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Lokhitkranti > उत्तराखंड > उत्तराखंड में बड़ा मतदाता सत्यापन अभियान, Uttarakhand SIR के बाद 8.41 लाख नाम हटने की संभावना, 2027 चुनाव से पहले बदल सकते हैं समीकरण
उत्तराखंड

उत्तराखंड में बड़ा मतदाता सत्यापन अभियान, Uttarakhand SIR के बाद 8.41 लाख नाम हटने की संभावना, 2027 चुनाव से पहले बदल सकते हैं समीकरण

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-07-06 11:21 पूर्वाह्न
By Lokhit Kranti 2 महीना ago
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Uttarakhand SIR: उत्तराखंड में आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले चल रही Uttarakhand SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया ने राज्य की चुनावी तस्वीर को बदलने के संकेत दे दिए हैं। 8 जून 2026 से शुरू हुआ Uttarakhand SIR का पहला चरण 7 जुलाई को पूरा हो रहा है। इस दौरान सामने आए शुरुआती आंकड़ों के अनुसार करीब 8.41 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं, जबकि प्री-एसआईआर प्रक्रिया में भी लगभग 4.95 लाख नाम पहले ही हटाए जा चुके हैं। यदि दोनों चरणों को मिलाकर देखा जाए तो करीब 13.36 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में बदलाव हुआ है, जो उत्तराखंड के चुनावी इतिहास की सबसे बड़ी मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रियाओं में से एक माना जा रहा है।

Contents
Uttarakhand SIR के बाद मतदाताओं की संख्या में बड़ा बदलाव89 प्रतिशत से अधिक गणना फॉर्म हुए डिजिटाइजकिन कारणों से हट सकते हैं 8.41 लाख नाम?इन जिलों में सबसे अधिक नाम हटने की संभावनाराजनीतिक दलों की बढ़ी चिंता2027 विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है बड़ा असर14 जुलाई को जारी होगी ड्राफ्ट मतदाता सूचीमतदाता सूची को पारदर्शी बनाने पर जोर

Uttarakhand SIR के बाद मतदाताओं की संख्या में बड़ा बदलाव

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2026 में उत्तराखंड में कुल 84.55 लाख पंजीकृत मतदाता थे। प्री-एसआईआर के दौरान मतदाता सूची का सत्यापन और त्रुटियों के सुधार के बाद यह संख्या घटकर 79.60 लाख रह गई।

अब Uttarakhand SIR के पहले चरण में 8.41 लाख मतदाताओं को एएसडी (Absent, Shifted, Dead) श्रेणी में रखा गया है। वर्तमान में 71.16 लाख मतदाताओं के गणना फॉर्म सफलतापूर्वक डिजिटाइज किए जा चुके हैं। यदि अंतिम सत्यापन के बाद एएसडी श्रेणी के अधिकांश नाम हटते हैं, तो 14 जुलाई को जारी होने वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची में लगभग 71.16 लाख मतदाता दर्ज हो सकते हैं।

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89 प्रतिशत से अधिक गणना फॉर्म हुए डिजिटाइज

Uttarakhand SIR के तहत राज्यभर में बीएलओ (BLO) द्वारा घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया गया। निर्वाचन विभाग के अनुसार अब तक लगभग 89.40 प्रतिशत गणना फॉर्म डिजिटाइज किए जा चुके हैं।

रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, चमोली और चंपावत जैसे पर्वतीय जिलों में 92 से 94 प्रतिशत तक डिजिटाइजेशन पूरा हो चुका है। वहीं देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जैसे बड़े जिलों में भी अधिकांश मतदाताओं का डेटा ऑनलाइन दर्ज किया जा चुका है। निर्वाचन आयोग का कहना है कि जिन मतदाताओं के फॉर्म अभी तक प्राप्त नहीं हुए हैं, उनके लिए भी विशेष अभियान जारी रहेगा।

किन कारणों से हट सकते हैं 8.41 लाख नाम?

Uttarakhand SIR के दौरान जिन मतदाताओं को एएसडी श्रेणी में रखा गया है, उनके पीछे कई कारण सामने आए हैं।

  • 1,24,278 मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है।
  • 4,79,762 मतदाता स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो चुके हैं।
  • 61,888 मतदाता पहले से किसी अन्य निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत पाए गए हैं।
  • 1,66,741 मतदाता सत्यापन के दौरान अनुपस्थित मिले।
  • 8,351 मामलों में अन्य कारण दर्ज किए गए हैं।

निर्वाचन विभाग का कहना है कि सभी मामलों का अंतिम सत्यापन किया जाएगा और पात्र मतदाताओं को दावा एवं आपत्ति दर्ज कराने का पूरा अवसर मिलेगा।

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इन जिलों में सबसे अधिक नाम हटने की संभावना

Uttarakhand SIR के आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक प्रभावित जिले मैदानी क्षेत्र के हैं।

  • देहरादून – 1,90,815
  • ऊधमसिंह नगर – 1,82,162
  • हरिद्वार – 1,31,047
  • नैनीताल – 72,053
  • अल्मोड़ा – 55,930
  • पौड़ी गढ़वाल – 53,386

इसके अलावा टिहरी गढ़वाल, पिथौरागढ़, चमोली, उत्तरकाशी, चंपावत, बागेश्वर और रुद्रप्रयाग में भी हजारों मतदाताओं के नाम हटाए जाने की संभावना जताई गई है।

राजनीतिक दलों की बढ़ी चिंता

Uttarakhand SIR के दौरान सामने आए आंकड़ों ने सभी राजनीतिक दलों को सतर्क कर दिया है। निर्वाचन विभाग ने मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर एएसडी श्रेणी में शामिल मतदाताओं की जानकारी साझा की है।

अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने कहा कि यदि कोई मतदाता अपना गणना फॉर्म भरकर बीएलओ को जमा कर देता है और वह पात्र पाया जाता है, तो उसका रिकॉर्ड डिजिटाइज कर सूची में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उद्देश्य किसी पात्र मतदाता का नाम हटाना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को पूरी तरह सटीक और अद्यतन बनाना है।

2027 विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है बड़ा असर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि Uttarakhand SIR के बाद मतदाताओं की संख्या में संभावित कमी आगामी विधानसभा चुनाव के समीकरण बदल सकती है। 2022 के विधानसभा चुनाव में राज्य में लगभग 81.43 लाख मतदाता थे, जबकि इस बार शुरुआती आंकड़ों के अनुसार यह संख्या घटकर 71.16 लाख तक पहुंच सकती है। यानी करीब 10 लाख मतदाताओं का अंतर देखने को मिल सकता है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह अंतर अंतिम सूची में भी बना रहता है तो कई विधानसभा सीटों पर जीत और हार का अंतर प्रभावित हो सकता है। खासकर देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जैसे जिलों में मतदाता संख्या में बदलाव चुनावी रणनीति को नया रूप दे सकता है।

14 जुलाई को जारी होगी ड्राफ्ट मतदाता सूची

निर्वाचन आयोग के अनुसार Uttarakhand SIR के पहले चरण के पूरा होने के बाद 14 जुलाई 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद लगभग एक महीने तक दावा और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा।

इस दौरान जिन मतदाताओं के नाम सूची में नहीं होंगे या जिनके रिकॉर्ड में कोई त्रुटि होगी, वे आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन कर सकेंगे। अंतिम सूची सभी दावों और आपत्तियों के निस्तारण के बाद जारी की जाएगी।

मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने पर जोर

निर्वाचन विभाग का कहना है कि Uttarakhand SIR का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह पारदर्शी, त्रुटिरहित और अद्यतन बनाना है। विभाग का दावा है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम बिना उचित प्रक्रिया के नहीं हटाया जाएगा।

फिलहाल सभी की निगाहें 14 जुलाई को जारी होने वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची पर टिकी हैं, क्योंकि यही सूची आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी और राजनीतिक रणनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। Uttarakhand SIR से सामने आए ये आंकड़े आने वाले महीनों में राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा चर्चा का विषय बने रह सकते हैं।

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