UGC NET 2026 Exam: राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित UGC NET 2026 Exam इस बार परीक्षा समाप्त होने के बाद नए विवादों में घिरता नजर आ रहा है। परीक्षा के परिणाम आने से पहले ही इंग्लिश और Sociology विषय के प्रश्नपत्रों को लेकर अभ्यर्थियों के बीच असंतोष बढ़ गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और विभिन्न छात्र समूहों में लगातार ऐसे दावे किए जा रहे हैं कि इंग्लिश विषय के कई प्रश्न वर्ष 2024 के प्रश्नपत्र से दोहराए गए हैं, जबकि Sociology के पेपर में सिलेबस से बाहर के प्रश्न, वर्तनी संबंधी त्रुटियां और अनुवाद की गलतियां देखने को मिलीं।
हालांकि, इन सभी दावों पर अभी तक NTA की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है। इसलिए फिलहाल इन आरोपों को उम्मीदवारों द्वारा लगाए गए दावों के रूप में ही देखा जा रहा है।
22 से 30 जून तक आयोजित हुई थी UGC NET 2026 Exam
इस वर्ष UGC NET 2026 Exam का आयोजन 22 जून से 30 जून के बीच देशभर के परीक्षा केंद्रों पर किया गया। परीक्षा दो शिफ्टों में आयोजित हुई, जिसमें 87 विषयों के लाखों अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया।
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पहली पाली सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित की गई। परीक्षा समाप्त होने के बाद अधिकांश विषयों के अभ्यर्थियों ने सामान्य प्रतिक्रिया दी, लेकिन इंग्लिश और Sociology विषय के पेपर को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है।
इंग्लिश पेपर में 67 प्रश्न दोहराए जाने का दावा
इंग्लिश विषय के अभ्यर्थियों का आरोप है कि UGC NET 2026 Exam में पूछे गए कुल 150 प्रश्नों में से लगभग 67 प्रश्न वर्ष 2024 के UGC NET इंग्लिश प्रश्नपत्र से मिलते-जुलते या पूरी तरह समान थे।
कई उम्मीदवारों ने पुराने प्रश्नपत्रों की तुलना करते हुए सोशल मीडिया पर स्क्रीनशॉट और सूची साझा की है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय स्तर की पात्रता परीक्षा में इस तरह बड़ी संख्या में पुराने प्रश्न दोहराया जाना परीक्षा की गुणवत्ता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है। अभ्यर्थियों का मानना है कि यदि यह दावा सही साबित होता है, तो भविष्य की परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर भी इसका असर पड़ सकता है।
Sociology पेपर पर AI से तैयार होने के आरोप
विवाद का दूसरा बड़ा कारण Sociology विषय का प्रश्नपत्र बना है। कई अभ्यर्थियों का दावा है कि UGC NET 2026 Exam का Sociology पेपर ऐसे तैयार किया गया, जिसमें कई प्रश्न निर्धारित सिलेबस से बाहर के थे।
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कुछ उम्मीदवारों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रश्नपत्र में प्रयुक्त भाषा और त्रुटियों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि पेपर तैयार करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग किया गया होगा। हालांकि, इस दावे की पुष्टि के लिए अभी तक कोई आधिकारिक या स्वतंत्र प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक NTA स्वयं इस संबंध में कोई जानकारी साझा नहीं करता, तब तक AI से पेपर तैयार होने की बात केवल उम्मीदवारों का आरोप ही मानी जाएगी।
समाजशास्त्रियों के नामों में कथित वर्तनी की गलतियां
Sociology विषय के उम्मीदवारों ने प्रश्नपत्र में कई प्रसिद्ध समाजशास्त्रियों और विद्वानों के नाम गलत लिखे जाने का भी आरोप लगाया है। अभ्यर्थियों के अनुसार कुछ प्रश्नों में प्रसिद्ध समाजशास्त्री George Ritzer का नाम Putzer, Talcott Parsons का नाम Parsow, G. S. Ghurye का नाम Ghunye, A. R. Desai का नाम A. K. Desai तथा Martha Nussbaum का नाम गलत रूप में लिखा गया।
उम्मीदवारों का कहना है कि ऐसी त्रुटियां राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में स्वीकार्य नहीं मानी जा सकतीं क्योंकि इससे प्रश्नों को समझने और सही उत्तर चुनने में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है।
हिंदी अनुवाद पर भी उठे सवाल
केवल अंग्रेजी संस्करण ही नहीं, बल्कि हिंदी माध्यम से परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों ने भी प्रश्नों के अनुवाद को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि कई प्रश्नों का हिंदी अनुवाद इतना अस्पष्ट था कि मूल प्रश्न का अर्थ ही बदल गया। इससे परीक्षा के दौरान समय की बर्बादी हुई और कई उम्मीदवार सही उत्तर देने को लेकर असमंजस में पड़ गए।
प्रतियोगी परीक्षाओं के विशेषज्ञों का मानना है कि द्विभाषी परीक्षाओं में अनुवाद की गुणवत्ता बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि लाखों विद्यार्थी उसी आधार पर उत्तर देते हैं।
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सोशल मीडिया पर तेज हुई जांच की मांग
UGC NET 2026 Exam के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्र की स्वतंत्र समीक्षा कराने की मांग उठाई है। कई उम्मीदवार चाहते हैं कि NTA प्रश्नपत्र, उत्तर कुंजी और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान इन आरोपों की विस्तार से जांच करे। कुछ अभ्यर्थियों ने संबंधित प्रश्नों को हटाने या बोनस अंक देने की भी मांग की है यदि त्रुटियां आधिकारिक रूप से स्वीकार की जाती हैं।
NTA की प्रतिक्रिया का इंतजार
अब तक NTA की ओर से इंग्लिश और Sociology प्रश्नपत्र को लेकर लगाए गए आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। परीक्षा एजेंसी आमतौर पर प्रोविजनल आंसर-की जारी होने के बाद अभ्यर्थियों से आपत्तियां आमंत्रित करती है और विशेषज्ञ समिति उनकी समीक्षा करती है।
ऐसे में संभावना है कि यदि उम्मीदवार इन मुद्दों को आधिकारिक आपत्ति के रूप में दर्ज कराते हैं, तो विशेषज्ञ समिति उनकी जांच करेगी और आवश्यक होने पर अंतिम उत्तर कुंजी में संशोधन भी किया जा सकता है।
UGC NET 2026 Exam को लेकर सामने आए विवाद ने परीक्षा की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर इंग्लिश पेपर में पुराने प्रश्न दोहराए जाने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर Sociology प्रश्नपत्र में सिलेबस, वर्तनी और अनुवाद संबंधी त्रुटियों को लेकर उम्मीदवार सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, इन सभी आरोपों पर अंतिम स्थिति NTA की आधिकारिक प्रतिक्रिया और विशेषज्ञ समिति की समीक्षा के बाद ही स्पष्ट होगी। तब तक अभ्यर्थियों की निगाहें उत्तर कुंजी और एजेंसी के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
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