Trump China visit: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बहुचर्चित चीन दौरा अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से किसी बड़े नतीजे पर पहुंचने में नाकाम रहा है। ट्रंप को उम्मीद थी कि बीजिंग में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत के बाद ईरान के मुद्दे पर कोई ठोस रास्ता निकलेगा, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट रही। जिनपिंग ने ट्रंप की खातिरदारी तो खूब की, लेकिन तेहरान पर दबाव बनाने के मुद्दे पर हाथ पीछे खींच लिए। ट्रंप के खाली हाथ लौटने के बाद अब दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों को डर है कि अमेरिका ईरान पर किसी भी वक्त एक बड़े और घातक सैन्य ऑपरेशन का आदेश दे सकता है।
चीन में ताइवान और ईरान जैसे मुद्दों पर दोनों महाशक्तियों के बीच तल्खी साफ देखी गई। जहाँ चीन ने अमेरिका को ताइवान से दूर रहने की चेतावनी दी, वहीं ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए अपनी जिद दोहराई। इस दौरे की कड़वाहट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिकी टीम ने बीजिंग से लौटते समय जासूसी के डर से अपने सभी गैजेट्स (Trump China visit) और लैपटॉप्स को डस्टबिन में डाल दिया। अब वाशिंगटन वापसी के साथ ही ट्रंप का ‘धैर्य’ जवाब दे चुका है, और खाड़ी देशों के ऊपर बारूद के ढेर फटने की आहट तेज हो गई है।
अल फुजैरा में अमेरिकी एयरफोर्स का ‘सीक्रेट’ मिशन
ट्रंप के वाशिंगटन पहुंचने से पहले ही मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिकी सेना की हलचल कई गुना बढ़ गई है। Flightradar24 के डेटा के अनुसार, अल फुजैरा के पास अमेरिकी वायुसेना के एयर रिफ्यूलिंग विमानों की उड़ानें दर्ज की गई हैं। अमेरिकी मरीन कमांडो ‘सी हॉक’ (Sea Hawk) हेलीकॉप्टरों के जरिए युद्ध अभ्यास कर रहे हैं। वर्तमान में 20 से अधिक अमेरिकी वॉरशिप ईरान की नाकाबंदी (Trump China visit) में तैनात हैं। रात के अंधेरे में F-16 विमानों की सीक्रेट उड़ानें इस बात का संकेत दे रही हैं कि अमेरिका एक बड़े ‘ऑपरेशनल विंडो’ के खुलने का इंतजार कर रहा है।
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जिनपिंग और ट्रंप की सीधी तल्खी
चीन दौरे के दौरान ट्रंप ने जिनपिंग के सामने स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं देख सकता। वहीं चीनी नेतृत्व ने ताइवान को हथियारों से मजबूत करने पर अमेरिका को अंजाम भुगतने की धमकी दी। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ताइवान पर चीन का बल प्रयोग उसकी सबसे बड़ी गलती होगी। कूटनीतिक मोर्चे पर मिली इस विफलता ने अब सैन्य टकराव का रास्ता लगभग साफ कर दिया है।(Trump China visit)
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‘मिशन अभी पूरा नहीं हुआ’
ट्रंप की तैयारियों को इजराइल का भी पूरा समर्थन मिल रहा है। CENTCOM और इजराइली रक्षा बलों (IDF) के बीच हाई-लेवल बैठकें हुई हैं। इजराइली रक्षा मंत्री ने ईरान को सीधी धमकी देते हुए कहा है कि, ‘मिशन अभी पूरा नहीं हुआ है। जरूरत पड़ी तो ईरान के खिलाफ जल्द कार्रवाई होगी।’ इजराइली मीडिया में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका बहुत जल्द ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर विनाशकारी प्रहार कर सकता है। (Trump China visit)
‘अमेरिका और इजराइल की हार निश्चित’
दूसरी ओर, ईरान भी झुकने को तैयार नहीं है। ईरानी विदेश मंत्री ने इजराइल को जवाब देते हुए कहा कि, ‘पिछली जंग से दुश्मनों ने कुछ नहीं सीखा। दोबारा हमला किया तो अमेरिका और इजराइल की हार निश्चित है।’ ईरानी संसद के स्पीकर कालीबाफ ने भी चेतावनी दी है कि जंग की सनक अमेरिका पर भारी पड़ेगी और अमेरिकी अर्थव्यवस्था इस युद्ध का बोझ नहीं उठा पाएगी। ईरान वर्तमान में होर्मुज पर पूर्ण नियंत्रण और यूरेनियम संवर्धन जैसे मुद्दों पर अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है। (Trump China visit)
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