America Venezuela Action: दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में है। America Venezuela Action के तहत हुई हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। इस कार्रवाई के दौरान वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस की गिरफ्तारी की खबर सामने आई, जिसकी पुष्टि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की। इस घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर America Venezuela Action जैसा बड़ा कदम अमेरिका ने क्यों उठाया?
अमेरिका-वेनेजुएला संबंधों में दरार की शुरुआत
कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (CRS) के अनुसार, अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्तों में तनाव की शुरुआत वर्ष 2000 के आसपास हुई। इसके बाद 2005 से अमेरिका ने भ्रष्टाचार, लोकतांत्रिक संस्थाओं के कमजोर होने, मानवाधिकार उल्लंघन और आपराधिक गतिविधियों के आरोपों के तहत वेनेजुएला पर प्रतिबंध लगाने शुरू किए। यह US Venezuela conflict किसी एक प्रशासन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई अमेरिकी सरकारों ने इसे आगे बढ़ाया।
ह्यूगो चावेज के दौर में बढ़ा टकराव
1999 में ह्यूगो चावेज के राष्ट्रपति बनने के बाद दोनों देशों के संबंध तेजी से बिगड़े। चावेज ने खुद को समाजवादी और साम्राज्यवाद-विरोधी नेता के रूप में स्थापित किया और तेल क्षेत्र समेत कई प्रमुख संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण किया। उन्होंने चीन, रूस, ईरान और क्यूबा से नजदीकी बढ़ाई, जिससे America Venezuela Action अविश्वास और गहरा गया। यही पृष्ठभूमि आगे चलकर America Venezuela Action की नींव बनी।
वेनेजुएला का तेल- असली वजह?
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा कच्चे तेल का भंडार है, जो करीब 303 अरब बैरल आंका गया है। हालांकि यह तेल भारी (Heavy Crude) होने के कारण निकालना और रिफाइन करना महंगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि Venezuela oil crisis के बीच अमेरिका इन संसाधनों पर दोबारा प्रभाव स्थापित करना चाहता है, ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर सके और पश्चिम एशिया पर निर्भरता कम हो।
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भारत और वेनेजुएला का तेल व्यापार
भारत के लिए भी वेनेजुएला का तेल रणनीतिक रूप से अहम रहा है।
- 2013: भारत के कुल तेल आयात में 10.3% हिस्सेदारी
- 2020: प्रतिबंधों के चलते गिरकर 3.6%
- 2024: 1.8 अरब डॉलर का कच्चा तेल निर्यात
इस तरह वेनेजुएला 2024 में भारत का 10वां सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना।
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चीन और रूस की बढ़ती भूमिका
America Venezuela Action के पीछे भू-राजनीति भी बड़ा कारण है। चीन और रूस ने वेनेजुएला को अरबों डॉलर का कर्ज दिया है, जिसकी भरपाई तेल आपूर्ति से की जा रही है। इसके अलावा, रूस और ईरान के साथ सैन्य और सुरक्षा सहयोग ने अमेरिका की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
निकोलस मादुरो- विवादों से भरा शासनकाल
2013 में सत्ता संभालने वाले निकोलस मादुरो का कार्यकाल आर्थिक कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार, अति मुद्रास्फीति और चुनावी धांधली के आरोपों से घिरा रहा। 2018 और 2024 के चुनावों को अमेरिका और कई पश्चिमी देशों ने मान्यता नहीं दी, जिससे Nicolas Maduro arrest की खबरों को और राजनीतिक वजन मिला।
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अमेरिका का हस्तक्षेपों का लंबा इतिहास
CRS की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका 1798 से अब तक 469 सैन्य हस्तक्षेप कर चुका है। इनमें से बड़ी संख्या लैटिन अमेरिका और कैरिबियाई देशों में हुई है। इतिहासकारों का अनुमान है कि इन हस्तक्षेपों में 65,000 से अधिक लोगों की मौत हुई है। वेनेजुएला पर कार्रवाई को भी इसी परंपरा की अगली कड़ी माना जा रहा है।
तेल, सत्ता और वैश्विक वर्चस्व की लड़ाई
कुल मिलाकर, America Venezuela Action केवल सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि तेल संसाधनों, चीन-रूस के प्रभाव और लैटिन अमेरिका में वर्चस्व की लड़ाई का हिस्सा है। आने वाले समय में इसका असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति, ऊर्जा बाजार और विकासशील देशों की रणनीतियों पर गहराई से पड़ सकता है।



