Mohan Bhagwat Meerut: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक Mohan Bhagwat का उत्तर प्रदेश के Meerut दौरा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि इसे राष्ट्र निर्माण, सांस्कृतिक एकता और खेल शक्ति के संगम के रूप में देखा जा रहा है। मेरठ व बृज प्रांत के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में भागवत ने संघ (Mohan Bhagwat Meerut)की भूमिका, हिंदू समाज की अवधारणा और युवाओं के भविष्य को लेकर स्पष्ट संदेश दिया।
‘संघ नाम के लिए नहीं, राष्ट्र के लिए’
कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि संघ का उद्देश्य अपना नाम बड़ा करना नहीं, बल्कि देश का नाम ऊंचा करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Mohan Bhagwat Meerut) किसी वर्ग विशेष के विरोध या सत्ता प्राप्ति की महत्वाकांक्षा से प्रेरित संगठन नहीं है। उसका मूल उद्देश्य समाज को संगठित करना और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि संघ को समझने के लिए उसे भीतर से जानना जरूरी है। बाहर से देखने पर उसकी कार्यप्रणाली को पूरी तरह नहीं समझा जा सकता।
मेरठ की ऐतिहासिक विरासत का स्मरण
भागवत ने मेरठ को देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की धरती बताते हुए कहा कि यहीं से 1857 में जागृति की चिंगारी भड़की थी। उन्होंने क्रांतिकारी धारा का उल्लेख करते हुए Chandrashekhar Azad, Bhagat Singh, Subhas Chandra Bose, Sukhdev Thapar और Shivaram Rajguru जैसे स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर Indian National Congress ने राजनीतिक चेतना जगाई, वहीं समाज सुधार की अलग धारा भी चली। इन परिस्थितियों में Keshav Baliram Hedgewar ने 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की, ताकि समाज को संगठित किया जा सके।
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हिंदू शब्द: सांस्कृतिक पहचान, जाति नहीं
सरसंघचालक ने कहा कि भारत राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर, स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानंद और गांधी की परंपरा का देश है। हिंदू शब्द को उन्होंने सांस्कृतिक विशेषण बताते हुए कहा कि यह किसी जाति या पंथ का द्योतक नहीं है, बल्कि एक जीवन पद्धति और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विविधता में एकता भारतीय संस्कृति की आत्मा है और समरसता ही राष्ट्र की शक्ति है।
सेवा प्रकल्पों का विस्तृत नेटवर्क
भागवत ने बताया कि आज देशभर में संघ के 45 प्रांतों में 1 लाख 30 हजार से अधिक सेवा प्रकल्प संचालित हो रहे हैं। ये कार्य स्वयंसेवकों (Mohan Bhagwat Meerut) के सहयोग से स्थानीय स्तर पर संचालित होते हैं। संघ स्वयं सीधे योजनाएं लागू नहीं करता, बल्कि समाज के बीच कार्य करने वाले स्वयंसेवक ही इसकी शक्ति हैं।
खिलाड़ियों से संवाद: खेल और संस्कार पर जोर
संवाद के दूसरे सत्र में लगभग 90 खिलाड़ियों ने अपने प्रश्न रखे। पारंपरिक खेलों की पहचान और ग्रामीण प्रतिभाओं के विकास के सवाल पर भागवत ने कहा कि इस दिशा में समाज आधारित पहल जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि Kreeda Bharati जैसे संगठन पहल करें, संघ पूरा सहयोग देगा। भारत को खेल महाशक्ति बनाने के प्रश्न पर उन्होंने चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता, शुचिता और विकेंद्रीकरण की आवश्यकता बताई। उनका कहना था कि प्रतिभा को अवसर देने के लिए व्यवस्था का निष्पक्ष होना अनिवार्य है।
युवाओं और नशामुक्ति पर संदेश
युवाओं को नशे से दूर रखने के सवाल पर उन्होंने परिवार, शिक्षा और समाज में संस्कारों को मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने ‘कुटुंब प्रबोधन’ की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि मजबूत परिवार ही मजबूत समाज और राष्ट्र की नींव होते हैं।
हिंदू राष्ट्र और विश्व गुरु की अवधारणा
हिंदू राष्ट्र के प्रश्न पर भागवत ने कहा कि भारत सांस्कृतिक दृष्टि से हिंदू राष्ट्र है, जहां समरसता और सह-अस्तित्व की भावना प्रमुख है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत पुनः विश्व गुरु बनने की दिशा में अग्रसर है। मेरठ का यह संवाद कार्यक्रम (Mohan Bhagwat Meerut) केवल वैचारिक चर्चा नहीं रहा, बल्कि इसे खेल, संस्कार और संगठन के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की नई परिकल्पना के रूप में देखा जा रहा है।
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