थ थीं और आश्रम में एक कंपाउंडर को इंजेक्शन लगाने के लिए बुलाया गया था। इंजेक्शन लगते ही उनकी हालत बिगड़ गई और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
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मामला तब और गंभीर हो गया जब उनकी मृत्यु के करीब चार घंटे बाद उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट से एक पोस्ट सामने आई, जिसे ‘सुसाइड नोट’ के रूप में देखा जा रहा है। पोस्ट में ‘अग्नि परीक्षा’ और ‘न्याय’ जैसे शब्दों का उल्लेख था, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए।
जांच की मांग और पुलिस कार्रवाई
Sadhvi Prem Baisa के निधन के बाद जोधपुर में उनके समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया और निष्पक्ष जांच की मांग की। सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है। पुलिस ने इंजेक्शन लगाने वाले कंपाउंडर को हिरासत में ले लिया है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह स्पष्ट हो पाएगी।
शोक और सवाल
कम उम्र में साध्वी जीवन अपनाने वाली Sadhvi Prem Baisa का जाना उनके अनुयायियों के लिए गहरा आघात है। उनका जीवन त्याग, भक्ति और सादगी की मिसाल माना जाता रहा है। अब पूरा देश यही सवाल कर रहा है कि क्या यह एक चिकित्सकीय लापरवाही थी, कोई साजिश या फिर किसी गहरे मानसिक दबाव का नतीजा- इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगा।
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