Bharat Tiwari Encounter Case: बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में एक नया घटनाक्रम सामने आया है, जिसने प्रशासनिक फैसलों को लेकर बहस छेड़ दी है। हत्या के आरोप में नामजद किए गए तत्कालीन जगदीशपुर SDOP राजेश कुमार शर्मा को प्राथमिकी दर्ज होने के महज सात दिन बाद नई जिम्मेदारी सौंप दी गई है। गृह विभाग द्वारा जारी हालिया तबादला सूची में उन्हें मद्य निषेध एवं स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, पटना में पुलिस उपाधीक्षक के पद पर तैनात किया गया है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की जांच अभी जारी है। मृतक के परिजनों और कई सामाजिक संगठनों ने इस कदम पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि गंभीर आरोपों का सामना कर रहे अधिकारी को नई जिम्मेदारी (Bharat Tiwari Encounter Case) दिए जाने से जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग सकते हैं।
क्या है भरत तिवारी एनकाउंटर मामला?
भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को हुई पुलिस कार्रवाई के दौरान भरत तिवारी की मौत हो गई थी। पुलिस ने इसे एनकाउंटर बताया था, लेकिन परिजनों ने इस दावे को खारिज करते हुए इसे फर्जी मुठभेड़ करार दिया। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया (Bharat Tiwari Encounter Case) जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भरत तिवारी के शरीर में पांच गोलियां लगने की पुष्टि हुई। इसके बाद विपक्षी दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।
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हत्या की FIR के बाद हुई थी कार्रवाई
बढ़ते विवाद और परिजनों के आरोपों के बाद राज्य सरकार के निर्देश पर शाहपुर थाना में तत्कालीन SDOP राजेश कुमार शर्मा सहित अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या की नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई थी। FIR दर्ज होने के बाद सरकार ने तत्काल कदम उठाते हुए राजेश कुमार शर्मा को उनके पद से हटाकर (Bharat Tiwari Encounter Case) बिहार पुलिस मुख्यालय से अटैच कर दिया था। उन्हें पुलिस मुख्यालय में योगदान देने का निर्देश दिया गया था और मामले की जांच शुरू कर दी गई थी। (Bharat Tiwari Encounter Case)
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53 DSP के तबादले में मिला नया पद
हाल ही में बिहार गृह विभाग ने राज्यभर के 53 डीएसपी अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी किया। इसी सूची में राजेश कुमार शर्मा का भी नाम शामिल रहा। नए आदेश के अनुसार उन्हें पुलिस उपाधीक्षक, मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, पटना में नियुक्त किया गया है। वहीं जगदीशपुर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के पद पर पंकज कुमार मिश्रा को नई जिम्मेदारी दी गई है।राजेश कुमार शर्मा मूल रूप से सारण जिले के निवासी हैं। वह इंस्पेक्टर से पदोन्नत होकर वर्ष 2019 बैच में डीएसपी (Bharat Tiwari Encounter Case) बने थे और पिछले कुछ समय से भोजपुर जिले के जगदीशपुर अनुमंडल में तैनात थे।
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नई पोस्टिंग पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि हत्या की नामजद प्राथमिकी दर्ज होने और जांच जारी रहने के बावजूद आरोपी अधिकारी को इतनी जल्दी नई तैनाती क्यों दी गई। भरत तिवारी के परिजनों का कहना है कि जब किसी अधिकारी पर हत्या जैसा गंभीर आरोप हो और जांच पूरी भी न हुई हो, तब उसे दूसरी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना उचित नहीं माना जा सकता। परिजनों ने आशंका जताई है कि इससे मामले की निष्पक्षता को लेकर लोगों के मन में संदेह पैदा हो सकता है। उन्होंने निष्पक्ष जांच (Bharat Tiwari Encounter Case) और न्यायिक निगरानी में मामले की पड़ताल की मांग की है।
विपक्ष और सामाजिक संगठनों की नजर
भरत तिवारी एनकाउंटर पहले ही राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन चुका है। विपक्षी दल लगातार मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। वहीं कई सामाजिक संगठनों का कहना है कि पुलिस कार्रवाई की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए ताकि जनता का भरोसा कानून व्यवस्था पर बना रहे। अब राजेश कुमार शर्मा की नई पोस्टिंग के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई और सरकार का रुख आने वाले दिनों में इस मामले (Bharat Tiwari Encounter Case) की दिशा तय करेगा।
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