Bengal Case Post Mortem Report: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना अंतर्गत बारूईपुर में हुई 12 वर्षीय बालिका की हत्या के मामले में पुलिस प्रशासन और न्यायपालिका ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। एक साधारण गुमशुदगी से शुरू हुआ यह मामला अब एक जघन्य आपराधिक साजिश, प्रताड़ना और मॉब लिंचिंग के रूप में कानूनी फाइलों में दर्ज हो चुका है।
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Bengal Case Post Mortem Reporti: धारा 163 बीएनएसएस और प्रशासनिक नियंत्रण
वारदात के बाद भड़की सांप्रदायिक और सामाजिक अशांति को देखते हुए जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की। बारूईपुर, सोनारपुर और नरेंद्रपुर के अधिकार क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू की गई। यह कदम उस समय उठाना पड़ा जब ग्रामीणों ने सियालदह- नामखाना रेल मार्ग को बाधित किया और संदेह के आधार पर ‘इंद्रजीत तांती’ नामक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या (मॉब लिंचिंग) कर दी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बलों को तैनात करना पड़ा।
Bengal Case Post Mortem Report: ‘एंटी-मॉर्टम’ चोटों का वैज्ञानिक वर्गीकरण
चिकित्सीय और कानूनी जांच में सामने आया है कि 12 वर्षीय मृतका की मौत का तात्कालिक कारण उसे जीवित अवस्था में तालाब के पानी में डुबाना (Drowning) था, क्योंकि जांचकर्ताओं को उसके फेफड़ों और पेट के भीतर कीचड़ व दूषित पानी मिला है। इसके साथ ही, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह भी प्रमाणित हुआ है कि हत्या से पहले पीड़िता को गंभीर ‘एंटी-मॉर्टम’ (मौत से पहले की) शारीरिक प्रताड़ना दी गई थी, जिसमें उसके संवेदनशील अंगों को किसी गर्म चीज से जलाए जाने (थर्मल इंजरी) के निशान और सिर के पिछले हिस्से पर किसी भारी वस्तु से किए गए प्रहार के कारण हुआ अत्यधिक अंदरूनी रक्तस्राव शामिल है।
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Bengal Case Post Mortem Report: धारा 50,000 की फिरौती और आपराधिक षड्यंत्र
बारूईपुर पुलिस द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की पूछताछ में वित्तीय लाभ के लिए रची गई साजिश का पर्दाफाश हुआ है। मुख्य अभियुक्त आनंद सरदार ने मात्र ₹50,000 की फिरौती वसूलने के उद्देश्य से अपहरण की रूपरेखा तैयार की थी। शनिवार शाम के सीसीटीवी फुटेज में सह-अभियुक्त प्रभास मंडल पीड़िता को बहला-फुसलाकर ले जाता हुआ दिखा। आरोपियों ने पहचान उजागर होने के भय से अपनी रणनीति बदली और अपहरण को निर्मम हत्याकांड में तब्दील कर दिया।
Bengal Case Post Mortem Report: एफआईआर में शामिल गंभीर धाराएं और न्यायिक कस्टडी
बारूईपुर थाना पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता आनंद सरदार, दिवाकर सरदार और प्रभास मंडल के खिलाफ अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप), सुनियोजित हत्या, सबूत मिटाने और कड़े पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) जैसी कई गंभीर व गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है, जिसके बाद न्यायालय ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए इन तीनों मुख्य आरोपियों को 14 दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
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Bengal Case Post Mortem Report: फास्ट-ट्रैक कोर्ट और कठोरतम सजा की मांग
इस जघन्य कृत्य के बाद राज्य में बाल सुरक्षा कानूनों को लेकर कानूनी विशेषज्ञों के बीच बहस तेज हो गई है। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ताओं और परिजनों ने इस मामले को फास्ट-ट्रैक अदालत में चलाने की मांग की है ताकि अपराधियों को अविलंब मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनिश्चित की जा सके। पुलिस प्रशासन का कहना है कि वे फॉरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर एक अचूक चार्जशीट तैयार कर रहे हैं ताकि आरोपियों को कानून के दायरे में कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके।
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