Newborn Birth Defects: नवजात शिशु का जन्म हर परिवार के लिए खुशियों से भरा पल होता है। माता-पिता यही उम्मीद करते हैं कि उनका बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हो। अक्सर बच्चे बाहर से बिल्कुल हेल्दी दिखाई भी देते हैं, लेकिन कई मामलों में जन्म से जुड़ी कुछ ऐसी बीमारियां होती हैं, जो तुरंत नजर नहीं आतीं। यही वजह है कि जनवरी महीने को ‘Birth Defects Awareness Month’ के रूप में मनाया जाता है, ताकि लोगों को जन्मजात विकारों के प्रति जागरूक किया जा सके।
क्या होते हैं जन्मजात विकार?
जन्मजात विकार वे समस्याएं होती हैं, जो बच्चे में जन्म के समय ही मौजूद (Newborn Birth Defects) रहती हैं। ये विकार दिल, रीढ़ की हड्डी, चेहरे की बनावट, हाथ-पैर या आंतरिक अंगों से जुड़े हो सकते हैं। कुछ समस्याएं तुरंत दिख जाती हैं, जबकि कुछ धीरे-धीरे सामने आती हैं।
न्यूबॉर्न में बर्थ डिफेक्ट की पहचान कैसे होती है?
डॉक्टरों के अनुसार, अधिकतर जन्मजात बीमारियों का पता जन्म के तुरंत बाद या पहले कुछ दिनों में चल सकता है। हालांकि, कुछ विकार ऐसे भी होते हैं, जो बच्चे के बड़े होने पर लक्षण दिखाते हैं। इसलिए शुरुआती जांच बेहद जरूरी होती है।
शारीरिक बनावट से जुड़ी प्रमुख समस्याएं
कटे होंठ और तालू
कुछ बच्चों के ऊपरी होंठ या तालू में छेद होता है। यह समस्या जन्म के समय ही दिख जाती है। इससे बच्चे को दूध पीने में परेशानी हो सकती है। अच्छी बात यह है कि सर्जरी से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
क्लबफुट और पेट की बनावट की दिक्कत
कई बार बच्चे के पैर अंदर की ओर मुड़े होते हैं, जिसे क्लबफुट कहा जाता है। वहीं कुछ गंभीर मामलों में पेट की दीवार पूरी तरह विकसित नहीं होती और आंतें बाहर दिख सकती हैं। ऐसे मामलों में तुरंत सर्जरी जरूरी होती है।
स्पाइना बिफिडा और मलद्वार की समस्या
स्पाइना बिफिडा में रीढ़ की हड्डी पूरी तरह बंद नहीं होती और पीठ पर थैली जैसी संरचना दिख सकती है। इसके अलावा, कुछ बच्चों में मलद्वार नहीं बनता या गलत जगह होता है, जिसे ऑपरेशन से ठीक किया जाता है।
दिल से जुड़ी छिपी हुई (Newborn Birth Defects) बीमारियां

जन्मजात दिल की बीमारियों के लक्षण कई बार तुरंत नजर नहीं आते। डॉक्टर को केवल दिल की धड़कन में असामान्य आवाज सुनाई दे सकती है। चेतावनी संकेत-
- बच्चा नीला पड़ना (साइनोसिस)
- बहुत तेज सांस लेना
- दूध पीने में परेशानी
- बार-बार थक जाना
ये लक्षण दिखें तो तुरंत जांच जरूरी है।
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कौन-सी जांच से होती है जल्दी पहचान?
पल्स ऑक्सीमेट्री टेस्ट
यह टेस्ट बच्चे के हाथ और पैर पर सेंसर लगाकर खून में ऑक्सीजन की मात्रा मापता है। इसे जन्म के 24 घंटे बाद करना सबसे सही माना जाता है। गड़बड़ी मिलने पर इकोकार्डियोग्राम किया जाता है।
पूरी शारीरिक जांच
डिलीवरी के तुरंत बाद डॉक्टर बच्चे की सिर से पैर तक जांच करते हैं त्वचा का रंग, सांस लेने की गति और अंगों की बनावट देखी जाती है।
ब्लड, आंख और कान की जांच
एड़ी से खून लेकर मेटाबॉलिक बीमारियों की जांच होती है। इसके साथ ही आंखों (मोतियाबिंद) और कानों (सुनने की क्षमता) की भी स्क्रीनिंग की जाती है।
समय पर पहचान क्यों है जरूरी?
अगर जन्मजात बीमारियों की पहचान देर से होती है, तो इलाज मुश्किल और महंगा हो सकता है। समय रहते सही कदम उठाने से बच्चा एक सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकता है।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी संदेह की स्थिति में विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
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