Iran-US Psychological War: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब एक नई मोड़ पर पहुंच गया है। हालांकि न तो कोई मिसाइल दागी गई है और न ही बी-2 बम बरसे हैं, फिर भी अमेरिका ने ईरान पर मनोवैज्ञानिक दबाव डालकर युद्ध की शुरुआत कर दी है। यह जंग किसी पारंपरिक हथियार से नहीं बल्कि मानसिक और सूचना युद्ध के जरिए लड़ी जा रही है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद इस मनोवैज्ञानिक युद्ध का नेतृत्व कर रहे हैं। उनका उद्देश्य ईरान सरकार की स्थिति कमजोर करना और वहां के लोगों के मनोबल पर असर डालना है। इस जंग में अमेरिका ने फेक न्यूज, सोशल मीडिया प्रोपेगंडा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक दबाव का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
Iran-US Psychological War: आधुनिक युद्ध की नई तकनीक
Iran-US Psychological War-ब्रिटेनिका के अनुसार मनोवैज्ञानिक युद्ध में दुश्मन के मानसिक स्थिति को प्रभावित किया जाता है, ताकि उसकी सेना खुद ही बैकफुट पर चली जाए। अमेरिका के पास इस तरह के युद्ध के लिए विशेष फोर्स मौजूद है। इतिहास में सबसे पहले साइप्रस ने बेबीलोन के खिलाफ इस तकनीक का इस्तेमाल किया था, वहीं चंगेज खान ने इसी रणनीति से एशिया में धूम मचा दी थी। मनोवैज्ञानिक युद्ध आमतौर पर तीन तरीकों से लड़ा जाता है-
- डर फैलाकर
- गलत सूचना या फेक न्यूज फैलाकर
- दुश्मन सेना का मनोबल तोड़कर
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Iran-US Psychological War: ईरान पर अमेरिका की रणनीति
- विद्रोह के लिए प्रेरित करना: राष्ट्रपति ट्रंप ने 14 जनवरी को ईरान के लोगों से अपील की ‘आप लड़ाई जारी रखिए। अमेरिकी मदद जल्द ही पहुंच रही है। यह बयान ईरान सरकार में बैठे लोगों के लिए डर पैदा करने और देश में पैनिक की स्थिति बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
- फेक न्यूज और प्रोपेगंडा: अमेरिका और पश्चिमी मीडिया ईरान में स्थिति बिगाड़ने के लिए फेक और पुराने वीडियो सोशल मीडिया पर चला रहे हैं। यहाँ तक कि 20 हजार मौतों की खबरें भी फैलाई जा रही हैं, जो तथ्यात्मक नहीं हैं।
- आईआरजीसी के मनोबल को तोड़ना: अमेरिका ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) की स्थिति कमजोर करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव डाल रहा है। ब्रिटेन को कहा गया है कि वह IRGC को आतंकी संगठन घोषित करे।
Iran-US Psychological War: अमेरिका की बड़ी चुनौती
Iran-US Psychological War- अमेरिका की कोशिश हथियारों के बिना ही ईरान में सत्ता बदलने की है। इसके लिए मनोवैज्ञानिक युद्ध, मीडिया प्रोपेगंडा और अंतरराष्ट्रीय दबाव का इस्तेमाल किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह युद्ध ईरान सरकार और सेना के मनोबल को कमजोर करने की सबसे बड़ी चुनौती है, जिससे वास्तविक युद्ध की जरूरत न पड़े।



