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दिल्ली एनसीआर

Delhi News: डराने वाले आंकड़े! दिल्ली से रोज़ लापता हो रहे 27 लोग, सबसे ज्यादा किशोरियां

Kannu
Last updated: 2026-02-04 11:50 पूर्वाह्न
Kannu Published 2026-02-04
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Delhi missing children 2026
Delhi News: डराने वाले आंकड़े! दिल्ली से रोज़ लापता हो रहे 27 लोग, सबसे ज्यादा किशोरियां
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Delhi missing children 2026: देश की राजधानी दिल्ली से सामने आ रहे लापता लोगों के आंकड़े अब डराने लगे हैं। साल 2026 की शुरुआत के साथ ही राजधानी में अचानक गायब हो रहे लोगों की संख्या ने न सिर्फ पुलिस बल्कि आम लोगों को भी चिंता में डाल दिया है। सिर्फ 27 दिनों में 800 से ज्यादा लोग लापता हो चुके हैं। हालात ऐसे हैं कि हर दिन औसतन 27 लोग घर से निकलते हैं और फिर लौटकर नहीं आते, जबकि पुलिस सिर्फ 9 लोगों तक ही पहुंच पा रही है।

Contents
27 दिनों में 807 लापता, 572 का अब भी कोई सुराग नहींबच्चों के मामले सबसे ज्यादा चिंताजनककिशोरियां सबसे ज्यादा खतरे मेंवयस्कों में भी हालात बेहतर नहीं12 से 18 साल के बच्चे सबसे ज्यादा जोखिम में11 साल में 6,931 बच्चे आज भी नहीं मिलेसवाल वही, जवाब अब भी नहीं

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27 दिनों में 807 लापता, 572 का अब भी कोई सुराग नहीं

दिल्ली पुलिस के रिकॉर्ड बताते हैं कि 1 जनवरी से 27 जनवरी 2026 के बीच कुल 807 लोगों के लापता होने की शिकायत दर्ज हुई। इनमें से 235 लोगों को पुलिस ने किसी न किसी तरह से खोज लिया, लेकिन 572 लोग अब भी लापता हैं। यह आंकड़ा राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लगातार बढ़ती शिकायतें यह संकेत दे रही हैं कि समस्या सिर्फ अपराध की नहीं, बल्कि सिस्टम की भी है।

बच्चों के मामले सबसे ज्यादा चिंताजनक

लापता लोगों की सूची में सबसे ज्यादा डराने वाली संख्या बच्चों की है। कुल 807 लापता लोगों में 191 नाबालिग शामिल हैं। इनमें से पुलिस सिर्फ 48 बच्चों तक ही पहुंच सकी है, जबकि 137 बच्चे अब भी गायब हैं। हर दिन कई माता-पिता अपने बच्चों की तस्वीरें लेकर थानों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक कोई ठोस जवाब नहीं मिल पाया है।

किशोरियां सबसे ज्यादा खतरे में

जो आंकड़े सामने आए हैं, वे और भी गंभीर सच्चाई दिखाते हैं। लापता 137 बच्चों में से 120 लड़कियां हैं। यानी नाबालिगों में सबसे ज्यादा किशोरियां लापता हो रही हैं। यह सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि सैकड़ों परिवारों की टूटी नींद और बढ़ती बेचैनी की तस्वीर है। पुलिस के सामने यह एक बड़ी चुनौती बन चुकी है कि इतनी बड़ी संख्या में बच्चियां आखिर कहां और कैसे गायब हो रही हैं।

वयस्कों में भी हालात बेहतर नहीं

यह संकट सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं है। 27 दिनों में 616 वयस्क भी लापता हुए हैं। इनमें से 181 लोगों को खोज लिया गया, लेकिन 435 वयस्क अब भी लापता हैं। ट्रेस किए गए लोगों में 90 पुरुष और 91 महिलाएं शामिल हैं। यानी महिलाओं के लापता होने के मामले भी लगभग पुरुषों के बराबर हैं, जो दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाते हैं।

12 से 18 साल के बच्चे सबसे ज्यादा जोखिम में

उम्र के हिसाब से आंकड़ों को देखें तो 12 से 18 साल के बच्चे सबसे ज्यादा खतरे में नजर आते हैं। इस आयु वर्ग के 169 बच्चे सिर्फ 27 दिनों में लापता हुए। इनमें से 48 बच्चों को खोज लिया गया, लेकिन 121 अब भी गायब हैं। वहीं 0 से 8 साल के 9 बच्चे और 8 से 12 साल के 13 बच्चे भी लापता हुए, जिनमें से बहुत कम को ही ढूंढा जा सका। साफ है कि किशोर उम्र में लापता होने का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।

11 साल में 6,931 बच्चे आज भी नहीं मिले

अगर हालिया आंकड़े डराने वाले हैं, तो पिछले 11 सालों की तस्वीर और भी भयावह है। साल 2016 से 2026 के बीच दिल्ली से 18 साल से कम उम्र के 60,694 बच्चे लापता हुए। इनमें से 53,763 बच्चों को तो खोज लिया गया, लेकिन 6,931 बच्चे आज भी लापता हैं। यानी करीब 11 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जिनका कोई रिकॉर्ड, कोई पता और कोई जवाब आज तक नहीं मिल पाया।

सवाल वही, जवाब अब भी नहीं

सरकारें बदलीं, योजनाएं बनीं, तकनीक भी आगे बढ़ी, लेकिन लापता लोगों और बच्चों की संख्या कम नहीं हो सकी। सबसे बड़ा सवाल आज भी वही है जो लोग और बच्चे वापस नहीं लौटे, उनके साथ आखिर क्या हुआ? क्या वे कभी अपने परिवारों तक पहुंच पाएंगे या नहीं, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। दिल्ली के ये आंकड़े सिर्फ खबर नहीं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी हैं, जिसे नजरअंदाज करना अब और ज्यादा खतरनाक हो सकता है।

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